असम की बाढ़: जहां सैलाब में बह गईं कई ज़िंदगियां

  • 18 जुलाई 2019

असम में आई बाढ़ ने वहां रहने वाले लोगों के जीवन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बच्चे, बुज़ुर्ग और जानवर सभी बाढ़ के आए इस क़हर से जूझ रहे हैं.

जिन बच्चों के हाथों में खिलौने और किताबें होनी चाहिए वो पीने के पानी और खाने के लिए हाथ फैला रहे हैं. कई तस्वीरों में बच्चों को छाती तक भरे पानी में देखा जा सकता है.

वहीं कुछ महिलाएं हैं जो नाव चलाकर, ज़रूरतों का सामान इकट्ठा करके ख़ुद को और अपने परिवार को बचाने की कोशिश में लगी है. कई ऐसे बुज़ुर्ग है जिनके घर तो उजड़ गए हैं लेकिन वो अपने उजड़े घर के कुछ हिस्सों को बचाने की कोशिश में अब भी लगे हुए हैं.

ये तस्वीरें बाढ़ से जूझ रहे असम के आम लोगों के संघर्ष की एक झलक दिखाती हैं.

इमेज कॉपीरइट EPA

असम में बाढ़ आने से हालात इतने बेकार हो गए हैं कि पूरे राज्य में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है. बाढ़ के इस संकट से ख़ुद को बचाते हुए छाती तक भरे पानी में चलती हुई बच्ची.

इमेज कॉपीरइट EPA

राज्य में राहत और बचाव कार्य जारी है. लोगों को सुरक्षित रखने के लिए कैंप लगाए जा रहे हैं. ऐसे ही एक कैंप में अपनी आंखों में इस संकट के टलने की उम्मीद लिए एक बुज़ुर्ग महिला.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

इस बाढ़ में कई लोगों के घर उजड़ गए. लेकिन घर के बचे हुए सामानों के जद्दोजगद के साथ नया घर बसाने की उम्मीद लोगों में अब भी ज़िंदा है. इसी तरह घुटनों तक भरे पानी में एक हाथ में झोला और चप्पल तो दूसरे में सिलेंडर लेकर चलते हुए एक बुज़ुर्ग.

इमेज कॉपीरइट EPA

खुद को सुरक्षित जगह ले जाने के लिए एक बच्चे को साथ लिए नाव का सहारा लेते हुए युवक.

इमेज कॉपीरइट EPA

संकट सिर्फ़ बाढ़ का नहीं बल्कि पीने के पानी का भी है. बाढ़ से जूझ रहे बच्चे पीने के पानी के लिए हाथ फ़ैलाते हुए.

इमेज कॉपीरइट EPA

अपने परिवारों के साथ लोग बाढ़ के इस कहर से अपने सामानों को बचाने के लि जूझ रहे हैं. इस तस्वीर में बचे बर्तनों और बची हुई उम्मीदों के साथ एक परिवार.

इमेज कॉपीरइट STR

इंसान पर जब भी संकट आता है तो वो इश्वर को याद करने लगता है. फिर किसी के हिंदू या मुस्लिम होने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता क्योंकि सबकी तकलीफ़े एक-सी हो जाती हैं और दुआएं भी. बाढ़ के संकट में भी नमाज़ अदा करते हुए बुज़ुर्ग.

इमेज कॉपीरइट EPA

जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आती है तो नुक़सान सिर्फ इंसान का ही नहीं होता है. जानवर भी उस आपदा से उतने ही प्रभावित होते हैं. लेकिन मनुष्य खुद को बचाने का रास्ता ढूंढ निकालता है और जानवर अपनी जान बचाने के संघर्ष में जुटे रहते हैं. ये तस्वीर इस बात को बयां करती है कि प्रकृति के लिए सब समान है. वो सभी के साथ एक जैसा ही व्यवहार करती है.

इमेज कॉपीरइट EPA

जिन बच्चों के हाथों में बल्ले होने थे, गेंदे होनी थी वे लकड़ियां चुन रहे हैं. ये एक पीढ़ी का नुक़सान है. बाढ़ ने कई ज़िंदगियों की दिशाएं मोड़ दी हैं.

इमेज कॉपीरइट EPA

जिन्हें न बाढ़ का मतलब मालूम है, न राहत कार्यों का. इन मासूमों के लिए सुरक्षा का मतलब है मां की गोद या पिता का साथ.

इमेज कॉपीरइट EPA

जो मुश्किलों में भी मुस्कुराने की ताकत रखती हैं. बाढ़ में नांव पर अपने परिवार के साथ सुरक्षित स्थान ढूंढती एक महिला.

इमेज कॉपीरइट EPA

आंखों में सवाल है, जिनके ठोस जवाब न परिवार के पास हैं न ही सरकार के पास.

इमेज कॉपीरइट EPA

बाढ़ ने बहुत कुछ छीन लिया है लेकिन फिर भी स्थितियों को बेहतर बनाने की गुंजाइश हमेशा रहती है.

इमेज कॉपीरइट EPA

बाढ़ के कारण बांध के टूट जाने से स्थिति ज़्यादा गंभीर हो गई है. लोग अपने घर तो खो ही चुके हैं लेकिन अन्य चीज़ों को बचाने में जुटे हैं.

इमेज कॉपीरइट EPA

तस्वीरों में वहां के लोगों की पीड़ा का बस हिस्सा भर है. उनकी तक़लीफ इन तस्वीरों से कहीं ज़्यादा बड़ी है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार