मीसा भारती ने चुनाव हारने पर विकास परियोजनाओं की अनुशंसा को वापस लिया

  • 15 जून 2019
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राष्ट्रीय जनता दल की राज्यसभा सांसद और लालू यादव की बेटी डॉ. मीसा भारती पाटलिपुत्र लोकसभा चुनाव क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार राम कृपाल यादव से दोबारा चुनाव हारने के बाद इन दिनों अपनी सांसद निधि को लेकर चर्चा में हैं.

दरअसल फरवरी, 2019 तक मीसा भारती राज्यसभा सदस्य के रूप में तीन साल पूरा कर चुकी थीं, लेकिन उन्होंने अपनी सांसद निधि से एक भी योजना लागू करने की सिफारिश नहीं की थी.

जब लोकसभा चुनाव में उनकी उम्मीदवारी के संकेत मिले, तब उन्होंने आनन-फानन में चुनाव से क़रीब चार महीने पहले अपनी सांसद निधि से 15 करोड़ रुपये की योजनाएं लागू करने की अनुशंसा कर डाली.

इस संबंध में ज़िला योजना कार्यालय का कहना है कि "मीसा भारती पिछले तीन साल से राज्यसभा सांसद हैं. उस हिसाब से सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत उनकी पात्रता राशि 15 करोड़ रुपये है."

"उन्होंने अपने कार्यकाल के तीसरे साल में इस पात्रता राशि को सांसद निधि मद में खर्च करने की अनुशंसा इस साल जनवरी-फ़रवरी माह में की थी."

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हार के बाद बदला फ़ैसला

ज़िला योजना कार्यालय ने कहा, "उनकी अनुशंसा के आलोक में कार्यपालक अभियंता से अनुशंसा की गयी राशि से जुड़ा एस्टीमेट मांगा गया. उसके तहत विभिन्न योजनाओं के लिए लगभग छह करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति ज़िला योजना कार्यालय ने दे दी."

"लेकिन चुनाव के परिणाम आने के बाद मई माह के अंत में उन्होंने प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त राशि समेत सभी अनुशंसाओं को रद्द करने के लिए कार्यालय को आवेदन भेज दिया है."

"अब कार्यालय ने कार्यपालक अभियंता से रिपोर्ट तलब की है. फिलहाल यह फाइल पटना के ज़िलाधिकारी को समीक्षा के लिए सुपुर्द कर दी गयी है."

जानकार बताते हैं कि इस अनुशंसाओं के तहत जिन योजनाओं पर काम शुरू हो चुका होगा वे जारी रहेंगे और जिनपर काम शुरू नहीं हो पाया है उन्हें बंद कर दिया जाएगा.

जाहिर है चुनाव के ठीक पहले अचानक कई योजनाओं की अनुशंसा करना और चुनाव के बाद हारने पर उन्हें रद्द करना मीसा भारती के लिए गले की हड्डी बन गया है.

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विपक्ष ने की आलोचना

इस मुद्दे पर राजद कार्यालय में कोई नेता-कार्यकर्ता प्रतिक्रिया देने को तैयार नहीं है, लेकिन दबी जुबान से यह ज़रूर कह रहे हैं कि हम विरोधियों से लड़ सकते हैं, जनता-जनार्दन से समर्थन के लिए उन्हें समझा सकते हैं, लेकिन जिनके लिए हम यह सब कर रहे हैं उन्हें कौन समझाये.

सांसद मीसा भारती के इस कदम ने राज्य के सत्तारूढ़ दल को बैठे-बिठाये विपक्ष को घेरने का एक सुनहरा अवसर दे दिया है.

जदयू के मुख्य प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद इसे एक जनप्रतिनिधि के द्वारा किया गया अनैतिक कृत्य मानते हैं.

उनके अनुसार, "लोकतंत्र में जनता से समर्थन की अपेक्षा करना कतई बुरी बात नहीं है, लेकिन अगर जनता आपकी अपेक्षा के अनुरूप आपका समर्थन करने के लिए तैयार नहीं है तो यह कार्य एक प्रतिशोध की दृष्टि से किया गया जैसा ही है. यह सर्वथा निंदनीय है."

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फ़ैसले पर सवाल

इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार एसए शाद का कहना है, "मीसा भारती जुलाई, 2016 से राज्यसभा सदस्य हैं. संसदीय क्षेत्र का पोषण और जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मीसा सही समय में नहीं कर पायीं."

वो कहते हैं, "चुनाव में हार-जीत होती रहती है. इसमें जनता का कोई कसूर नहीं होता है. उनके इस कदम को चुनाव में मिली हार से जोड़कर देखा जाएगा. यह उनका गैर-ज़िम्मेदाराना रवैया है."

वहीं वरिष्ठ पत्रकार नचिकेता नारायण सांसद मीसा भारती के इस कदम को राजनीतिक रूप से अपरिपक्व फ़ैसला मानते हैं.

उनके अनुसार, "यह दर्शाता है कि उनमें राजनीतिक परिपक्वता की कमी है. कोई भी काम आपने शुरू किया था तो उसे अंजाम तक पहुंचाना चाहिये था."

वो कहते हैं, "यह उनका आखिरी चुनाव नहीं था. पांच साल बार फिर चुनाव होने हैं और अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया होता तो उन्हें इसका फ़ायदा आगामी चुनाव में मिल सकता था. लगता है कि उन्होंने इस बात पर किसी से विचार-विमर्श नहीं किया था. उनके इस फैसले से नकारात्मक संदेश गया है."

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