#MeganRapinoe: अब औरतें झुकेंगी नहीं, अब वो माफ़ी नहीं मांगेंगी-ब्लॉग

  • 18 जुलाई 2019
मेगन रोपीनो इमेज कॉपीरइट Megan Rapinoe/Facebook

'ये लड़कियां...ये लड़कियां 'रफ़ एंड टफ़' हैं. ये किसी भी स्थिति का सामना कर सकती हैं. ये बोल्ड हैं. इन्हें खुलकर हंसना पसंद है. हमें कोई रोक नहीं सकता. शॉर्ट में कहें तो हमारा ग्रुप शानदार है."

ये अमरीका की महिला फ़ुटबॉल टीम मेगन रोपीनो के शब्द हैं. वही मेगन रोपीनो जिन्होंने फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप शुरू होने से सिर्फ़ तीन दिन पहले कहा था कि चाहे जो हो जाए वो व्हाइट हाउस में क़दम नहीं रखेंगी.

इसके बाद अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा था, "पहले आप जीतकर दिखाइए, फिर हम सोचेंगे कि आपको व्हाइट हाउस बुलाना है या नही."

ट्रंप को उनके आपत्तिजनक और विवादास्पद बयानों के लिए जाना जाता है लेकिन इस बार वो एक ही बयान देकर रुक गए.

उन औरतों का मुंह बंद कराना वैसे भी मुश्किल हो जाता है जो अपनी बात मज़बूती से सबके सामने रखती हैं.

ट्रंप बहस करती औरत को भरी सभा में 'दुष्ट औरत' कह सकते हैं लेकिन अगर वो ख़ुद ये ऐलान कर दें कि अगर आपने बेवजह उनसे टकराने की कोशिश करेंगे तो वो 'दुष्टता' पर उतर आएंगी तो फिर उन्हें 'दुष्ट' कैसे कहा जा सकता है?

ये भी पढ़ें: 'बोए जाते हैं बेटे और उग आती हैं बेटियां'

इमेज कॉपीरइट Megan Rapinoe/Facebook

गुलाबी बालों वाली 'बोल्ड' लड़की

तो अब बात करते हैं गुलाबी और छोटे बालों वाली उस लेस्बियन लड़की की जिसने अपने तेज़-तर्रार भाषण से अमरीका में सनसनी फैला दी है. वो गुलाबी बालों वाली लड़की अमरीका समेत बाक़ी दुनिया की लड़कियों के लिए 'रोल मॉडल' बनने लगी.

शायद यही वजह है कि अभिभावक, शिक्षक और वो सभी लोग निराशा से घिर गए हैं जो ये मानते हैं कि लड़कियों को 'लड़कियों की तरह' रहना चाहिए.

तो उस दिन से, जब से रोपीनो और उनकी टीम ने वर्ल्ड कप जीता, अमरीका में उनके पोस्टर जलाए जाने लगे, उनके पोस्टरों पर भद्दी बातें लिखी जाने लगीं और रोपीने के ख़िलाफ़ अपमानजनक नारे लगाए जाने लगे.

मैं सोच रही थी अगर कोई पुरुष कप्तान अपनी टीम को वर्ल्ड कप जिताता तो क्या लोग उसके साथ भी ऐसे ही बर्ताव करते? अगर धोनी या कोहली वर्ल्ड कप जीतकर भारत लौटते तो लोग उनकी वाहवाही करते या उनके पोस्टर फाड़ते? अगर लोग उनके पोस्टर नहीं फाड़ते तो फिर मेगन के लिए ऐसी अपमानजनक प्रतिक्रिया क्यों?

ये भी पढ़ें: क्रिकेट के ग़म में भारतीय ये जीत क्यों भूले

इमेज कॉपीरइट Megan Rapinoe/Facebook

ये लड़की इतनी 'मुंहफट' क्यों है?

जवाब काफ़ी सीधा है: लोग मेगन के ख़िलाफ़ इसलिए हैं क्योंकि वो उन्हें दबा नहीं सकते. लोग मेगन के ख़िलाफ़ इसलिए हैं क्योंकि वो सबसे माफ़ी नहीं मांगतीं.

मेगन ने अपनी टीम को वर्ल्ड जिताया लेकिन अमरीका में लोगों की प्रतिक्रिया कुछ ऐसी थी: जीतना-वीतना तो ठीक है लेकिन क्या वो ठीक से पेश नहीं आ सकतीं? वो हमेशा इतनी मुंहफट क्यों रहती हैं? अगर आप चैंपियन हैं तो इतना घमंड किस बात का? थोड़ी विनम्रता दिखाइए."

अमरीका के लोगों को तब दिक्क़त नहीं होती जब राष्ट्रपति ट्रंप महिलाओं के निजी अंगों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं लेकिन उन्हें एक समलैंगिक लड़की से दिक्क़त है जो आक्रामक है और खुलकर अपनी बात रखना जानती है और अपने गुलाबी बालों पर इतराती है.

वैसे लोगों का ये रवैया नया नहीं है. सोचिए अगल 12-15 साल की लड़कियां मेगन को अपना आदर्श मान लें और आज़ादी के सपने देखने लगें तो?

मेगन ने जो भाषण दिया, उसमें वो अपनी टीम की लड़कियों के बारे में भी बात करती हैं. उन्होंने कहा, "हम सब साथ हैं, हममें से कुछ के बाल गुलाबी हैं. किसी का रंग काला है, किसी ने टैटू गुदवाए हैं तो किसी के लंबे बाल हैं. स्ट्रेट लड़कियां हैं और लेस्बियन लड़कियां भी. मुझे हम सब पर गर्व है. हमने जीत हासिल की है और बेफ़िक्र हैं. हमारे स्वागत में जो रैली निकली उससे दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे ख़ूबसूरत शहर थम सा गया. हम दुनिया की सबसे बड़ी टीम हैं."

ये सारी बातें मेगन ने बड़े ही गर्व से कहीं. उनका रवैया लोगों को हैरान कर सकता है.

ये भी पढ़ें: 'पुरुषों से कम पसीना नहीं बहाती महिला टेनिस खिलाड़ी'

माफ़ी मांगने और माफ़ी न मांगने वाली औरतें

लोग उम्मीद करते हैं कि एक महिला 'उचित' बर्ताव करेगी लेकिन मेगन तो लोगों की नाराज़गी रत्ती भर भी परवाह नहीं करतीं! ये माफ़ी न मांगने वाली औरतें!!

हम औरतों को बेवजह माफ़ी मांगते देखते हैं और माफ़ी मांगने की वजहें अनगिनत हैं:

-क्योंकि वो शाम सात बजे से पहले घर नहीं लौट पाईं

-तेज़ बुख़ार की वजह से परिवार को गर्म रोटियां नहीं परोस पाईं

-सुबह अलार्म की आवाज़ से नहीं उठ पाईं और बेटे को स्कूल के लिए देरी हो गई

-शादी के बाद मां नहीं बन पाईं

-छुट्टी के दिन ऑफ़िस जाना पड़े

-लोग उन्हें परिवार के प्रति ग़ैर-ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं

-वो घर पर काम करके पैसे कमा रही हैं

-उनका काम करना पति को पसंद नहीं है

-उनके लिए दहेज के पैसे जुटाने पड़ रहे हैं

-वो पूर्वजों की संपत्ति में अपना हिस्सा चाहती हैं

-उन्होंने जन्म लिया और वो जी रही हैं

ये भी पढ़ें: महिला खिलाड़ियों की क़ाबिलियत हज़म नहीं होती

मेगन जैसी लड़कियों को बर्दाश्त क्यों नहीं कर पाते?

हम उन औरतों को देखते हैं जो आत्मग्लानि की अजीब सी भावना से घिरी रहती हैं. हम ऐसी औरतों को देखने के आदी हो गए हैं या बल्कि कहें कि ऐसी औरतों को देखना हमारे लिए 'नॉर्मल' हो गया है.

इसलिए हम मेगन और उनकी साथियों को देखकर झुंझला उठते हैं. हम उनके जीने के तरीके को बर्दाश्त नहीं कर पाते. ऐसा नहीं है कि मेगन जो करती हैं, वो हमेशा सही ही होता है. वो ख़ुद स्वीकार करती हैं कि कई बार झगड़े के दौरान वो ऐसी बातें कह देती हैं जो नहीं कहनी चाहिए.

मैं ये नहीं कहती कि उनकी आक्रामकता सही है लेकिन लोगों को ये उम्मीद नहीं पालनी चाहिए कि चूंकि वो एक महिला हैं इसलिए वो जीत के बाद विनम्र ही रहेंगी और लोगों के साथ भी विनम्रता से पेश आएंगी.

सैद्धांतिक और नैतिक रूप से ये कहना सही है कि उपलब्धियों के बाद हमारे पांव आसमान में नहीं होने चाहिए और न ही दुख में हमें आक्रामक होना चाहिए. एक केन विलियम्सन हैं जो वर्ल्ड कप में कांटे की टक्कर वाला फ़ाइनल हारने के बावजूद मुस्कुराते हैं और एक जेसन रॉय हैं जो साफ़-साफ़ आउट होने के बाद भी अंपायर से झगड़ा करते हैं.

ये भी पढ़ें: महिला आईपीएल में चुनी गईं कश्मीर की जासिया अख़्तर

इमेज कॉपीरइट Megan Rapinoe/Facebook

मर्दों और औरतों के लिए अलग-अलग रवैया क्यों?

हम दोनों के व्यवहार को ये कहकर सही ठहराते हैं कि पांचों उंगलियां कभी बराबर नहीं हो सकतीं लेकिन फिर हम मेगन रोपीनो के लिए यही तर्क भूल क्यों जाते हैं? युवा लड़कियां भी ये सब देख रही हैं और बीतते वक़्त के साथ वो भी बेवजह माफ़ी मांगना शुरू कर देंगी. ये हालात बदलने चाहिए.

मेगन ने जो भाषण दिया उसका निष्कर्ष कुछ ऐसा था, "हमें प्यार ज़्यादा करना होगा और नफ़रत कम. हमें सुनना ज़्यादा होगा और बोलना कम. इस दुनिया को ख़ूबसूरत बनाने की ज़िम्मेदारी हमारी है. आप जो चाहे करिए लेकिन आप जैसे इंसान हैं, उससे बेहतर बनिए."

अपना भाषण ख़त्म करने के बाद मेगन मंच पर दोनों हाथ फैलाकर खड़ी हो जाती हैं, ठीक वैसे ही जैसे वो वर्ल्ड कप जीतने के बाद खड़ी हुई थीं. इसके बाद उनके प्रशंसक और टीम की खिलाड़ी खुशी से चिल्लाते हैं.

वर्ल्ड कप जीतने के बाद ऐसा लगा जैसे वो दुनिया को चुनौती दे रही हों लेकिन साथ ही ऐसा लगा जैसे वो अपने दोनों हाथ फैलाकर दुनिया को गले लगा रही थीं.

सच कहूं तो मुझे दोनों में कुछ भी ग़लत नहीं लगा. हमारी लड़कियों के पास वो आज़ादी होनी चाहिए कि वो दुनिया को चुनौती दे सकें. उन्हें बस आत्मविश्वास से भरकर खड़े होना और अपने दोनों हाथ फैलाने हैं...बिना किसी के माफ़ी मांगे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार