मॉब लिंचिंग के मामले में झारखंड यूं ही 'बदनाम' नहीं है!

  • 1 जुलाई 2019
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"सदन में कहा गया कि झारखंड मॉब लिंचिंग और मॉब वायलेंस का अड्डा बन गया है. माननीय सभापति जी, युवक की हत्या का दुख यहां सबको है. मुझे भी है और होना भी चाहिए."

"दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा भी मिलनी चाहिए. लेकिन, क्या एक झारखंड राज्य को दोषी बता देना शोभा देता है? फिर तो हमे वहां भी अच्छा काम करने वाले लोग ही नहीं मिलेंगे. पूरे झारखंड को बदनाम करने का हममें से किसी को हक़ नहीं है जी."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह बात पिछले सप्ताह भारतीय संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में कही. वे इस बात से व्यथित दिखे कि पूरे झारखंड को क्यों बदनाम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिंग के दोषियों को क़ानूनी प्रक्रिया के तहत दंडित किया जाना चाहिए.

उनके इस ताज़ा वक्तव्य के बीच कड़वी हक़ीक़त यह है कि झारखंड की मौजूदा भाजपा सरकार के कार्यकाल में यहां मॉब लिंचिंग की कम से कम दस घटनाएं हुईं.

इन घटनाओं में 18 लोग मारे गए. इनमें से 11 मुसलमान थे.

इन मामलों के स्पीडी ट्रायल के बावजूद सिर्फ़र अब तक दो मामलों में ही सज़ा सुनायी जा सकी है. कुल 19 लोगों को उम्र क़ैद की सज़ा हुई. इनमें से अधिकतर के संबंध भाजपा या दूसरे दक्षिणपंथी संगठनों से हैं.

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जयंत सिन्हा ने किया स्वागत

इनमें से कुछ लोगों को ज़मानत मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ही पिछली सरकार के मंत्री जयंत सिन्हा ने उन अभियुक्तों को माला पहनाकर स्वागत किया था.

बाद में बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में जयंत सिन्हा ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने इन अभियुक्तों को क़ानूनी लड़ाई के लिए आर्थिक मदद भी की थी. जयंत सिन्हा भाजपा के टिकट पर लोकसभा के लिए दोबारा चुने गए हैं.

भाजपा के ही एक और सांसद निशिकांत दुबे (गोड्डा लोकसभा क्षेत्र) ने भी मॉब लिंचिंग की एक घटना के अभियुक्तों को आर्थिक मदद देने की सार्वजनिक घोषणा की थी. वे इस बार फिर से चुनाव जीत कर तीसरी बार लोकसभा पहुंच चुके हैं.

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बीजेपी ने लिंचिंग के आरोपियों की मदद की?

झारखंड में मॉब लिंचिंग के मामले

  • झारखंड में मॉब लिंचिंग की पहली घटना 18 मार्च 2016 को लातेहार ज़िले में हुई थी. यहां के बालूमाथ थाना क्षेत्र के झाबर गांव में भीड़ ने एक पशु व्यापारी मजलूम अंसारी और उनके 12 साल के सहयोगी इम्तेयाज ख़ान की पीटकर हत्या कर दी थी.इसके बाद उनकी लाशों को बरगद के एक पेड़ से फांसी से लटका दिया, ताकि लोगों के बीच दहशत पैदा की जा सके.
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Image caption 12 साल के सहयोगी इम्तेयाज ख़ान की पीटकर हत्या कर दी गयी थी

तब वे दोनों अपने जानवरों के साथ चतरा जिले के एक पशु मेले में जा रहे थे.इस मामले में लातेहार की ज़िला अदालत ने 19 दिसंबर 2018 को आठ अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनायी. एक अभियुक्त विनोद प्रजापति (स्थानीय भाजपा नेता) आज तक फ़रार हैं. सज़ायाफ्ता अभियुक्तों ने सज़ा के ख़िलाफ़ झारखंड हाईकोर्ट में अपील की लेकिन कोर्ट ने उनका आवेदन निरस्त कर दिया. अब इनमे से एक अभियुक्त ने दोबारा यही अपील की है. कोर्ट ने अभी इसपर कोई निर्णय नहीं लिया है.

  • 29 जून 2017 को रामगढ़ के बाजार टांड़ में करीब 100 लोगों की उन्मादी भीड़ ने अलीमुद्दीन अंसारी नामक एक मांस व्यापारी को इतना पीटा कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई. भीड़ के शक था कि वे अपनी वैन में गाय का मांस ले जा रहे थे. यह घटना तब घटी, जब प्रधानमंत्री गौरक्षा के नाम पर हो रही कथित गुंडागर्दी के खिलाफ भाषण दे रहे थे.21 मार्च 2018 को रामगढ़ कोर्ट ने इस मामले के 11 अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनायी. इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई. हाईकोर्ट ने इनमें से 10 अभियुक्तों की सजा को निलंबित कर दिया. एक अभियुक्त ने अपना आवेदन वापस ले लिया, लिहाजा वह निरस्त कर दिया गया. अभी इस पर अंतिम निर्णय आना बाकी है.
  • 18 मई 2017 को सरायकेला खरसांवा जिले के राजनगर (शोभापुर) इलाक़े में शेख हलीम, शेख नईम, सिराज खान और मोहम्मद साजिद को भीड़ ने इसलिए पीटकर मार डाला, क्योंकि उन्हें शक था कि इनलोगों ने एक वैवाहिक समारोह के भोज के लिए बीफ की सप्लाई की थी.
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  • 18 मई 2017 को ही पूर्वी सिंहभूम ज़िले के बागबेड़ा थाना क्षेत्र में भीड़ ने बच्चा चोरी का आरोप लगाकर एक महिला समेत चार लोगों को पीटा. इसमें दो सगे भाइयों, गौरव वर्मा और विकास वर्मा की घटनास्थल पर ही मौत हो गई.
  • 19 अगस्त 2017 को गढ़वा जिले के बरकोल खुर्द गांव के तेनडांड़ जंगल में भीड़ ने दस लोगों को कथित तौर पर मांस के साथ पकड़ा. उनकी पिटाई की. इनमें से रमेश मिंज नामक एक व्यक्ति की अस्पताल में मौत हो गई. इस मामले में भी ट्रायल चल रहा है.
  • 6 सितंबर 2018 को पलामू ज़िले के विश्रामपुर थाना क्षेत्र में तिसिबार गांव के लोगों ने तीन लोगों को चोर बताकर इतना पीटा कि इनमें से बबलू मुसहर नामक एक व्यक्ति की मौत अगली सुबह इलाज के दौरान हो गई. इस मामले के अभियुक्त भी ट्रायल से गुजर रहे हैं.
  • 12 मार्च 2019 को पलामू ज़िले के ही हैदरनगर थाना क्षेत्र में कुछ लोगों ने कथित तौर पर वहां के वकील ख़ान और दानिश ख़ान की बहन से छेड़खानी की. दोनों ने इसका विरोध किया. जिसके बाद भीड़ ने उन्हें मारा जिसमें वकील ख़ान की मौक़े पर ही मौत हो गई. उनकी छाती पर लोहे की रोड से वार किया गया. पुलिस अभी इस मामले के जांच कर रही है.
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Image caption मज़लूम अंसारी
  • 13 जून 2018 को गोड्डा जिले के डुलु गांव के लोगों की भीड़ ने पड़ोसी गांवों के चिरागुद्दीन अंसारी और मुर्तुजा अंसारी को भैंस चोरी के आरोप में इतना पीटा कि उनकी मौके पर ही मौत हो गई. इस मामले के अभियुक्त ट्रायल से गुजर रहे हैं.
  • 10 मई 2019 को गुमला ज़िले के जुरमू गांव में एक मरे बैल का मांस काट रहे चार लोगों को पड़ोसी गांव की उन्मादी भीड़ ने इतना पीटा कि इनमें से एक प्रकाश लकड़ा की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई. वे ईसाई थे. डुमरी थाने की पुलिस इस मामले की जांच कर रही है.
  • 18 जून 2019 को सरायकेला खरसांवा जिले के घातकीडीह गांव में भीड़ ने तबरेज अंसारी नामक 24 साल के एक युवक को चोरी के आरोप में पकड़ा. उन्हें बिजली के पोल से बांधकर पीटा. उनसे जय श्री राम और जय हनुमान के नारे लगवाए. पुलिस ने उन्हें चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. तबीयत ख़राब होने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी 22 जून को मौत हो गई. बाद में वहां के एसपी ने कहा कि तबरेज का पिछला कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है. पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है.

इसके अलावा माब लिंचिंग के प्रयास और हेट क्राइम की भी कुछ घटनाएं हुई हैं. उनमें मुसलमानों को निशाना बनाया गया है. (स्रोत- एचआरएलएन)

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