क्या है दिल्ली के मंदिर में हुई तोड़ फोड़ का पूरा सच? फ़ैक्ट चेक

  • 2 जुलाई 2019
क्षतिग्रस्त हुए मंदिर का गेट इमेज कॉपीरइट Yaqut Ali/BBC
Image caption क्षतिग्रस्त 'गली दुर्गा मंदिर' का गेट

सोशल मीडिया पर एक खंडित मंदिर के कुछ वीडियो और तस्वीरें इस दावे के साथ शेयर किये जा रहे हैं कि 'पुरानी दिल्ली में एक भीड़ ने प्राचीन हिन्दू मंदिर में तोड़ फोड़ की और मूर्तियों को खंडित कर दिया है'.

दक्षिणपंथी रुझान वाले फ़ेसबुक ग्रुप्स, वॉट्स ऐप ग्रुप्स और ट्विटर पर ये तस्वीरें और वीडियो तेज़ी से शेयर किये जा रहे हैं.

सोमवार सुबह बीबीसी के 300 से ज़्यादा पाठकों ने ये वीडियो और तस्वीरें हमें भेजी और इनकी सच्चाई जाननी चाही.

बीबीसी ने ग्राउंड पर जाकर इनकी पड़ताल की और इनके साथ किये जा रहे मंदिर में तोड़ फोड़ के दावे को सही पाया.

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Image caption पुरानी दिल्ली के इस इलाक़े में हुई घटना के बाद 20 से ज़्यादा थानों की पुलिस और अर्धसैनिक बल की कुछ कंपनियों को तैनात किया गया है

पुरानी दिल्ली की घटना

सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े जो वीडियो सर्कुलेट किये जा रहे हैं वो पुरानी दिल्ली के लाल कुआं बाज़ार में स्थित 'गली दुर्गा मंदिर' के हैं.

स्थानीय पुलिस के अनुसार दुर्गा, शिव और राम दरबार समेत अन्य हिन्दू देवी-देवताओं की झांकियों वाले इस छोटे मंदिर में ही रविवार देर रात पथराव किया गया था.

स्थानीय लोगों के अनुसार एक हिन्दू मोहल्ले के शुरुआती छोर पर स्थित ये मंदिर 100 साल से अधिक समय से यहीं स्थापित है. इस गली के बाहर, दोनों तरफ़ मुस्लिम बहुल आबादी है.

हिन्दू मोहल्ले में रहने वालों के पास साक्ष्य के तौर पर जो सीसीटीवी फ़ुटेज है उसके अनुसार भीड़ ने रविवार रात 12:42 बजे गली में पथराव किया था.

स्थानीय लोगों का कहना है कि "विवाद दुपहिया वाहन की पार्किंग को लेकर शुरु हुआ था जो बाद में धार्मिक तनाव में तब्दील हो गया. गली के बाहर भीड़ 12 बजे के बाद इक्ट्ठा होना शुरु हुई थी. भीड़ ने पहले नारेबाज़ी की और कुछ देर बाद गली में पथराव शुरु कर दिया".

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Image caption पुलिस ने नाकेबंदी कर लोगों को गली दुर्गा मंदिर की तरफ जाने से रोक रखा है

मुस्लिम युवक की पिटाई

घटनास्थल से क़रीब डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर स्थित सब्ज़ मस्जिद के बाहर कुछ और स्थानीय लोगों से हमारी बातचीत हुई.

उन्होंने कहा कि नशे की हालत में कुछ लड़कों ने रविवार रात क़रीब साढ़े 10 बजे आस मोहम्मद नाम के एक युवक को पीटा था. दुपहिया वाहन की पार्किंग को लेकर उनमें झगड़ा हुआ था. लेकिन जब वो युवक घायल अवस्था में अपनी गली में पहुँचा तो लोगों का गुस्सा भड़क गया.

कुछ लोगों ने यह भी बताया कि मुस्लिम युवक की पिटाई के बाद इलाक़े में पहली अफ़वाह यह फैली थी कि उसके साथ 'मॉब लिंचिंग' की गई है और इसे सुनकर लाल कुआँ बाज़ार में लोग इक्ट्ठा होना शुरु हुए थे.

गली दुर्गा मंदिर का इलाक़ा पुरानी दिल्ली के हौज़ क़ाज़ी थाना क्षेत्र में आता है.

थाने के एसएचओ सुनील कुमार ने बताया कि रविवार देर रात ही मुस्लिम युवक को पीटने वाले अभियुक्तों में से एक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था और अन्य अभियुक्त अभी फ़रार हैं.

सुनील कुमार ने बीबीसी को बताया कि जिस समय पुलिस ने एक अभियुक्त को हिरासत में लिया, उसके बाद गली दुर्गा मंदिर में पथराव किया गया.

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चश्मदीद क्या कहते हैं?

गली दुर्गा मंदिर में रहने वाले एक बुज़ुर्ग ने अपना नाम ज़ाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि गली के भीतर क़रीब 25-30 लोग घुस आए थे.

इस शख़्स ने बताया कि भीड़ ने गली में दाख़िल होते ही मंदिर पर पथराव किया. उसके बाद गली के भीतर घरों के दरवाज़ों पर पत्थर मारे और कुछ ही मिनट में ये भीड़ गली से बाहर निकल गई.

गली में रहने वाले लोगों के अनुसार इस गली में सभी हिन्दू परिवार रहते हैं. इनमें से अधिकांश हलवाई हैं और कुछ लोग लाल कुआं बाज़ार में मज़दूरी करते हैं.

इसी गली में रहने वाले एक युवक ने बताया कि रविवार रात जब पथराव किया गया उस समय अधिकांश लोग सो चुके थे. अगर लोग सोए नहीं होते तो टकराव की स्थिति ज़रूर बनती.

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Image caption सोशल मीडिया पर जो वीडियो सर्कुलेट हो रहे हैं, उनमें गली दुर्गा मंदिर का यही गेट दिखाई देता है

घटना के बाद की स्थिति?

सोमवार को दिनभर पुरानी दिल्ली के इस इलाक़े में तनाव साफ़ देखा जा सकता था.

चावड़ी बाज़ार से लेकर लाल कुआँ बाज़ार तक जो मुख्य सड़क है, जिसे यहाँ का बिज़नेस पॉइंट भी कहा जाता है, उसे पूरे दिन बंद रखना पड़ा.

इलाक़े में स्थानीय थाने की पुलिस के अलावा दिल्ली पुलिस के क़रीब 20 थानों से आई पुलिस को भी तैनात किया गया था.

हमने पाया कि गलियों के मुहाने पर पुलिस तैनात की गई है. साथ ही पैरा मिलिट्री की कुछ कंपनियों को भी इस इलाक़े में उतारा गया है.

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Image caption इलाके में मौजूद पुलिस बल

गली दुर्गा मंदिर में रहने वाले लोगों से बात करके यह मालूम पड़ता है कि उनमें मंदिर में हुई तोड़ फोड़ को लेकर कितनी नाराज़गी है.

वहीं जिन बुज़ुर्गों से मस्जिद के बाहर हमारी मुलाक़ात हुई, उन्होंने कहा कि मंदिर में हुई तोड़ फोड़ का अफ़सोस उन्हें भी है.

हमने पाया कि सोशल मीडिया पर इस घटना के बाद 'लिंचिंग' समेत कई अन्य तरह की अफ़वाहें भी फ़ैलाई गई हैं जो कि स्थानीय पुलिस के अनुसार ग़लत हैं.

पुलिस ने उस मुस्लिम युवक को निगरानी में रखा हुआ है जिसका दुपहिया वाहन की पार्किंग को लेकर गली दुर्गा मंदिर के बाहर विवाद हुए था.

साथ ही उस हिन्दू परिवार से भी नहीं मिलने दिया जा रहा है जिसे पुलिस ने मारपीट के आरोप में हिरासत में ले रखा है.

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