कांग्रेस के शासन में राजस्थान बोर्ड की किताबों में 'वीर' नहीं रहे विनायक दामोदर सावरकर: प्रेस रिव्यू

  • 14 जून 2019
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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के महज़ छह महीनों के भीतर स्कूली किताबों में कई बदलाव किए हैं.

अख़बार लिखता है कि राजस्थान बोर्ड की नई किताबों में 12वीं कक्षा की इतिहास की किताब में विनायक दामोदर सावरकर के नाम के आगे से 'वीर' हटा दिया गया है.

अगर छह महीने पहले और अब की किताबों पर नज़र डालें तो दोनों में बड़ा फ़र्क़ नज़र आता है.

सावरकर: पुरानी किताबों में

पुरानी किताबों में यानी बीजेपी सरकार के दौरान किताब में सावरकर के नाम के आगे 'वीर' लगाया गया है और इसमें विस्तार से बताया गया है कि सावरकर ने भारत की आज़ादी की लड़ाई में किस तरह अपना योगदान दिया.

सावरकर: नई किताबों में

नई किताबों में यानी कांग्रेस की सरकार में छपने वाली किताबों में सावरकर के नाम के आगे से 'वीर' हटा दिया गया है और उन्हें 'विनायक दामोदर सावरकर' कहकर सम्बोधित किया गया है.

इन किताबों में बताया गया है कि सेल्युलर जेल में अंग्रेज़ों की यातना झेलने के बाद सावरकर ने ख़ुद को कैसे 'पुर्तगाल का बेटा' बताया और भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया.

इतिहास की इन नई किताबों में बताया गया है कि महात्मा गांधी की हत्या के मामले में गोडसे के साथ सावरकर पर भी मुक़दमा चलाया गया था लेकिन बाद में उन्हें बरी कर दिया गया.

सावरकर प्रसंग के अलावा भी अलग-अलग विषयों की किताबों में कई बदलाव किए गए हैं. जैसे, पुरानी किताबों में लिखा है कि अकबर हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप को हराने में कामयाब नहीं रहे. इनमें कहा गया है कि मुग़ल सेना ने मेवाड़ की सेना का पीछा नहीं किया क्योंकि वो डरी हुई थी.

दूसरी तरफ़ नई किताबों में कहा गया है कि महाराणा प्रताप अपने घोड़े 'चेतक' को मरते हुए छोड़कर युद्ध छोड़कर चले गए थे. नई किताबों में ये नहीं बताया गया है कि हल्दीघाटी के युद्ध में किसकी जीत हुई थी.

वहीं, 12वीं कक्षा की राजनीति विज्ञान की पुरानी किताबों में नोटबंदी के बारे में विस्तार से लिखा गया था और इसे 'काले धन का सफ़ाई अभियान' बताया गया था जबकि नई किताबों में नोटबंदी का कोई ज़िक्र नहीं है.

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#MeToo: 'नाना पर तनुश्री के आरोप झूठे'

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़, पुलिस ने कहा है कि भारतीय अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने यौन उत्पीड़न के जो आरोप नाना पाटेकर पर लगाए हैं वो झूठ हैं क्योंकि इसकी पुष्टि करने वाले कोई सबूत पुलिस को नहीं मिल सके हैं.

पुलिस ने ये भी कहा है कि तनुश्री दत्ता ने नाना पाटेकर के ख़िलाफ़ ये शिकायत 'ग़लतफ़हमी' की वजह से दर्ज कराई है हालांकि इसके पीछे उनकी कोई दुर्भावना नहीं थी.

पुलिस ने इस मामले में 51 पन्नों की अपनी रिपोर्ट अंधेरी मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश की है, जिसमें 13 गवाहों के बयान भी शामिल हैं. अब ये अदालत पर निर्भर करेगा कि वो मामले को आगे ले जाती है या केस यहीं बद हो जाता है.

तनुश्री दत्ता को भारत की एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में #MeToo मुहिम की शुरुआत करने का श्रेय दिया जाता है. उन्होंने आरोप लगाया था कि नाना पाटेकर ने एक गाने की शूटिंग के बहाने से उनके साथ यौन उत्पीड़न किया था.

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पूरे भारत में दिल्ली सबसे 'सूखी'

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली पूरे भारत का सबसे 'सूखा राज्य' है. अख़बार लिखता है कि मौजूदा महीने यानी जून में दिल्ली-एनसीआर देश का ऐसा क्षेत्र बन गया है जहां सबसे कम बारिश हुई है.

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली में 1 जून से 13 जून के बीच बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई जिसकी वजह से यह देश का एकमात्र ऐसा राज्य बन गया है जो बारिश से 100 फ़ीसदी दूर है.

मौसम विभाग के अनुसार ये तीन दशक में पहली बार है जब दिल्ली को बरसात के लिए इतना लंबा इंतज़ार करना पड़ा हो. पिछले साल दिल्ली में 15 मई को बारिश हुई थी.

फ़िलहाल भारत में जम्मू-कश्मीर, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप है ऐसे इलाक़े हैं जहां अब तक औसत से ज़्यादा बारिश हुई है.

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फ़ोर्ब्स की 'ग्लोबल 2000' में भारत की 57 कंपनियां

नवभारत टाइम्स में छपी ख़बर के अनुसार, बिज़नेस की दुनिया में मशहूर फ़ोर्ब्स पत्रिका में दुनिया की 2000 सबसे बड़ी कंपनियों की लिस्ट में भारत की लगभग 57 कंपनियों ने जगह बनाई हैं.

इस सूची में हाउसिंग और फ़ाइनेंस की दिग्गज कंपनी एचडीएफ़सी लिमिटेड को दुनिया के टॉप 10 कंज़्यूमर फ़ाइनेंस कंपनियों में शुमार किया गया है. वहीं, तेल एवं गैस क्षेत्र में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ को दुनिया भर की कंपनियों में 11वीं रैंक हासिल हुई है.

हालांकि टॉप-200 में भारत की सिर्फ़ रिलांयस इंडस्ट्रीज़ ही जगह बना पाई.

लिस्ट में 61 देशों की कंपनियों को जगह दी गई है, जिनमें अमरीका की सबसे ज़्यादा 575 कंपनियां शामिल हैं. इसके बाद चीन और हॉन्गकॉन्ग की 309 कंपनियां हैं. तीसरे नंबर पर जापान की 223 कंपनियां शामिल हैं.

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