असम कैसे पहुंचा जापानी इंसेफ़िलाइटिस बुख़ार, अब तक 36 की मौत

  • 4 जुलाई 2019
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असम में जापानी बुख़ार यानी जापानी इंसेफ़िलाइटिस की वजह से अब तक 36 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.

36 लोगों की मौत का ये आंकड़ा सिर्फ़ इस साल हुई मौतों का है. मरने वालों में कई बच्चे भी शामिल हैं.

सरकारी अधिकारी जापानी इंसेफ़िलाइटिस से होने वाली मौत के कई कारणों में से जागरुकता की कमी को सबसे प्रमुख कारण बताते है. लेकिन जापानी इंसेफ़िलाइटिस की रोकथाम या फिर इलाज की व्यवस्था से जुड़े सवालों का कोई ठोस जवाब उनके पास नहीं मिलता है.

राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम में राज्य कार्यक्रम अधिकारी उमेश फांग्सो ने इस साल 30 जून तक असम में जापानी इंसेफ़िलाइटिस से 22 लोगों की मौत की पुष्टि की थी. वहीं फांग्सो ने प्रदेश में जापानी इंसेफ़िलाइटिस के कुल 69 मामले दर्ज करने की बात कही थी.

लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 3 जुलाई तक असम में जापानी इंसेफ़िलाइटिस के 140 मामले दर्ज किए जा चुके हैं और इसकी वजह से 36 लोगों की मौत हो चुकी है.

बीते सोमवार को करीमगंज ज़िले में जापानी बुख़ार के कारण एक स्कूल शिक्षक की मौत हो गई थी. बुधवार को दरंग ज़िले में तीन लोगों की मौत का मामला सामने आया. दरंग ज़िले के मलेरिया अधिकारी श्याम बरुआ ने बताया कि मरने वाले इन तीन लोगों में एक साल का एक बच्चा भी शामिल है.

असम में जापानी इंसेफ़िलाइटिस और मलेरिया के प्रकोप का लंबा इतिहास रहा है.

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ख़ासकर यहां बारिश के मौसम में लोग इस बीमारी की चपेट में आ जाते है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार असम में जापानी इंसेफ़िलाइटिस से साल 2013 में 134 लोगों की मौत हो गई थी. 2014 में 165 लोगों की, 2015 में 135 लोगों की, 2016 में 92 लोगों की, 2017 में 87 लोगों की और 2018 में 94 लोगों की मौत हुई थी.

राज्य कार्यक्रम अधिकारी उमेश फांग्सो कहते है,"पिछले साल के मुक़ाबले इस साल जून तक जापानी इंसेफ़िलाइटिस से 8 लोग ज़्यादा मरे हैं. पिछले साल जून महीने तक मरने वालों की कुल संख्या 13 थी."

दरअसल, बिहार में चमकी बुख़ार के कारण सैकड़ों बच्चों की मौत के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने असम में जापानी इंसेफ़िलाइटिस से उत्पन्न स्थिति का जायज़ा लेने के लिए चार सदस्यीय टीम को भेजा था.

केंद्रीय टीम का नेतृत्व करने वाले अतिरिक्त सचिव संजीव कुमार भी मानते हैं कि जुलाई और अगस्त महीनों में असम में जापानी इंसेफ़िलाइटिस के प्रकोप को कम करना काफ़ी चुनौती का काम होगा.

क्या उपाय किये जा रहे हैं

डिब्रूगढ़ ज़िला स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक उदयन कुमार बरुआ के अनुसार जापानी इंसेफ़िलाइटिस को रोकने के लिए लोगों को जापानी इंसेफ़िलाइटिस का टीका दिया जा रहा है और जिन इलाक़ो में इंसेफ़िलाइटिस का प्रकोप ज़्यादा है वहां नियमित रूप से फॉगिंग की जा रही है.

बरुआ कहते है," हमारी टीम बीते जनवरी महीने से ऐसे इलाकों में जा-जाकर टीकाकरण का काम कर रही है जहां इंसेफ़िलाइटिस का ख़तरा अधिक है. एक प्रक्रिया के तहत काम करते हुए पहले लोगों के खून का नमूना लिया जाता है और खून की जांच के बाद अगर किसी में को इंसेफ़िलाइटिस के लक्षण पाए जाते हैं तो उस पूरे इलाके में टीकाकरण से लेकर नियमित फॉगिंग की जाती है. तेज़ बुख़ार, सिर दर्द जैसी परेशानी के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है ताकि समय पर इलाज किया जा सके. इस तरह शुरुआती दौर में ही इसे नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है."

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी दावा करते हैं कि पिछड़े इलाकों में बच्चों के व्यापक टीकाकरण के कारण मृत्यु दर को काफी कम कर दिया गया है. इसे आगे भी जारी रखने के आदेश हैं.

असम में साल 2006 में स्थानीय जिलों में जापानी इंसेफ़िलाइटिस के लिए वैक्सीन देने की शुरुआत की गई थी. जापानी इंसेफ़िलाइटिस के वायरस को भारत में सबसे घातक बीमारियों में से एक माना जाता है. जापानी इंसेफ़िलाइटिस को नियंत्रित करने के लिए टीकाकरण ही एकमात्र सबसे महत्वपूर्ण उपाय है.

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केंद्रीय टीम ने असम में टीकाकरण की स्थिति की भी समीक्षा की, जो जापानी इंसेफ़िलाइटिस के मामलों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है.

इस साल जापानी इंसेफ़िलाइटिस के सबसे अधिक मामले जोरहाट, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, लखीमपुर, धेमाजी, शिवसागर और चराईदेउ जैसे ज़िलों में देखने को मिले. जापानी इंसेफ़िलाइटिस की चपेट में आने वाले लोगों को ऊपरी असम के जोरहाट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल और डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है.

जोरहाट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. सौरभ बोरकोटोकी ने बीबीसी से कहा,"30 जून तक हमारे अस्पताल में जापानी इंसेफ़िलाइटिस से 7 लोगों की मौत हो गई है और इस समय जापानी इंसेफ़िलाइटिस से ग्रस्त पांच लोगों का इलाज चल रहा है."

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एक सवाल का जवाब देते हुए डॉ. बोरकोटोकी कहते है,"मानसून के समय मच्छरों के क्यूलेक्स समूहों द्वारा जापानी इंसेफ़िलाइटिस फैलता है और उस दौरान लोगों को जागरुक किये जाने की आवश्कता है. इसके साथ मच्छर नियंत्रण के लिए भी उपाय किए जाने की ज़रूरत है. साथ ही जिन इलाक़ों में लोग जापानी इंसेफ़िलाइटिस टीकाकरण से छूट गए हैं वहां सौ फ़ीसदी टीकाकरण करने की ज़रूरत है."

जापानी इंसेफ़िलाइटिस से उत्पन्न स्थिति की जानकारी देते हुए जोरहाट की ज़िला उपायुक्त रोशनी कोराती कहती हैं, "असम जापानी इंसेफ़िलाइटिस के लिए एक स्थानिक क्षेत्र है और यहां मेडिकल विभाग की तरफ से लोगों में जागरुकता पैदा करने के साथ ही टीकाकरण जैसे महत्वपूर्ण काम करने की और ज़्यादा आवश्कता है. हम इस दिशा में पूरी टीम के साथ काम कर रहे हैं और इस बीच जापानी इंसेफ़िलाइटिस से मौत का कोई नया मामला सामने नहीं आया है. जापानी इंसेफ़िलाइटिस के दो मामले दर्ज हुए हैं और उनका इलाज किया जा रहा है."

ज़िला उपायुक्त ने आगे कहा, "हम मच्छरों की आबादी को नियंत्रित करने, सूअरों को अलग करने और मच्छरों के काटने से बचने के लिए स्कूल के बच्चों को पूरे बदन को ढकने वाले कपड़े पहनने और घर पर मच्छरदानी का उपयोग करने को कह रहे हैं ताकि इस बीमारी को रोका जा सके."

इसके अलावा लोगों को तेज़ बुख़ार और सिर दर्द होने पर दवा दुकान से किसी भी तरह की दवाई खाने के बदले पास के हेल्थ सेंटर में जांच करवाने की हिदायत दी जा रही है. जापानी इंसेफ़िलाइटिस की जाँच के लिये अभी तक 28 निगरानी अस्पतालों की पहचान की गई है.

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