मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के 41 में से 40 मामलों में सभी अभियुक्त बरी: प्रेस रिव्यू

  • 19 जुलाई 2019
मुजफ़्फरनगर दंगे:

इंडियन एक्सप्रेस में ख़बर दी गई है कि मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के 41 में से 40 मामलों में सभी अभियुक्तों को छोड़ दिया गया है. अख़बार को हत्या के 10 मामलों में कई ख़ामियां नज़र आई हैं.

जैसे पांच गवाह इस बात से मुकर गए कि वो अपने रिश्तेदार की हत्या के समय मौक़े पर मौजूद थे. जबकि एफ़आईआर में ऐसा लिखा गया है.

छह गवाहों ने कहा कि पुलिस ने उनसे ख़ाली पन्नों पर जबरन साइन कराए थे. वहीं, पुलिस को पांच मामलों में हत्या में इस्तेमाल हुआ हथियार नहीं मिल पाया. इन मामलों में पुलिस से कभी सवाल भी नहीं किए गए.

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2013 में हुए इन मुज़फ़्फ़रनगर दंगे में कम से कम 65 लोग मारे गए थे. उस समय राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार थी. इन मामलों पर सुनवाई सपा और बीजेपी दोनों सरकारों में हुई है.

इन बयानों के आधार पर जनवरी 2017 से फ़रवरी 2019 के बीच 10 हत्या के मामलों में सभी अभियुक्तों को छोड़ दिया गया.

2017 के बाद से मुज़फ़्फ़रनगर कोर्ट 41 मामलों पर फ़ैसले सुना चुकी है और सिर्फ़ एक ही मामले में सज़ा दी गयी. सभी 40 मामले मुसलमानों पर हमले से जुड़े हैं.

8 फ़रवरी को एक मामले में सज़ा दी गई जिसमें मुज़म्मिल मुजस्सिम, फ़ुरक़ान, नदीम, जहांगीर, अफ़ज़ल और इक़बाल अभियुक्त थे. उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा हुई है.

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मायावती के भाई की संपत्ति ज़ब्त

दैनिक जागरण की ख़बर के अनुसार बसपा प्रमुख मायावती के भाई और बसपा उपाध्यक्ष आनंद कुमार की 400 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त कर ली गई है.

आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति क़ानून के तहत आनंद कुमार और उनकी पत्नी की संपत्ति ज़ब्त कर ली है. आयकर विभाग के अनुसार इस संपत्ति की मूल क़ीमत लगभग 400 करोड़ रुपये है जबकि मौजूदा बाज़ार में इनकी क़ीमत इससे कहीं ज़्यादा हो सकती है.

आयकर विभाग लंबे समय से उनकी बेनामी संपत्तियों की जांच कर रहा था. अख़बार के मुताबिक़ नोएडा के सेक्टर-94 स्थित सात एकड़ ज़मीन के दस्तावेज़ खंगालने पर विभाग को पता चला कि दूसरी कंपनियों के नाम पर दिखाई गई ये ज़मीन आनंद और उनकी पत्नी विचित्रलता की है.

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1,797 कॉलोनियों होंगी वैध

अमर उजाला अख़बार की ख़बर है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की सभी 1,797 कॉलोनियों को वैध करने की घोषणा की है. इससे क़रीब 60 लाख लोगों को फ़ायदा होगा.

इस फ़ैसले की घोषणा करते हुए केजरीवाल ने कहा कि दो नवंबर, 2015 को दिल्ली कैबिनेट ने कॉलोनियों के नियमन का प्रस्ताव पास कर 12 नवंबर को केंद्र सरकार के पास भेज दिया था. इस पर कुछ दिनों पहले सहमति जताई गई है. कुछ तकनीकी सवाल भी उठाए गए हैं जिनके जवाब केंद्र को दिये जाने हैं.

वहीं, केंद्रीय आवास व शहरी कार्य मंत्रालय के अधिकारियों ने इसे केंद्र की पहल बताया है. उनका कहना है कि कॉलोनियां वैध करने की संभावना तलाशने के लिए उपराज्यपाल की अध्यक्षता में एक समिति बनी थी. जिसने 90 दिनों में सिफ़ारिश दी.

इस आधार पर कैबिनेट नोट तैयार किया गया और दिल्ली सरकार को मंज़ूरी के लिए भेजा गया. दिल्ली से जवाब मिलने के बाद केंद्र सरकार आगे बढ़ेगी.

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