कोलकाताः डॉक्टरों की हड़ताल, राजनीति में उफ़ान, मरीज हलकान

  • 15 जून 2019
डॉक्टरों की हड़ताल कोलकाता

पांच दिनों से जारी चिकित्सकों की हड़ताल के ख़ात्मे की जो हल्की सी उम्मीद शुक्रवार को जगी थी, वो अब बुझती हुई नज़र आ रही है.

उम्मीद तब टूटती दिखी जब जूनियर डॉक्टरों के समूह ने मुख्यमंत्री के भेंट के न्योते को ये कहते हुए ठुकरा दिया कि ममता बनर्जी पहले उस अस्पताल-एनआरएस जाएं जहां जूनियर रेज़िडेंट डॉक्टरों की कथित पिटाई के बाद चिकित्सकों का विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ था, साथ ही तृणमूल मुखिया चंद दिनों पहले दिए गए बयान के लिए बिना शर्त माफ़ी मांगे.

हालांकि एक ख़बर ये भी है कि मुख्यमंत्री द्वारा शनिवार शाम पांच बजे राज्य सचिवालय में बुलाई गई बैठक को लेकर चिकित्सकों के समूह की राय बंटी हुई है और नबन्ना में बुलाई गई बैठक में शामिल हुआ जाए या नहीं इसका आख़िरी फ़ैसला सुबह होने वाली बैठक में लिया जाएगा.

फ़ैलता आंदोलन

दोनों पक्षों के बीच सुलह की कोशिश शहर के पांच प्रतिष्ठित डॉक्टरों की पहल पर हुई है, जिन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से शुक्रवार दोपहर बाद लगभग दो घंटे लंबी बैठक की, जिसके बाद एक उच्चाधिकारी जूनियर डॉक्टरों को बातचीत का न्योता देने के लिए भेजे गए.

शायद जिस वक़्त ये सारी गहमागहमी जारी थी, तक़रीबन उसी वक़्त राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी सोमवार हमले में घायल जूनियर डॉक्टर परिबाहा मुखोपाध्याय से कोलकाता के एक प्राइवेट अस्पताल में मुलाक़ात कर रहे थे और उन्होंने मीडिया को ये भी बताया कि मामले को सुलझाने के उनके प्रयास पर ममता बनर्जी की तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया है.

शुक्रवार को ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन की तरफ़ से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को लिखा गया एक ख़त मीडिया में घूमता नज़र आया और उन्होंने एक बयान देकर कहा कि वो ममता बनर्जी से संपर्क की असफ़ल कोशिश कर रहे हैं और डॉक्टरों के आंदोलन को समाप्त करने की कोशिश को प्रतिष्ठा और राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए.

14 जून को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ख़त में हर्षवर्धन ने डॉक्टरों के इस बड़े होते आंदोलन का ज़िक्र करते हुए लिखा कि आंदोलन देश के दूसरे हिस्सों में फैल रहा है और कई अस्पतालों में ओपीडी (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) ने काम करना बंद कर दिया है जिससे दूर-दूर से इलाज के लिए आए मरीज़ों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

कोलकाता के एक अस्पताल एनआरएस यानी नील रतन सरकार मेडिकल कॉलेज अस्पताल से शुरू हुआ जूनियर डॉक्टरों का आंदोलन शहर और फिर सूबे के दूसरे अस्पतालों से होते हुए देश के कई हिस्सों, यहां तक के दिल्ली और दूसरे शहरों में मौजूद ऑल इंडिया मेडिकल साइंसेस अस्पताल (एम्स) तक पहुंच गया है.

Image caption अरशद अली अपने मरीज को लेकर अस्पताल के बाहर बैठने को मजबूर हैं

सोमवार को देशव्यापी आंदोलन

पश्चिम बंगाल के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कालेजों को मिलाकर 600 से अधिक सीनियर चिकत्सकों के जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन के समर्थन में त्यागपत्र देने की चर्चा कई तरफ़ हो रही है हालांकि सरकार ने इन त्यागपत्रों को फ़िलहाल मंज़ूर नहीं किया है.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव डॉक्टर आरवी असोकन ने बताया कि सोमवार को एनआरएस के जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में 24-घंटे के देश्व्यापी विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया गया है और उनकी मांग है कि पश्चिम बंगाल में जारी संकट को युवा डॉक्टरों की संतुष्टि से समाप्त किया जाए और चिकित्सकों की सुरक्षा से जुड़ा एक केंद्रीय क़ानून जल्द से जल्द बने.

हालांकि पिछले दो दिनों से कोलकाता शहर और राज्य के कई दूसरे सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी सेवा बहाल हो गई है लेकिन एक सीनियर डॉक्टर ने बीबीसी को बताया कि जूनियर डॉक्टरों के बिना सेवा को लंबे समय तक चलाना मुश्किल होगा.

कोलकाता नेशनल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों के साथ नर्सों का समूह भी बैठा दिखा, जिनमें से एक रिया दास ने कहा कि नर्सों को लगता है कि आज डॉक्टरों पर एक मरीज़ के नातेदारों ने जिस तरह का हमला किया है, कल को उनपर भी हो सकता है इसलिए उनका समूह चिकित्सकों के साथ है.

Image caption रेज़िडेंट डॉक्टर सायन रॉय का कहना है कि पीड़ित डॉक्टर के कपाल में गंभीर चोटें आई हैं

राजनीतिक रंग

चिकित्सा सेवा से जुड़े लोगों का कहना है कि के मरीज़ों के नातेदारों के ज़रिये डॉक्टरों पर हमले की ये पहली घटना नहीं है बावजूद इसके सुरक्षा को लेकर उनकी मांग की प्रशासन हमेशा अनसुनी करता रहा है.

आंदोलन में शामिल रेज़िडेंट डॉक्टर आत्मदीप बनर्जी के मुताबिक़ एनआरएस में भर्ती एक बुज़ुर्ग मरीज़ की सोमवार को मौत हो गई जिसके बाद तक़रीबन दो ट्रकों में भरकर कुछ लोग अस्पताल पहुंचे और जूनियर डॉक्टरों के साथ मारपीट की जिनमें से एक डॉक्टर के कपाल में गंभीर चोटें आईं हैं और वो अस्पताल में भर्ती हैं.

आत्मदीप बनर्जी ने सोमवार को हुई घटना को सोची-समझी कारस्तानी बताया हालांकि वो ये नहीं बता पाये कि ये किसकी सोच थी.

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मुकुल राय ने हालांकि ये कहकर कि "ये हमला एक विशेष समुदाय द्वारा किया गया है, जो तृणमूल पार्टी के समर्थक हैं," इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की.

वहीं ममता बनर्जी जो एनआरएस के आंदोलनकारी डॉक्टरों के पास जाने की बजाए गुरुवार को शहर के एक दूसरे अस्पताल गईं, और "ये कुछ बाहरी लोगों की कारस्तानी है" का बयान देकर उन्होंने आंदोलन को बाहरी बनाम स्थानीय के खांचे में खींचने की कोशिश की.

जूनियर रेज़िडेंट डॉक्टर सयान राय ने कहा कि हम किसी को किसी तरह के बयान देने से नहीं रोक सकते हैं लेकिन हमारा आंदोलन किसी रानजीति से प्रेरित नहीं और न ही इसे उस रंग में रंगने की कोशिश की जानी चाहिए.

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