चेन्नई जल संकट के दौरान किस हाल में जी रहे हैं लोग

  • 24 जून 2019
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तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई इस समय अपने सबसे गहरे जल-संकट से जूझ रही है.

ऐेसे में यह भी लगता है कि जैसे इस शहर के लोगों ने पानी की कमी के साथ जीना सीख लिया है.

चेन्नई में मछुआरों की एक कॉलोनी में जलसंकट से जूझ रहे लोगों की दशा को कोई बयां नहीं कर सकता. यहां पर बोरवेल से निकलने वाला पानी भी नमकीन है.

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सरकार टैंकर से जो पानी उपलब्ध करा रही है वो गंदगी से भरा है. इसके साथ ही पानी की आपूर्ति भी कभी-कभी ही होती है. शायद दिन में एक बार.

लेकिन इस सबके बावजूद इस कॉलोनी में रहने वाली महिला सरिता इस संकट के समय भी साहस का परिचय देती हुई दिखाई दे रही हैं.

सरिता बताती हैं, "हम इसमें कुछ नहीं कर सकते. पहले हमें पीने के लिए बिलकुल पानी नहीं मिला. ये बहुत बड़ी बात है कि अब हमें कुछ पानी मिल रहा है."

ये बात सही है कि सरिता ने गंदे पानी पीने की वजह से कुछ लोगों के बीमार होने की बात सुनी है.

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आपसी सहयोग

लेकिन वो इस बात को लेकर सुनिश्चित नहीं हैं कि उनका पूरा मोहल्ला गंदा पानी पीने की वजह से परेशान है.

ये गंदा पानी इस मोहल्ले के बीचों-बीच बने एक पंप से आता है.

ये बात स्पष्ट है कि इस पंप से पानी निकालने वाला पाइप बीच में कहीं फट गया है जिसकी वजह से उसमें मिट्टी मिल रही है.

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Image caption सरिता के ड्रम का पानी मटमैला है

लेकिन यहां रहने वाले लोग पंप के आसपास गंदगी को साफ़ करने की कोशिश करते हैं. वहीं, कुछ लोग लाइन में लगकर पानी हासिल करते हैं.

एक अन्य नागरिक विजयश्री बताती हैं, "हर घर को चार ड्रम पानी मिलता है. हम सभी इसे शेयर करते है. पहले हमारे बीच पानी की मात्रा को लेकर झगड़ा हुआ करता था. लेकिन अब ऐसा नहीं होता है."

"अगर हमें पर्याप्त पानी नहीं मिलता है तो झगड़े होना स्वाभाविक है."

मछुआरों की इस बस्ती मे पानी को लेकर जो संघर्ष चल रहा है वो उस संघर्ष की एक झलक भर है जिससे ये शहर जूझ रहा है.

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लेकिन चार साल पहले उत्तरी-पूर्वी मॉनसून के दौरान इसी शहर को बाढ़ का सामना करना पड़ा था. लेकिन 2018 में मॉनसून के कमजोर रहा.

इसके बाद छह महीने के समय में चेन्नई के चार बड़े जलाशयों में पानी निचले स्तरों में पहुंच गया.

पॉंन्डी जलाशय की क्षमता 3231 मिलियन क्युबिक फीट है लेकिन इसमें सिर्फ 26 मिलियन क्युबिक फीट पानी था. वहीं, चोलावरम की कुल क्षमता 1081 मिलियन क्युबिक फीट और रेड हिल्स की क्षमता 3300 मिलियन क्युबिक फीट है. लेकिन इन दोनों जलाशयों में बिलकुल पानी नहीं है.

इसके साथ ही चेमपाराबक्कम जलाशय की क्षमता 3654 मिलियन क्युबिक फीट है.

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साल 2015 में इसी जलाशय में पानी ज़्यादा भरने की वजह से चेन्नई में बाढ़ आई थी. लेकिन बीती 16 जून को इस जलाशय में मात्र 1 मिलियन क्युबिक फीट पानी बचा है.

चेन्नई नगर निगम जलापूर्ति और सीवरेज़ बोर्ड ने ये सभी आंकड़े चेन्नई हाईकोर्ट में पानी की कमी पर दाखिल की गई एक पेटिशन की सुनवाई के दौरान दिए हैं.

चेन्नई में सिर्फ एक मॉनसून के दौरान बारिश होती है. जबकि पूरे देश को दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून आने पर वर्षाजल प्राप्त होता है. इसकी वजह से पानी की कमी 38 फीसदी तक पहुंच चुकी है.

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74 लाख लोगों वाला ये शहर 436 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है. लेकिन ये शहर अपनी पानी की कमी पूरी करने के लिए खेती के लिए प्रयोग होने वाले कुओं का प्रयोग करते हैं.

पानी की कमी के चलते चेन्नई में एक टैंकर पानी की कीमत पांच गुना तक बढ़ गई है.

पश्चिमी ममबलम में रहने वाली अनुराधा सांथानम बताती हैं, "हम पहले पानी पर 1 हज़ार रुपये प्रतिमाह खर्च करते थे. हम 16 मंजिल वाली इमारत में रहते हैं. लेकिन अब हमें पानी पर 4000 रुपये प्रतिमाह खर्च करने पड़ते हैं. कभी-कभी जब तापमान बढ़ जाता है तो हमें उस पानी से नहाना पड़ता है जो कि हम पीने और खाना बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं."

ई. पालानीस्वामी की सरकार ने केरल की सरकार की ओर से 20 लाख लीटर पानी भेजने के प्रस्ताव को आख़िरकार स्वीकार कर लिया है.

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