समझौता केस में एक धर्म से टेररिज़्म जोड़ने के लिए हेरफेर: अमित शाह- प्रेस रिव्यू

  • 18 जुलाई 2019
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि "समझौता विस्फोट मामले में सात लोग पकड़े गए थे, जिन्हें देश की ही एजेंसियों ने पकड़ा था. अमरीका की एजेंसियों ने भी कहा कि इन्होंने विस्फोट किया है. लेकिन बाद में अचानक एक धर्म विशेष के साथ टेररिज़्म को जोड़ने के लिए एक केस बनाया गया और जिन्होंने समझौता विस्फोट किया था, उन्हें बरी करके नए अभियुक्त बनाए गए. लेकिन इन लोगों को सज़ा इसलिए नहीं हुई क्योंकि इनके ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं थे."

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के मुताबिक़ अमित शाह ने आरोप लगाया कि ये मामला राजनीतिक भावना से दर्ज किया गया था. उन्होंने ये भी कहा कि असली दोषियों को छोड़ दिया गया था, जिससे समझौता एक्सप्रेस के पीड़ितों को न्याय नहीं मिला.

राज्य सभा में नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (संशोधन) बिल, 2019 पर तीन घंटे चली चर्चा के दौरान जब विपक्ष ने एनआईए को अधिक ताक़त दिए जाने के मसले पर चिंता जताई तो अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि मामले में न्याय ना होने के पीछे मोदी सरकार ज़िम्मेदार नहीं है, क्योंकि केस में जानबूझकर छेड़छाड़ कर असली मुजरिमों को रिहा कर उन लोगों को अभियुक्त बनाया गया, जिन्होंने कुछ किया ही नहीं था.

इससे पहले चिंता जताई गई थी कि इस क़ानून का कुछ समुदायों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया जा सकता है और कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि एनआईए समझौता ब्लास्ट मामले की जांच करने में नाकाम रही था.

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जबतक जाधव वापस नहीं आते, डर रहेगाः परिवार

कुलभूषण जाधव को लेकर जैसे ही इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस का बुधवार को फ़ैसला आया, सेंट्रल मुंबई के एनएम जोशी इलाक़े में जश्न मनाया जाने लगा.

यही वो इलाक़ा है जहां जाधव का बचपन बीता था और उनके अंकल भी यहीं रहते हैं.

इंडियन एक्सप्रेस से जाधव के अंकल ने कहा, "भारतीय सरकार ने अबतक जो कोशिशें की हम उनसे ख़ुश हैं. हम कुलभूषण को ज़िंदा पाकिस्तान से वापस आते हुए देखना चाहते हैं. जबतक वो आ नहीं जाते, डर बना रहेगा."

कुलभूषण जाधव मामले में नीदरलैंड्स की हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत ने फांसी पर रोक जारी रखते हुए पाकिस्तान से इस पर फिर से विचार करने को कहा है.

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Image caption सांकेतिक तस्वीर

बीफ़ फेस्ट के लिए फ़ेसबुक पर निमंत्रण डाला, गिरफ़्तार

तमिलनाडु के कोरानट्टुकरुप्पु के रहने वाले एक 33 वर्षीय शख़्स ने 13 जुलाई को फ़ेसबुक पर बीफ़ फेस्टिवल के लिए एक निमंत्रण डाला था, जिसके लिए उन्हें बुधवार को गिरफ़्तार कर लिया गया.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़ एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एस एजिलन उर्फ़ रामकुमार ने दक्षिणपंथी समूहों के सदस्यों को फेस्टिवल के लिए आमंत्रित किया था.

पुलिस अधिकारी के मुताबिक़, "पोस्ट में ये भी लिखा गया था कि अगर वो फेस्टिवल में आते हैं तो उनका सबसे ज़्यादा सम्मान किया जाएगा."

एजिलन ने फेस्टिवल की तारीख़ का ज़िक्र नहीं किया था.

पुलिस ने बताया कि कल्लपुलियुर गांव के ग्राम प्रशासनिक अधिकारी सुरेंद्र राजन की शिकायत पर पुलिस ने एजिलन के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया.

पुलिस ने एजिलन के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 298 (किसी भी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए जानबूझकर ऐसे शब्दों का प्रयोग करना) साथ में 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) और 505 (2) (बयान या दुश्मनी को बढ़ावा देने, घृणा फ़ैलाने के इरादे) के तहत केस दर्ज किया गया है.

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कर्नाटक: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बंटी कांग्रेस

बुधवार को कर्नाटक के बाग़ी विधायकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर कांग्रेस बंटी हुई नज़र आई.

द हिंदू के मुताबिक़ वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे जीत बताया तो पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कोर्ट ने 'डरावनी न्यायिक मिसाल' पेश की है.

सुरजेवाला ने कई ट्वीट किए और सुप्रीम कोर्ट को 2016 में उत्तराखंड में दलबदल पर दिए उसके फ़ैसले की याद दिलाई.

वहीं सिंघवी, जो शीर्ष अदालत में कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर केआर रमेश कुमार का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, उन्होंने कहा कि 'बीजेपी दुष्प्रचार अभियान' चला रही थी, लेकिन कांग्रेस एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर जीत गई है.

कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद सुरजेवाला ने ट्वीटर पर लिखा कि कार्यवाही में भाग लेने की बाध्यता ख़त्म करने से बाग़ी विधायकों को सुरक्षा मिल गई है.

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हार्ड कौर ने ख़ालिस्तान आंदोलन का समर्थन किया

ब्रिटेन स्थित पंजाबी रैपर तरन कौर ढिल्लन, जिन्हें हार्ड कौर के नाम से जाना जाता है, वो अलगाववादी '2020 रेफरेंडम फ़ॉर ख़ालिस्तान' अभियान में शामिल हो गई हैं.

इस अभियान की वजह से भारत ने इसी महीने गुरपतवंत सिंह के नेतृत्व वाले न्यूयॉर्क स्थित सिख फ़ॉर जस्टिस के मुख्यालय पर प्रतिबंध लगा दिया था.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़ सोशल मीडिया पर कई पोस्ट करके हार्ड कौर ने सिखों से अलग सिख देश के लिए वोट करने की अपील की.

इंस्टाग्राम पर उन्होंने दो वीडियो डाले हैं, जिसमें वो सफ़ेद टी-शर्ट में दिखीं. इसपर लिखा है '2020 रेफरेंडम'.

इस वीडियो में वो ख़ालिस्तान समर्थक नारे भी लगा रही हैं.

हार्ड कौर ने अपने पोस्ट में पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल को भी टैग किया है.

इस वीडियो में वो बोलती दिख रही हैं, 'ये शुरुआत है.'

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