चेन्नई: पानी के संकट से जूझते लोगों के लिए टैंकर सप्लायर 'हीरो' या 'विलेन'?

  • 29 जून 2019
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चेन्नई की गलियों में बेतहाशा भागते हुए लोग, पानी के टैंकर और पानी लेने के लिए जद्दोजहद, ये नज़ारा जैसे आम हो गया है. लॉरियों पर आ रहे इन टैंकरों का महत्व कभी इतना ज़्यादा नहीं था.

ये कहना गलत नहीं होगा कि ये टैंकर चेन्नई के लोगों के लिए पानी की आपूर्ति का एकमात्र स्रोत बन गए हैं.

6,000, 12,000 और 24,000 लीटर तक पानी पहुंचाने वाली करीब 4,500 गाड़ियों के साथ निजी टैंकरों ने चेन्नई मेट्रोवॉटर बोर्ड की गाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है. लॉरी वॉटर टैंकर्स एसोसिएशन के मुताबिक वो चार गुना ज़्यादा गाड़ियां चला रहे हैं.

पानी के कमी से जूझ रहे लोगों की टैंकर पर निर्भरता इस कदर बढ़ गई है कि वो ये भी नहीं समझ पा रहे कि वो अनियमित तौर पर आने वाले इन टैंकरों पर नाराज़ हों या उनकी सर्विस की तारीफ़ करें.

लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी टैंकर की बढ़ती कीमतें हैं. खासकर उनके लिए जिन्हें सबसे पहले इसकी ज़रूरत पड़ी थी जब अक्टूबर-दिसंबर 2018 में उत्तर पूर्व मानसून के न आने के कारण शहर के चार जलाशय सूख गए थे.

लोगों की शिकायत है कि पानी के टैंकर के दाम तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. पानी की कमी से पहले जहां 24,000 लीटर पानी के एक टैंकर की कीमत 2400 रूपये थी वो अब बढ़कर 2900 रूपये हो गई है. वो भी उनके लिए जो पहले से टैंकर मंगाते आ रहे हैं.

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जिन्होंने पानी की कमी होने के बाद टैंकर लेना शुरू किया है उनके लिए ये दाम 4500 से 5000 रूपये तक पहुंच चुके हैं.

ओएमआर इलाके में अपार्टमेंट में रहने वाले एनके वरदराजन का कहना है, ''हमारे अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में 70 अपार्टमेंट हैं जो रोज़ाना 35,000 लीटर पानी का इस्तेमाल करते आ रहे हैं यानी एक परिवार करीब 500 लीटर पानी इस्तेमाल करता है. गर्मियों में पानी की ये खपत 38,000 लीटर तक बढ़ जाती है.''

करीब एक महीने पहले शहर में पानी का संकट शुरू होने पर वरदराजन जैसे पुराने ग्राहकों के लिए कीमतों में अचानक इजाफा हुआ. जिन लोगों ने बाद में पानी लेना शुरू किया तो उनके लिए कीमतें दुगनी से लेकर तीन गुनी तक हो गईं.

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क्यों बढ़ रही हैं कीमत?

पहचान छुपाने की शर्त पर पानी के टैंकर सप्लाई करने वाले कुछ सप्लायर ने बताया, ''हममें से कुछ लोग तेज़ी से पैसा कमाने चाहते हैं.''

कुछ और सप्लायर ने भी कहा कि मांग इतनी ज़्यादा है कि कुछ सप्लायर इसका फ़ायदा उठाते हुए लोगों को बढ़ा-चढ़ाकर कीमतें बता रहे हैं.

एसोसिएशन के एक सदस्य देवी प्रकाश ने कहा, ''ये हमारे लिए आसान नहीं है. ऐसे भी मामले हुए हैं जब चेन्नई के आसपास के इलाकों में जमीन मालिकों ने उनके कुंए या बोरवेल से पानी लेने के लिए हमारे साथ सौदा कर लिया लेकिन बाद में गांव वाले इसका विरोध करने लगे.''

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प्रकाश बीबीसी की टीम को चेन्नई से 45 किलोमीटर दूर चेन्नई-तिरुवलुर रोड पर उस जगह पर लेकर गए जहां गांव वालों ने वो ढांचा तोड़ दिया था जिसे जमीन के मालिक ने लॉरी के टैंकरों में पानी भरने के लिए बनाया था.

चेन्नई-तिरुवलुर हाईवे से दूर आठ एकड़ जमीन के मालिक राजेश कुमार ने पांच एकड़ पर धान की खेती की है और बचे हुए तीन एकड़ हिस्से को बाद में इस्तेमाल के लिए छोड़ दिया है.

राजेश कहते हैं, ''मुझे लगता है कि अगर चेन्नई में पानी की जरूरत है तो मेरे पास बहुत सारा पानी है और मुझे लोगों की मदद करनी चाहिए. गांव वाले इसलिए विरोध करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि पानी देने से ज़मीन में पानी का स्तर नीचे चला जाएगा. लेकिन हकीकत ये है कि पिछले 25 दिनों में पानी का स्तर नीचे नहीं गिरा है.''

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फिर भी निकल रहा है पानी

लेकिन, तिरुवलुर में नालवाड़ी बायपास, कवलचेरी में तीन एकड़ जमीन के मालिक डेविड को गांव वालों के विरोध से खास फ़र्क नहीं पड़ता. वह कहते हैं, ''यहां तीन बोरवेल से पानी की 50 गाड़ियां भरती हैं.''

विरोध को शांत करने के लिए डेविड का तरीका राजेश से अलग है.

वह कहते हैं, ''मैं उन्हें समझाता हूं कि अगर बारिश कम भी होती है तो पानी का स्तर बढ़ जाएगा. जब कर्नाटक तमिलनाडु को पानी नहीं देता तो हम लड़ते हैं और जब तमिलनाडु में ही पानी की जरूरत है तो हम पानी देने से कैसे मना कर सकते हैं.'' (कावेरी नदी के पानी को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच दशकों से विवाद चलता आ रहा है.)

तमिलनाडु प्राइवेट वॉटर टैंकर एसोसिएशन के सचिव एस. मुरुगन ने बीबीसी को बताया, ''हम निजी जमीनों से पानी चुराकर उसे महंगे दामों पर नहीं बेच रहे हैं बल्कि हम जमीन के मालिक को उस पानी की कीमत चुकाते हैं.''

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मुरुगन कहते हैं, ''कीमतें इसलिए भी बढ़ रही हैं कि पानी चेन्नई से भी 100 किलोमीटर दूर से लाया जा रहा है. तिरुवलुर के नज़दीक कुछ इलाकों में पानी 30 से 40 फीट पर है. लेकिन, सभी जगहों पर इतना पानी नहीं है जो पीने के लिए इस्तेमाल किया जा सके. यही कारण है कि एक बड़े टैंकर की कीमतें बढ़ गई हैं.''

मुरुगन ने कहा, ''कम से कम, एक जिले ने पानी की कीमत में बढ़ोतरी के कारणों का अध्ययन करने और पानी के टैंकरों के लिए एक लाइसेंस प्रणाली पर विचार करने के लिए एक नौ सदस्यीय समिति बनाई है. हर चीज के लिए लाइसेंस है लेकिन चर्चा सिर्फ हमारी ही होती है. हम अपने कारोबार के लिए भी कुछ सम्मान चाहते हैं.''

तो वॉटर टैंकर सप्लायर्स बचाने वाले हैं या लूटनेवाले?

वरदराजन कहते हैं, ''फिलहाल वो लूटनेवाले हैं. पहले के ग्राहकों के लिए उन्होंने कीमतें बढ़ा दीं. लेकिन नए ग्राहकों के लिए दुगनी कर दीं. वो बस इन हालातों का फायदा उठा रहे हैं.''

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