चेन्नई में पानी को लेकर झड़पें, गहराया जल संकट- पाँच बड़ी ख़बरें

  • 17 जून 2019
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भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में जल संकट गहराता जा रहा है. पानी के स्रोत सूखे पड़े हैं और मॉनसून अभी आता दिख नहीं रहा है.

पानी का संकट इतना विकट हो गया है कि चेन्नई शहर के कई इलाक़ों से पानी को लेकर झड़पों की ख़बरें आने लगी हैं. कुछ इलाक़ों में लोगों को सात-आठ किलोमीटर तक पानी लेने के लिए जाना पड़ रहा है.

हालात इतने ख़राब होते जा रहे हैं कि शहर के रेस्त्रांओ और आईटी कंपनियों तक का काम प्रभावित हो रहा है. चेन्नई में 65 फ़ीसदी तक रेस्त्रां पानी के संकट से प्रभावित हैं.

होटल मालिकों की एसोसिएशन का कहना है कि पानी इतना महंगा हो गया है कि इससे होटलों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है. ये जल संकट सिफ़ चेन्नई तक ही सीमित नहीं है.

कुछ दिन पहले ही तमिलनाडु के थंजावुर में सार्वजनिक टंकी से सीमित पानी लेने को लेकर हुए एक झगड़े में आनंद बाबू नाम के सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई थी.

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डॉक्टरों की देशव्यापी हड़ताल

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने आज देशभर में डॉक्टरों की हड़ताल बुलाई है. इस दौरान आपात सेवाओं को छोड़कर सभी तरह की चिकित्सीय सेवाएं प्रभावित रहेंगी. वहीं दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान केंद्र यानी एम्स ने इस हड़ताल से ख़ुद को अलग कर लिया है.

कोलकाता में जूनियर रेज़िडेंट डॉक्टर से मरीज़ के परिजनों की मारपीट के बाद पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर हड़ताल पर हैं. उन्हीं के समर्थन में और चिकित्सीय सेवाओं में लगे कर्मचारियों के लिए बेहतर सुरक्षा की मांग को उठाने के लिए आईएमए ने ये हड़ताल बुलाई है.

डॉक्टर चाहते हैं कि उनकी सुरक्षा के लिए नया केंद्रीय क़ानून बनाया जाए. भारत सरकार ने ऐसा क़ानून लाने का वादा भी किया है. दूसरी ओर कोलकाता में हड़ताल कर रहे डॉक्टरों और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच आज दोपहर तीन बजे मुलाक़ात होनी है.

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कांग्रेस को है बड़ी सर्जरी की ज़रूरत

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली ने कहा है कि कांग्रेस के भीतर बड़ी सर्जरी की ज़रूरत है. मोइली ने ये भी कहा कि राहुल गांधी को चाहिए कि वो पूरी पार्टी को अपने नियंत्रण में रखें. मोइली का मानना है कि राहुल गांधी एकमात्र नेता हैं जो कांग्रेस को संकट से निकाल सकते हैं.

कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता ने कहा कि राज्य के कांग्रेस प्रमुखों की जवाबदेही तय करने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा, ''राहुल गांधी को कांग्रेस प्रमुख से हटने की कोई ज़रूरत नहीं है. जिसके हाथ में कांग्रेस की कमान एक या डेढ़ साल से है उसे हार के लिए ज़िम्मेदार ठहराना क़तई उचित नहीं है. राहुल गांधी को साबित करने के लिए पूरा वक़्त मिलना चाहिए. महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा में चुनाव होने वाले हैं और इसके लिए अभी से लगने की ज़रूरत है.''

मोइली ने कहा कि यह टाइम कांग्रेस के नए प्रमुख के लिए माथापच्ची करने का नहीं है. उन्होंने कहा कि राज्य में कांग्रेस प्रमुखों को बदलने की ज़रूरत है. मोइली ने कहा कि चुनाव में हमें अच्छे उम्मीदवारों को टिकट देने की ज़रूरत है.

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प्रधानमंत्री ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

प्रधानमंत्री 19 जून को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में 'अपने एक देश एक चुनाव' के विचार पर चर्चा करेंगे. सोमवार से सत्तरहवीं लोकसभा का सत्र शुरू होने से पहले रविवार शाम हुई पार्टीयों की बैठक में प्रधानमंत्री ने ये घोषणा की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के दौरान कहा कि संसद नए जोश और नए विचारों के साथ शुरू होनी चाहिए.

17वीं लोकसभा के पहले सत्र की शुरूआत आज यानी 17 जून से होने जा रही है. इसी सत्र में आम बजट पास होगा और सरकार की प्राथमिकता में तीन तलाक़ भी है. पीएम मोदी ने लोकसभा सत्र की शुरुआत से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई थी.

इस बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि लोकसभा में इस बार कई नए चेहरे चुनकर आए हैं इसलिए सत्र की शुरुआत नई ऊर्जा और उत्साह से होनी चाहिए. सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस ने बेरोज़गारी, कृषि समस्या, सूखा, प्रेस की स्वतंत्रता और जम्मू-कश्मीर में जल्दी चुनाव कराने जैसे मुद्दों को उठाया. कांग्रेस ने कहा कि वो संसद में इन मुद्दों को उठाएगी और अपनी विचारधारा की लड़ाई को आगे बढ़ाती रहेगी.

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हॉन्कॉन्ग में अभी भी लाखों लोग सड़कों पर

हॉन्गकॉन्ग में विवादास्पद प्रत्यर्पण बिल के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बाद अब भी सड़कों पर हज़ारों लोग हैं. कई प्रदर्शनकारी रात भर डेरा डाले रहे, जबकि अन्य को बैरिकेड लगाते हुए देखा गया. लेकिन ख़बर है कि माहौल अब बेहतर है जो कि पिछले हफ्ते काफी तनावपूर्ण रहा.

ड्यूटी पर पहले से कम पुलिस है. आयोजकों का कहना है कि लगभग 20 लाख लोगों ने रविवार के विरोध में भाग लिया, यानी ये हांगकांग के इतिहास का सबसे बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है.

सरकार ने उस प्रत्यर्पण बिल को निलंबित कर दिया है जिसमें अभियुक्तों को चीन भेजने की अनुमति थी. लेकिन विरोधियों का कहना है कि इसे पूरी तरह से वापस लेना चाहिए.

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