क्या बिहार के राज्यपाल कठपुतली हैं? परीक्षा के इस सवाल पर बवाल: प्रेस रिव्यू

  • 16 जुलाई 2019
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भारतीय राज्यों की राजनीति में, ख़ासकर बिहार में राज्यपाल की भूमिका की तहक़ीक़ात कीजिए. क्या वो मात्र एक कठपुतली होते हैं?

बिहार के पब्लिक सर्विस कमिशन (बीपीएससी) के सामान्य ज्ञान के पर्चे में ये सवाल रविवार को बवाल का कारण बन गया और पेपर सेट करने वाले अधिकारी पर रोक लगा दी गई है. ये ख़बर इंडियन एक्सप्रेस अख़बार में है.

ये विश्लेषणात्मक सवाल 38 अंक का था और हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में था.

बिहार के दो गवर्नर विवाद के केंद्र में रह चुके हैं. 2000 के विधान सभा चुनाव के बाद, राज्यपाल बी सी पांडे ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए को सरकार बनाने का न्योता दिया था, जबकि राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली आरडेजी सबसे बड़े पार्टी बनकर उभरी थी.

नीतीश कुमार बहुमत साबित नहीं कर पाए थे और सात दिन में उनकी सरकार गिर गई थी. जिसके बाद आरजेडी और कांग्रेस की सरकार बनी थी.

इससे बाद 2005 में भी राज्यपाल बूटा सिंह ने सदन विघटित करने का सुझाव दे दिया था, जबकि एनडीए और यूपीए, दोनों एलजेपी की मदद से सरकार बनाने का दावा कर रही थी.

सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्यपाल के फैसले की आलोचना की थी और उसी साल दोबारा विधान सभा चुनाव हुए थे.

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विश्वास मत के दौरान अनुपस्थित रह सकते हैं बाग़ी विधायक

मुंबई के एक होटल में रुके कर्नाटक के विधायक मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी की ओर से लाए गए विश्वासमत के प्रस्ताव पर 18 जुलाई को होने वाली चर्चा के दौरान अनुपस्थित रह सकते हैं.

जनसत्ता अख़बार के मुताबिक़ विधायकों को यहां ठहराने के कामकाज से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि मुंबई में डेरा डाले हुए कर्नाटक के बाग़ी विधायकों के गुरुवार को बंगलुरु रवाना होने की संभावना कम है.

सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ विधायकों के इस्तीफ़े के बाद संकट का सामना कर रही कुमारास्वामी सरकार की बाग़ी विधायकों को वापस अपने ख़ेमे में लाने की कोशिशों के बीच विधान सभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने सोमवार को घोषणा की थी कि विश्वासमत प्रस्ताव पर 18 जुलाई को सदन में विचार किया जाएगा.

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के पांच और बाग़ी विधायकों की याचिका को 10 विधायकों की लंबित याचिका के साथ सुनने पर सहमति जता दी है.

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सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात क़ानून पर सुनवाई को हामी भरी

सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात क़ानून (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेग्नेंसी एक्ट) के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है.

ये ख़बर टाइम्स ऑफ़ इंडिया समेत कई अख़बारों में है. ख़बर के मुताबिक़ तीन महिलाओं की इस याचिका पर कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भी जारी किया है.

याचिकाकर्ता महिलाओं का कहना है कि यह महिलाओं का अधिकार है कि वह बच्चे को पैदा करना चाहती हैं या नहीं.

उनका कहना है कि क़ानून के प्रतिबंध से गर्भपात, स्वास्थ्य, बच्चे पैदा करने व महिलाओं की निजता का अधिकार प्रभावित होता है.

याचिका में कहा गया कि महिलाओं को अपनी मर्ज़ी से बच्चे पैदा करने की इजाज़त दी जाए. साथ ही गर्भपात को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया जाए.

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साक्षी-अजितेश से हाईकोर्ट परिसर में मारपीट

बरेली से बीजपी विधायक राजेश मिश्रा की बेटी साक्षी और उनके पति अजितेश के साथ इलाहाबाद हाइकोर्ट परिसर में कुछ लोगों ने मारपीट की.

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़ दोनों सुरक्षा की मांग को लेकर दायर अपनी याचिका पर सुनवाई के लिए हाईकोर्ट पहुंचे थे. कोर्ट ने उन्हें सुरक्षा देने का आदेश दिया लेकिन इसके कुछ ही मिनटों में उनपर हमला हो गया.

पुलिस ने बीच-बचाव किया और पति-पत्नी को कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के दफ्तर में लेकर गए.

पुलिस के मुताबिक़ कोर्ट के बाहर क़रीब 500 लोग थे, उस भीड़ में से किसी अज्ञात ने उन्हें मारा.

इससे पहले हाई कोर्ट ने कहा था कि पुलिस सुनिश्चित करे कि मिश्रा या उनके परिवार का कोई भी व्यक्ति जोड़े की शादीशुदा ज़िंदगी में दख़लअंदाज़ी ना करे.

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चरमपंथ से जुड़े मामले में यूएई से लाए गए 14 लोग

संयुक्त अरब अमीरात से प्रत्यर्पित कर लाए गए 14 आदमियों को एनआईए ने सोमवार को नई दिल्ली से चेन्नई एक विशेष विमान में रवाना किया.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ ये लोग एनआईए की हिरासत में हैं और इनपर आरोप है कि एक कथित चरमपंथी संगठन से इनके संबंध हैं.

बताया जा रहा है कि इन आदमियों को एनआईए कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से इनकी कस्टडी एजेंसी को सौंप दी गई.

सूत्रों के मुताबिक़ ये लोग तमिलनाडु के ही रहने वाले हैं और तमिलनाडु के एक धार्मिक संगठन वहदत-ए-इस्लामी हिंद के सदस्य हैं.

एनआईए को इनपुट मिला था कि इन लोगों के संबंध कथित चरमपंथी संगठन अंसार-उल-लाह से हैं. जिसके बाद इन्हें प्रत्यर्पित किया गया.

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