बिहार में बाढ़ का कहर, 18 लाख लोग चपेट में: पांच बड़ी ख़बरें

  • 15 जुलाई 2019
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बिहार में आई बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं. राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार बाढ़ में चार लोगों की मौत हो गई है और 18 लाख लोग प्रभावित हुए हैं.

बिहार के सीतामढ़ी, मुज़फ़्फ़रपुर, पूर्वी चंपारण, अररिया, सुपौल, किशनगंज और शिवहर बाढ़ की चपेट में आ गए हैं.

नेपाल में हो रही भारी बारिश और उत्तर प्रदेश बिरपुर बांध से छोड़े गए पानी को बाढ़ का कारण बताया गया है. शनिवार शाम बांध के सभी 56 गेट खोल दिए गए जिससे कोसी, गंडक और बागमती नदी में पानी का स्तर बढ़ गया.

बागमती नदी में पानी का स्तर बढ़ जाने से उत्तर बिहार के सीतामढ़ी और शिवहर के 200 गांव बाढ़ से जूझ रहे हैं. हज़ारों लोग सरकार द्वारा लगाए कैंपों में रह रहे हैं और कैंपों से मिला खाना खा रहे हैं.

रविवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप- मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और राज्य के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने बाढ़ से प्रभावित इलाकों का सर्वे किया.

बीएल संतोष बनाए गए बीजेपी के महासचिव

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को बीएल संतोष को पार्टी का महासचिव नियुक्त किया है.

बीएल संतोष पहले पार्टी में संयुक्त महासचिव के पद पर थे. उन्हें रामलाल की जगह दी गई है. एक दिन पहले रामलाल को राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ में वापस भेजा गया था.

रामलाल महासचिव के पद पर 13 साल से थे. यह माना जाता है कि बीएल संतोष को कर्नाटक की राजनीति की अच्छी जानकारी है और वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के भरोसेमंद माने जाते हैं.

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एमडी-एमएस के लिए नीट परीक्षा ख़त्म करने का प्रस्ताव

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने चिकित्सा के क्षेत्र में मास्टर की पढ़ाई के लिए नीट प्रवेश परीक्षा को ख़त्म करने का प्रस्ताव किया है.

मंत्रालय का कहना है कि एमडी और एमएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एमबीबीएस की अंतिम वर्ष की परीक्षा ही काफी होगी.

भारतीय मीडिया में छपी रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक के संशोधित मसौदे में इस तरह का बदलाव किया गया है जो ज़ल्द ही कैबिनेट को भेजा जाएगा.

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अमरीका-ईरान तनावः बातचीत बहाल करने की अपील

अमरीका और ईरान में बढ़ते तनाव के बीच ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने बातचीत बहाल करने की अपील की है.

एक संयुक्त बयान में यूरोपीय देशों ने कहा कि सभी पक्षों को ठहरकर ये सोचने की ज़रूरत है कि उनके उठाए क़दमों के परिणाम क्या होंगे.

पिछले साल अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु समझौते से अलग होने का फ़ैसला किया था, जिसके बाद से ही अमरीका और ईरान के रिश्तों में तल्खी बढ़ती गई. अमरीका ने ईरान पर कई कड़े प्रतिबंध भी लगाए हैं.

कुवैत में यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों से बात करते हुए संस्था की विदेश नीति प्रमुख फेडेरिका मोघेरनी ने कहा कि यूरोपीय संघ और कुवैत दोनों ही क्षेत्र के मौजूदा तनाव को खत्म करना चाहते हैं.

उन्होंने कहा, "हमारे यानी ईयू और कुवैत के विचार एक से हैं. हमारे इस कॉमन क्षेत्र में एक और संघर्ष, एक और युद्ध की ज़रूरत नहीं है."

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डोनल् ट्रंप पर नस्लवाद के आरोप

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक महिला सांसदों को निशाना बनाकर कुछ ट्वीट किए, जिसके बाद से उनपर नस्लवाद के आरोप लग रहे हैं.

दरअसल उन्होंने जातीय-अल्पसंख्यक महिला सांसदों के एक समूह से कहा था कि वो जहां से आई हैं वहां लौट जाना चाहिए.

ट्विटर पर राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें अमरीका की आलोचना करने के बजाए अपने मूल देश की विनाशकारी सरकारों को ठीक करना चाहिए.

हाउस की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने राष्ट्रपति की इन टिप्पणियों को विभाजनकारी क़रार दिया है.

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