ममता बनर्जी के नेताओं ने लौटाना शुरू किया 'कटमनी'

  • 25 जून 2019
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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने स्थानीय लोगों के दबाव में कटमनी के तौर पर ली गई 2.28 लाख रुपए की रक़म मंगलवार को लौटा दी.

यह घटना बीरभूम जिले के सिउड़ी की है. स्थानीय लोगों ने टीएमसी नेता से कटमनी वापस करने की मांग में सुबह एक सालिसी सभा यानी पंचायत का आयोजन किया था.

स्थानीय भाषा में कटमनी उस रकम को कहा जाता है जो सत्तारुढ़ पार्टी के नेता सरकारी परियजोनाओं के लिए आवंटित रकम में से कमीशन के तौर पर लेते हैं. उसी में गांव वालों से सादे काग़ज पर हस्ताक्षर कराने के बाद उन्होंने प्रति व्यक्ति 1,617 रुपए के हिसाब से 141 लोगों को इस रक़म का भुगतान कर दिया.

स्थानीय लोगों ने बताया कि इलाक़े में एक निकासी नाला बनाने के लिए सौ दिनों के काम योजना के तहत 2.28 लाख रुपए मंजूर किए गए थे. वह काम तो पूरा हो गया. लेकिन तृणमूल कांग्रेस के अंचल अध्यक्ष त्रिलोचन मुखर्जी ने पूरी रक़म दबा ली थी. कटमनी विवाद के उबरने के बाद गाँव वालों ने उनका घेराव किया था. उसके बाद मंगलवार सुबह सालिसी सभा बुलाई गई थी. उसी सभा में मुखर्जी ने वह रक़म लौटाई.

हालांकि मुखर्जी इसे कटमनी मानने को तैयार नहीं हैं. वो कहते हैं, "सौ दिनों के रोज़गार योजना के तहत नाले के निर्माण के लिए आवंटित रक़म कुछ तकनीकी वजहों से अब तक बाँटी नहीं जा सकी थी. अब जिन लोगों ने काम किया था उनको रक़म दे दी गई है." उन्होंने इस मुद्दे पर इससे ज़्यादा बात करने से इनकार कर दिया.

इससे पहले पूर्व बर्दवान जिले में एक अन्य तृणमूल कांग्रेस नेता उज्ज्वल मंडल ने भी माना था कि उन्होंने सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से पार्टी की कल्याणमूलक गतिविधियों के लिए आठ से दस हज़ार रुपए लिए थे. गाँव वालों के दबाव के बाद उन्होंने यह रक़म लौटाने का लिखित भरोसा दिया है. उसी जिले में पंचायत के तीन सदस्यों अपूर्व घोष, कालीमय गांगुली और रघुनाथ मंडल ने भी स्थानीय लोगों के दबाव में कटमनी वापस करने का लिखित भरोसा दिया है.

विपक्ष इस मुद्दे पर ममता बनर्जी सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है. मंगलवार को लगातार दूसरे दिन इस मुद्दे पर विधानसभा में जम कर हंगामा हुआ. सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों में तू-तड़ाक हुई. विपक्ष इस मुद्दे पर श्वेतपत्र जारी करने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग कर रहा है.

कांग्रेस विधायक दल के नेता अब्दुल मन्नान ने कटमीन मामले की जांच के लिए एक आयोग के गठन की मांग उठाई. उनका कहना था, "कटमनी मामले से अनगिनत लोग जुड़े हैं. इसकी वजह से क़ानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है. सरकार को तुरंत एक आयोग का गठन कर इस मामले की जांच करानी चाहिए."

दूसरी ओर, कटमनी विवाद धीरे-धीरे पूरे राज्य में फैलने लगा है. मंगलवार को कूचबिहार जिले के तूफ़ानगंज और हुगली ज़िले के चुंचुड़ा में इस मुद्दे पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने जम कर हंगामा किया. तूफ़ानगंज में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कटमनी लौटाने की मांग में एक नंबर ब्लॉक के नाककाटीगाछ ग्राम पंचायत के अध्यक्ष सचिन बर्मन का घेराव किया और नारे लगाए.

उन्होंने बर्मन को स्थानीय बाज़ार में ही घेर लिया. एक स्थानीय व्यक्ति आर. बर्मन ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान ने कई लोगों से समय-समय पर बहाने बना कर कटमनी ली है. इस मुद्दे हुगली जिले के चुंचुड़ा में भी बवाल हुआ.

भाजपा कार्यकर्ताओं ने वहां तीन नंबर वॉर्ड के पार्षद सुनील मालाकार के घर से सामने प्रदर्शन किया. उन्होंने पार्षद पर कटमनी लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने केंद्रीय योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर कई लोगों से कटमनी तो ली है. लेकिन कोई काम नहीं कराया है.

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आरोप है कि निचले स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं की ओर से ली जाने वाली यह रकम ऊपर तक पहुंचती है.

अब इस मुद्दे को लपकते हुए विपक्षी राजनीतिक दलों ने मुख्यमंत्री और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी और उनके सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी तक को कठघरे में खड़ा कर दिया है.

विपक्षी सदस्य विधानसभा में भी इस मुद्दे पर हंगामा करते हुए वॉकआउट कर चुके हैं.

इस मुद्दे पर विवाद तेज़ होते देख कर टीएमसी को सफ़ाई तक देनी पड़ी है.

पश्चिम बंगाल में नया विवाद

सरकारी परियोजनाओं के लिए आवंटित रकम में से लिए जाने वाले कमीशन पर मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी की टिप्पणी ने जहां विवादों का पिटारा खोल दिया है.

वहीं इसने विपक्ष को भी एक मज़बूत मुद्दा थमा दिया है.

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ममता ने तृणमूल कांग्रेस के पार्षदों के साथ हाल में एक बैठक में कहा था कि वे चोरों को पार्टी में नहीं रखना चाहतीं.

उनका कहना था, "कुछ नेता ग़रीबों को मकान के लिए मिलने वाली अनुदान की रकम में से 25 फीसदी कमीशन मांग रहे हैं. यह तुरंत बंद होना चाहिए."

ममता ने कहा था कि अगर किसी ने ऐसा कमीशन लिया है तो वह इसे फौरन वापस लौटा दे. अब कटमनी लेने वालों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. ममता की इस टिप्पणी के बाद ही विवाद पैदा हो गया.

उसके बाद राज्य के विभिन्न इलाकों में तृणमूल नेताओं, पार्षदों और पंचायत प्रतिनिधयों को आम लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है. कई जगह तो उनके साथ मार-पीट की घटनाएं भी हुई हैं.

पार्टी के कई नेताओं और पार्षदों को भी ममता की यह टिप्पणी नागवार गुजरी है. दूसरी ओर, विपक्ष ने इस मुद्दे को लपक लिया है.

विपक्ष ने बोला हमला

प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं, "अब तृणमूल कांग्रेस नेताओं के भ्रष्टाचार से पर्दा हट गया है. यह खुला रहस्य है कि तृणमूल के नेता कटमनी और कमीशन लेते हैं. अब आम लोग इसके विरोध में सामने आ रहे हैं."

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का आरोप है कि निचले स्तर के कार्यकर्ताओं की ओर से ली गई कटमनी सीधे अभिषेक बनर्जी तक पहुंचती है.

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उनका सवाल है कि क्या वे उक्त रकम वापस करेंगे?

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सोमेन मित्र ने तृणमूल कांग्रेस के तमाम नेताओं, सांसदों, विधायकों और पार्षदों की संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है.

विधानसभा में हुआ हंगामा

माकपा, कांग्रेस और बीजेपी तीनों पार्टियों ने सोमवार को सदन में कटमनी को लेकर विधानसभा अध्यक्ष स्पीकर के सामने सरकार विरोधी नारे लगाए और इस मुद्दे पर सदन में बहस कराने की मांग की.

लेकिन विधानसभा अध्यक्ष की ओर से इसकी अनुमित नहीं मिलने के विरोध में कई सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया.

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विधानसभा में विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान कहते हैं, "ममता ने अब सरकारी परियोजनाओं और कमीशनखोरी पर निगाह रखने के लिए मानीटरिंग सेल का गठन तो कर दिया है. लेकिन पहले ली गई कटमनी के मामलों की भी जांच की जानी चाहिए."

विपक्षी दलों का आरोप है कि निचले स्तर के नेताओं ने 25 फीसदी कमीशन लिया है जबकि बड़े नेताओं ने 75 फीसदी. ऐसे में सिर्फ 25 फीसदी रकम वापस देने से ही काम नहीं चलेगा. पूरी रकम वापस करनी होगी.

सदन में विपक्षी सदस्यों ने अपने गले में जो तख्तियां लटका रखी थीं उन पर लिखा था—कटमनी का संक्षिप्त रूप सीएम है.

उनमें से एक तख्ती पर ममता को निशाना बनाते हुए लिखा गया था कि पेंटिंग की बिक्री से मिली 1.86 करोड़ रुपए का कटमनी कौन लौटाएगा? विपक्ष ने सरकार से इस मुद्दे पर श्वेतपत्र जारी करने की भी मांग की है.

ममता की टिप्पणी पर विवाद बढ़ते देख कर टीएमसी को इस मुद्दे पर सफाई तक देनी पड़ी है.

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Image caption कांग्रेस नेता अब्दुल मन्नान और सीपीआईएम नेता सुजान चक्रवर्ती

टीएमसी नेता भी परेशान

पार्टी महासचिव पार्थ चटर्जी ने मीडिया के एक वर्ग पर उक्त बैठक की गलत रिपोर्टिंग का आरोप लगाया है.

यहां जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पार्षदों को आम लोगों के हितों में काम करने की नसीहत दी थी ताकि विभिन्न परियोजनाओं के लिए भेजी जाने वाली रकम का सही इस्तेमाल हो सके. चटर्जी दावा करते हैं, "पार्टी के 99.99 फीसद नेता मेहनती और ईमानदार हैं और आम लोगों के हितों के लिए काम करने के प्रति कृतसंकल्प हैं."

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तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य शांतनु सेन पर भी हाल में एक प्रमोटर से कटमनी लेने का आरोप लगा था.

लेकिन सेन ने इस आरोप को निराधार और राजनीतिक मकसद से प्रेरित करार दिया है. वैसे, ममता की टिप्पणी से पार्टी के कुछ नेताओं में भी भारी नाराजगी है.

नदिया जिले के एक टीएमसी नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि दीदी ने हमें तो गिरफ्तारी की चेतावनी दी है. लेकिन बड़े नेताओं का क्या होगा. क्या वे पैसा वापस करेंगे?

तृणमूल सांसद शताब्दी राय का कहना है कि कमीशन का यह सिलसिला काफी दूर तक जाता है.

वह कहती हैं, "सरकारी परियोजनाओं में से कटमनी या कमीशन लेने वाला व्यक्ति तो महज एक मोहरा होता है. उसके पीछे कई लोग होते हैं. ममता को काफी पहले ही इस आदत पर रोक लगाने की पहल करनी चाहिए थी."

राजनीतिक पर्यवेक्षक विश्वनाथ पंडित कहते हैं, "कटमनी पर टिप्पणी कर ममता ने भले ही अपना घर साफ करने की कवायद शुरू की हो, इससे टीएमसी के खिलाफ विपक्ष को एक मजबूत हथियार मिल गया है."

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