यूपी के सोनभद्र ज़िले में ज़मीन विवाद में ख़ूनी संघर्ष, नौ की मौत, कई घायल

  • 17 जुलाई 2019
सोनभद्र ज़िले में ज़मीन विवाद पर हत्या इमेज कॉपीरइट Dinesh Kumar

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले में ज़मीनी विवाद में तीन महिलाओं समेत नौ लोगों की हत्या कर दी गई जबकि क़रीब दो दर्जन लोग घायल हो गए.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के मंडलायुक्त और एडीजी को घटना की जांच करने और 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है.

सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक सलमान ताज पाटिल ने बीबीसी को बताया, "घोरावल इलाक़े के उम्भा गांव में प्रधान यज्ञदत भुर्कियां ने दो साल पहले गांव में ही 90 बीघा ज़मीन ख़रीदी थी. बुधवार सुबह ज़मीन पर कब्ज़ा करने के लिए प्रधान तमाम लोगों को लेकर पहुंचे और ट्रैक्टर से खेतों की जुताई करने लगे जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया. इसी दौरान प्रधान पक्ष के लोगों ने धारदार हथियारों से ग्रामीणों पर हमला कर दिया. कुछ लोगों ने फ़ायरिंग भी की."

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि कुल नौ लोगों की मौत हुई है जिनमें तीन महिलाएं हैं. घायल लोगों को रॉबर्ट्सगंज के ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ़्तार किया है और कई अन्य की तलाश जारी है. गांव में तनाव को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. गांव के प्रधान फ़रार हैं.

हथियारों के साथ पहुंचे थे प्रधान

ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान पक्ष के लोग दर्जनों ट्रैक्टर और सैकड़ों लोगों को लेकर सुबह ही विवादित ज़मीन पर पहुंच गए. गांव वालों के मुताबिक वहां गए सभी लोग हथियारों और असलहों से लैस थे.

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घटना के चश्मदीद गांव के ही सुरेश कुमार ने फ़ोन पर बताया, "गांव वालों ने जब कब्ज़े का विरोध किया तो हथियारों से लैस सैकड़ों लोग उन पर टूट पड़े. देखते ही देखते कई लोग घायल होकर गिर पड़े और कई लोग मारे गए."

कुछ घायलों की स्थिति काफ़ी गंभीर बनी हुई है. मामले की जानकारी होने के बाद पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया और ज़िले के आला अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए.

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने सोनभद्र के ज़िलाधिकारी को घायलों को तत्काल और समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.

मुख्यमंत्री ने डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से मामले की निगरानी करने और दोषियों को पकड़ने के लिए बेहद प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया है. इसके अलावा मिर्ज़ापुर मंडल के आयुक्त और वाराणसी परिक्षेत्र के एडीजी को मामले की संयुक्त जांच करने और 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है.

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क्या है विवाद

बताया जा रहा है कि उभ्भा गांव के बाहरी इलाक़े में सैकड़ों बीघे खेत हैं जिस पर गांव के कुछ लोग पुश्तैनी तौर पर खेती करते आ रहे हैं.

गांव वालों के मुताबिक इस ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा प्रधान के नाम पर है. गांव के लोगों से कब्ज़ा छुड़ाने के मक़सद से प्रधान सैकड़ों लोगों को लेकर खेत जोतने गए थे. जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो प्रधान और उसके लोगों ने ग्रामीणों पर हमला कर दिया और फ़ायरिंग भी की. पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, प्रधान की तलाश में दबिश दी जा रही है.

जंगलों से घिरे इस इलाके में गोंड और गुर्जर अदिवासी रहते हैं और यहां की ज़्यादातर ज़मीन वनभूमि है. वनभूमि पर कब्ज़े को लेकर इस इलाक़े में अक़्सर विवाद होता रहता है.

इस घटना को लेकर राज्य की योगी सरकार पर विपक्ष ने हमले और तेज़ कर दिए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने क़ानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मृतक परिवारों को बीस-बीस लाख रुपये देने की मांग की है.

वहीं, कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने आरोप लगाया है कि सरकार इस घटना को ज़मीनी विवाद का परिणाम बताकर पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रही है. उनके मुताबिक, "ये पूरा मामला सरकार की मिलीभगत से भूदान की ज़मीन से आदिवासियों को बेदख़ल करने का है."

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