जस्टिस रंजन गोगोई बोले: न्यायपालिका पर बढ़ते लोकप्रियतावाद का है ख़तरा- पाँच बड़ी ख़बरें

  • 19 जून 2019
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भारतीय सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने मंगलवार को कहा है कि स्वतंत्र न्यायापालिका की राह में बढ़ते लोकप्रियतावाद से ख़तरा है.

गोगोई ने न्यायपालिका से कहा कि संवैधानिक मूल्यों को बचाने के लिए लोकप्रियतावादी ताक़तों के सामने डटकर खड़ा होने की ज़रूरत है.

शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) देशों के मुख्य न्यायधीशों और जजों को संबोधित करते हुए जस्टिस गोगोई ने कहा कि लोकप्रियतावाद के बढ़ते चलन में जजों को नीचा दिखाने के लिए कहा जाता है कि जिन्हें जनता ने नहीं चुना है वो निर्वाचित बहुमत के फ़ैसलों को पलट रहे हैं.

जस्टिस गोगोई ने कहा, ''कुछ आलोचकों का कहना है कि इन हालात में केसों की सुनवाई के दौरान यह तर्क दिया जाना चाहिए कि ग़ैर-निर्वाचित जजों के पास संविधान का बहुमत है और वो निर्वाचित प्रतिनिधियों को संविधान के रास्ते पर उनके फ़ैसले को लाएंगे. पूरी दुनिया में न्यायपालिका पर इस तरह का दबाव है. हैरानी की बात है कि कुछ न्यायपालिका लोकप्रियतावाद के सामने झुक गई हैं.''

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इनकम टैक्स के 15 और अफ़सर बर्ख़ास्त

सरकार ने मंगलवार को इनकम टैक्स विभाग के 15 और वरिष्ठ अफ़सरों की नौकरी से छुट्टी दे दी है. वित्त मंत्रालय की ओर से भेजी फ़ाइल पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मुहर लगा दी है.

ग़ौरतलब है कि अभी कुछ ही दिन पहले वित्त मंत्रालय ने इनकम टैक्स विभाग से जुड़े 12 वरिष्ठ अफ़सरों को वॉलिन्टयरी रिटायरमेंट दे दिया था.

इन 15 अफ़सरों में असिस्टेंट कमिश्नर, प्रिंसिपल कमिश्नर या कमिश्नर स्तर के अधिकारी हैं. मंत्रालय के अनुसार, इन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, वसूली और रिश्वतखोरी के आरोप थे.

बर्खास्त होने वाले इन अफ़सरों में से एक ने रेवेन्यू सेक्रेटरी पर निजी रंजिश के चलते ऐसा करने का आरोप लगाया है.

बर्ख़ास्त होने वालों में प्रिंसिपल कमिश्नर रहे अनूप श्रीवास्तव, जो कि इंडियन रेवेन्यू सर्विस ऑफ़िसर्स असोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं, ने एक बयान जारी कर रेवेन्यू सेक्रेटरी अजय भूषण पांडे पर निजी कारणों से कार्रवाई करने का आरोप लगाया.

जबकि वित्त मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा है कि क्लॉज (जे) की धारा 56 के तहत, राष्ट्रपति ने जनहित में भारतीय राजस्व सेवा के 15 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत्त कर दिया है.

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वन नेशन वन पोलः ममता बनर्जी नहीं शामिल होंगी

एक देश एक चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में होने वाली बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमत्री ममता बनर्जी और तेलगू देशम पार्टी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू शामिल नहीं होंगे.

संसदीय मामलों के मंत्री पर्हाल जोशी को लिखे पत्र में ममता बनर्जी ने कहा है कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर इतने कम समय में कोई फैसला नहीं लिया जा सकता है.

इससे पहले नीति आयोग की बैठक में भी ममता बनर्जी शामिल नहीं हुई थीं.

प्रधानमंत्री ने पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनावों को एक साथ किए जाने को लेकर सभी दलों के बीच एक सहमति बनाए जाने का आह्वान किया था.

ख़बर है कि तलंगाना राष्ट्र समिति के मुखिया और तेलंगाना मुख्यमंत्री केसी राव भी इस बैठक में अनुपस्थित रहेंगे. वाईएसआर कांग्रेस के नेता और आंध्र प्रदेश के नए मुख्यमंत्री वाईएस जगन रेड्डी के इस बैठक में शामिल होने की संभावना है.

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मॉनसून में आने में और देरी

वायु चक्रवात के कारण इस साल मॉनसून की दस्तक में काफ़ी देरी हो चुकी है. मौसम विभाग का कहना है इस बार मॉनसून के आने में कम से कम पिछले 12 सालों में सबसे देरी हुई है. अभी तक महज 10-15 फ़ीसदी मॉनसून ही देश में पहुंचा है.

सामान्य स्थिति में मॉनसून अब तक भारत के दो तिहाई हिस्सों में पहुंच जाता था. मॉनसून में देरी के कारण देश भर में एक जून से 44 फ़ीसदी कम हुई. अब तक मॉनसून की दस्तक पूरे केरल, दक्षिणी कर्नाटक, दो तिहाई तमिलनाडु और पूर्वोत्तर भारत में हो गई है. मौसम विभाग का कहना है कि मॉनसून की मज़बूती में अभी हफ़्ते भर का वक़्त लग सकता है.

मौसम विभाग में मॉनसून की भविष्यवाणी करने वाले डी सिवनानंद ने कहा, ''हमें उम्मीद है कि मॉनसून अगले दो से तीन दिनों में कोंकण तट पर पहुंच जाएगा और 25 जून तक पूरे माहाराष्ट्र को कवर कर लेगा. जून के अंत तक पूरा मध्य भारत में मॉनसून की दस्तक हो जाएगी. इसका मतलब ये है कि सामान्य रूप इस बार मॉनसून 15 दिन पीछे है.''

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पाक सेना का दख़ल अब अर्थव्यवस्था में

पाकिस्तानी सेना का अब देश के आर्थिक मामलों में भी बड़ी भूमिका निभाने जा रही है.

प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के नेतृत्व में बनाए गए नेशनल डेवलपमेंट काउंसिल (एनडीसी) में पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख क़मर जावेद बाजवा को भी शामिल किया गया है.

तेरह सदस्यों वाला एनडीसी निकाय विकास के लिए नीतियां और रणनीति तय करेगा और क्षेत्रीय सहयोग की रूपरेखा तय करेगा.

माना जा रहा है कि इससे पाकिस्तानी सेना का देश की आर्थिक नीतियों पर भी सीधा हस्तक्षेप होगा.

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