'मोदी के गुरु' संभाजी भिड़े के नासा विज्ञानी होने का सच

  • 22 जून 2019
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दावाः संभाजी भिड़े नासा की सलाहकार समिति में काम करते थे और उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में 100 से ज़्यादा सम्मान मिल चुके हैं. संभाजी भिड़े एटॉमिक फिजिक्स में गोल्ड मेडलिस्ट हैं.

इतना ही नहीं, उनके बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वो नासा की सलाहकार समिति में काम करते थे, 67 डॉक्टरेट और पोस्ट डॉक्टरेट रिसर्च में गाइड रहे थे, अब महाराष्ट्र में समाज सेवा कर रहे हैं और उनके 10 लाख से भी ज़्यादा फॉलोअर्स हैं.

फ़ैक्ट चेक:बीबीसी ने सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही इस ख़बर की पड़ताल की. संभाजी भिड़े के संगठन के प्रवक्ता नितिन चौगुले ने इन दावों को ग़लत बताया है. पुणे यूनिवर्सिटी ने भी उनसे संबद्ध एक कॉलेज में भिड़े के प्रोफ़ेसर या स्टूडेंट होने की जानकारी न होने की बात कही.

वायरल मैसेज क्या है?

सोशल मीडिया पर संभाजी भिड़े से जुड़ी एक ख़बर फैलाई जा रही है जिसके अनुसार वो एटॉमिक फिज़िक्स में गोल्ड मेडलिस्ट हैं और पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज में प्रोफेसर रह चुके हैं.

वायरल पोस्ट में बताया जा रहा है कि उनको 100 से भी ज़्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है.

भिड़े के बारे में इतना सबकुछ प्रधानमंत्री के साथ उनकी एक तस्वीर को साझा करते हुए कहा जा रहा है.

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अगर हम गूगल पर संभाजी भिड़े सर्च करें तो सबसे पहले कुछ इस तरह की चीज़ें सामने आती हैं.

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कौन हैं संभाजी भिड़े?

महाराष्ट्र के सांगली ज़िले के रहने वाले संभाजी 80 साल के हैं और महाराष्ट्र के हिंदू संगठन श्रीशिव प्रतिष्ठान से जुड़े हुए कार्यकर्ता हैं.

संभाजी आरएसएस के बड़े कार्यकर्ता बाबाराव भिड़े के भतीजे हैं, संभाजी खुद भी आरएसएस से जुड़े थे लेकिन बाद में विवाद होने पर उन्होंने सांगली में एक समानांतर आरएसएस का गठन किया.

संभाजी ने 1984 में श्रीशिव प्रतिष्ठान की स्थापना की जिसकी वेबसाइट पर बताया गया है कि उनका "लक्ष्य हिंदुओं को शिवाजी और संभाजी के ब्लड ग्रुप का बनाना है."

1 जनवरी, 2018 को भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा के मामले में श्रीशिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान के संस्थापक संभाजी और हिंदू एकता अघाड़ी के मिलिंद एकबोटे पर पुणे के पिंपरी पुलिस स्टेशन में केस दायर किया गया था.

इन दोनों हिंदुत्ववादी नेताओं पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा था. इस वजह से संभाजी भिड़े का नाम चर्चा में आया था.

2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी की मुलाक़ात संभाजी भिड़े से रायगढ़ किले पर हुई थी.

इस दौरान प्रधानमंत्री ने मंच से संभाजी भिड़े की प्रशंसा की थी.

रायगढ़ में पीएम मोदी ने भिड़े के बारे में कहा था, "मैं भिड़े गुरु जी का बहुत आभारी हूँ क्योंकि उन्होंने मुझे निमंत्रण नहीं दिया बल्कि उन्होंने मुझे हुक्म दिया था, मैं भिड़े गुरु जी को बहुत सालों से जानता हूँ और हम जब समाज जीवन के लिए कार्य करने के संस्कार प्राप्त करते थे तब हमारे सामने भिड़े गुरु जी का उदाहरण प्रस्तुत किया जाता था."

उन्होंने कहा था, "अगर कोई भिड़े गुरु जी को बस पर या रेल के डिब्बे में मिल जाए तो कल्पना नहीं कर सकता कि ये कितने बड़े महापुरुष हैं, कितने बड़े तपस्वी हैं. अंदाजा नहीं कर सकता है."

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वायरल हो रही बातों का सच

बीबीसी ने इस मैसेज की पड़ताल की.

संभाजी भिड़े के संगठन शिव प्रतिष्ठान के प्रवक्ता नितिन चौगुले ने इस बात का दावा किया कि संभाजी भिड़े एटॉमिक फिजिक्स में गोल्ड मेडलिस्ट हैं.

साथ ही, उन्होंने इस बात का भी दावा किया कि वह फर्ग्युसन कॉलेज में प्रोफ़ेसर रह चुके हैं.

आख़िरी बात में उन्होंने सहमति दी कि भिड़े अब महाराष्ट्र में समाज सेवा कर रहे हैं और उनके 10 लाख से भी ज़्यादा फॉलोअर्स हैं.

लेकिन उन्होंने इन बातों को गलत बताया-

1. उनको 100 से भी अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है.

2. वह नासा की सलाहकार समिति में काम करते थे.

3. वह 67 डॉक्टरेट और पोस्ट डॉक्टरेट रिसर्च में गाइड रहे थे.

बीबीसी ने कॉलेज की वेबसाइट देखने पर पाया कि कॉलेज में एटॉमिक फिज़िक्स का कोई भी कोर्स नहीं है.

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इसके बाद हमने पुणे विश्वविद्यालय के एक अधिकारी से बात की. अधिकारी ने बताया कि फर्ग्युसन कॉलेज से मिली जानकारी से ये पता चलता है कि कॉलेज के पास ये साबित करने के लिए कोई दस्तावेज या रेकॉर्ड नहीं है कि भिड़े वहाँ छात्र या प्रोफ़ेसर थे.

बीबीसी ने फ़र्ग्युसन कॉलेज के प्रिंसिपल रवींद्र परदेशी से बात करने की कोशिश की लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के एक लेख के अनुसार फर्ग्युसन कॉलेज को चलाने वाली संस्था के सदस्य किरण शालिग्राम ने बताया कि भिड़े वहाँ पर प्रोफ़ेसर थे पर उन्हें भी ये बात नहीं पता कि वह कब से कब तक वहां पर प्रोफ़ेसर थे.

बीबीसी भी इन दो बातों की पुष्टि नहीं कर सकता कि संभाजी भिड़े वहां पर स्टूडेंट और प्रोफेसर थे क्योंकि कॉलेज के पास उनका कोई भी रिकॉर्ड नहीं है.

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