मंदिर के बाहर ‘फ़ायरिंग’ और मेरठ से ‘हिंदुओं के पलायन’ का सच: फ़ैक्ट चेक

  • 4 जुलाई 2019
सोशल मीडिया इमेज कॉपीरइट SM Viral Video Grab

सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुई क़रीब 7 सेकेंड की एक फ़ुटेज सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ शेयर की जा रही है कि उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में बाइक सवार दो आदमियों ने एक हिन्दू मंदिर के बाहर फ़ायरिंग की.

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को शेयर करने वालों का दावा है कि 'दोनों लड़के मुस्लिम समुदाय से हैं और मंदिर में भजन-कीर्तन कर रही महिलाओं में दहशत फैलाने के लिए उन्होंने फ़ायरिंग की.'

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो में दिखाई देता है कि दुपहिया वाहन पर सवार दो युवक एक रिहायशी गली से गुज़र रहे हैं जिसके कोने पर पहुँचकर दोनों हवा में फ़ायर करते हैं. बाइक चला रहे शख़्स के हथियार से धुआँ निकलता दिखाई देता है.

इमेज कॉपीरइट FB Search Result
Image caption इस वीडियो को फ़ेसबुक पर तीन लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है

हमने पाया कि फ़ेसबुक और ट्विटर पर इस वीडियो को एक जैसे संदेश के साथ शेयर किया जा रहा है, जिसमें लिखा है "दो नाबालिग लड़कों ने मेरठ में मंदिर के बाहर फ़ायरिंग की जहाँ महिलाएं कीर्तन के लिए जमा हुई थीं. इनकी रणनीति देखिए, ऐसी घटनाओं में नाबालिगों का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि पुलिस उन्हें गिरफ़्तार न कर सके."

सोशल मीडिया पर दावा यह भी किया जा रहा है कि ऐसी घटनाओं से परेशान होकर हिन्दू समुदाय के लोग मेरठ के इस इलाक़े से पलायन कर रहे हैं.

लेकिन अपनी पड़ताल में हमने पाया कि इस वीडियो के साथ जो दावे किये जा रहे हैं, वो काफ़ी भ्रामक हैं.

इमेज कॉपीरइट SM Viral Post
Image caption बीबीसी के बहुत से पाठकों ने वॉट्सऐप के ज़रिए हमें यह वीडियो फ़ॉरवर्ड किया है और इसकी सच्चाई जाननी चाही है

वीडियो की पड़ताल

इस वायरल वीडियो के संबंध में जब उत्तर प्रदेश की मेरठ पुलिस से बात की तो उन्होंने बताया कि ये सीसीटीवी फ़ुटेज मेरठ नगर निगम क्षेत्र में आने वाले प्रह्लादनगर वार्ड की है.

मेरठ पुलिस के अनुसार, यह वीडियो 24 जून 2019, दोपहर क़रीब 1 बजे का है. यानी जो तारीख़ और समय सीसीटीवी फ़ुटेज पर दिखाई देता है, वो सही है.

लेकिन सोशल मीडिया पर इस वीडियो के साथ जो दूसरी जानकारियां दी गई है, उसे मेरठ पुलिस ने ग़लत बताया.

मेरठ कोतवाली के सर्कल अफ़सर दिनेश कुमार शुक्ल ने बीबीसी को बताया कि जिस कथित हथियार से प्रह्लादनगर इलाक़े में फ़ायरिंग की गई, वो 'टॉय गन' यानी खिलौने वाली पिस्तौल थी जो आवाज़ करती है और उससे धुआँ भी निकलता है.

इमेज कॉपीरइट UP Police
Image caption लड़कों ने ये खिलौने वाली बंदूकें नौचंदी के मेले से ख़रीदी थीं

सर्कल अफ़सर शुक्ल ने कहा, "ये लिसाड़ी गेट थाने का मामला है. टॉय गन से फ़ायरिंग करने वाले दोनों लड़के नाबालिग हैं. वो 9वीं कक्षा में पढ़ते हैं. प्रह्लादनगर मोहल्ले के पास ही रहते हैं."

उन्होंने कहा, "दोनों की सीसीटीवी फ़ुटेज सामने आने के 24 घंटे के भीतर ही पुलिस ने उन्हें ढूंढ लिया था. इन लड़कों ने बताया कि ये टॉय गन उन्होंने मेरठ के ऐतिहासिक नौचंदी मेले से ख़रीदी थी."

क्या पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ कोई एक्शन लिया?

इस पर दिनेश कुमार शुक्ल ने बताया, "टॉय गन से हवाई फ़ायर करने पर कोई धारा नहीं बनती. लेकिन रिहायशी इलाक़े में उत्पात करने का मामला ज़रूर बनता है. चूंकि इस मामले में दो नाबालिगों के ख़िलाफ़ शिक़ायत मिली है, इसलिए कार्यवाही उसी के हिसाब से की जाएगी."

मेरठ पुलिस ने इन लड़कों के परिवार वालों को कम उम्र में वाहन चलाने की अनुमति देने के लिए नोटिस जारी किया है.

इमेज कॉपीरइट UP Police
Image caption वायरल वीडियो में दिखने वाली लाल रंग की स्कूटी को पुलिस ने ज़ब्त कर लिया है

क्या 'फ़ायरिंग' मंदिर के पास हुई थी?

पुलिस कहती है कि 'मंदिर के पास फ़ायरिंग' की बात झूठ है.

मेरठ के स्थानीय पत्रकार सचिन गुप्ता ने इस घटना को कवर किया था. उनके अनुसार टॉय गन से जहाँ फ़ायरिंग की गई, वहाँ कोई मंदिर नहीं है और न ही सीसीटीवी में मंदिर दिखाई देता है.

सचिन गुप्ता ने बताया, "प्रह्लादनगर एक हिन्दू बहुल मोहल्ला है. इस मोहल्ले में छोटे-बड़े 12 मंदिर हैं और दो गुरुद्वारे हैं. लेकिन ये सीसीटीवी फ़ुटेज इनमें से किसी मंदिर-गुरुद्वारे के पास का नहीं है."

इमेज कॉपीरइट SM Viral Post
Image caption दक्षिणपंथी रुझान वाली कुछ वेबसाइट्स ने इस कहानी को धार्मिक रंग देने का प्रयास किया है

सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही 'फ़ायरिंग' और 'इस इलाक़े से हिन्दुओं के पलायन' की फ़र्ज़ी ख़बरों पर अधिक जानकारी लेने के लिए हमने प्रह्लादनगर वार्ड के निगम पार्षद और बीजेपी नेता जितेंद्र पहवा से बात की.

क़रीब 45 वर्षों से सक्रिय राजनीति कर रहे जितेंद्र पहवा ने बीबीसी को बताया कि प्रह्लादनगर इलाक़े से हिन्दुओं के पलायन की बात बिल्कुल झूठ है.

जितेंद्र ने कहा, "मीडिया वालों ने हमारी बात को तोड़-मरोड़कर छापा और टीवी पर दिखाया. पलायन इस इलाक़े का मुद्दा नहीं है. जो लोग प्रह्लादनगर छोड़कर गए हैं, वो अपनी इच्छा से गए हैं, किसी डर से नहीं. लेकिन ख़राब सुरक्षा व्यवस्था हमारे मोहल्ले का एक बड़ा मुद्दा है. हम चाहते हैं कि मोहल्ले में गेट लगें."

उन्होंने कहा "हम किसी धर्म विशेष के बारे में टिप्पणी नहीं कर रहे. हम सिर्फ़ चाहते हैं कि असामाजिक तत्वों पर रोक लगे, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो. बाकी 24 जून को हुई फ़ायरिंग वाली घटना के बारे में यहाँ के स्थानीय लोगों को पूरी जानकारी है कि लड़कों के पास टॉय गन थी, लेकिन महिलाओं में उस घटना के बाद दहशत फ़ैलने की बात बिल्कुल ग़लत है."

इमेज कॉपीरइट ANI

हाल ही में मेरठ ज़ोन के एडीजी प्रशांत कुमार ने भी जाँच के बाद ये कहा था कि प्रह्लादनगर से डर के कारण किसी भी परिवार ने पलायन नहीं किया है. लोग इस इलाक़े में बढ़ते प्रदूषण, ट्रैफ़िक और छेड़खानी की वारदातों से ज़रूर परेशान हैं जिसके लिए पुलिस ने कुछ एक्शन लिये हैं.

(इस लिंक पर क्लिक करके भी आप हमसे जुड़ सकते हैं)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार