कुलभूषण जाधव केस: पाकिस्तान की जीत या भारत की

  • 19 जुलाई 2019
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पाकिस्तान ने घोषणा की है कि वो पाकिस्तानी जेल में क़ैद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को कांसुलर ऐक्सेस प्रदान करेगा.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को ये बात एक प्रेस रिलीज़ जारी करके कही. इसके तहत कुलभूषण जाधव को कांसुलर ऐक्सेस प्रदान करने के लिए तौर तरीकों पर काम किया जा रहा है.

पाकिस्तान ने ये क़दम बुधवार को नीदरलैंड्स की हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत के उस फ़ैसले के बाद उठाया है जिसमें उससे कहा गया था कि वो जाधव को तुरंत कांसुलर ऐक्सेस प्रदान करे और उसे इस अधिकार की जानकारी दे.

इसके बाद पाकिस्तान ने एलान किया है कि जाधव को उसके अधिकारों के बारे में जानकारी दे दी गयी है.

अदालत का फ़ैसला किसकी जीत?

कुलभूषण जाधव के मामले में अंतरराष्ट्रीय अदालत के फ़ैसले को भारत और पाकिस्तान दोनों अपनी जीत कह रहे हैं. दोनों देशों की मीडिया अपनी-अपनी जीत का जश्न मना रही है.

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कुलभूषण सुधीर जाधव को मार्च 2016 में पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में गिरफ़्तार किया गया था और इस मामले ने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा दिया था.

पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने 2017 में जाधव को जासूसी के इलज़ाम में फ़ांसी की सज़ा सुनाई थी जिसके बाद भारत ने इसके ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था.

1) भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाज़ा खटखटाना सही

पाकिस्तान ने इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाया था. अदालत ने इस एतराज़ को रद्द कर दिया था. ये भारत के हक़ में आया पहला फ़ैसला था. अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा, "1963 के वियना कन्वेंशन के अनुसार दो देशों के बीच आईसीजे विवादों का अनिवार्य निपटान कर सकती है."

इस मामले में अधिकतर फ़ैसलों में 15 जजों ने भारत का साथ दिया. लेकिन पाकिस्तानी जज जिलानी ने हर फ़ैसले का विरोध किया.

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2) पाकिस्तान की सैन्य अदालत का जाधव के ख़िलाफ़ फ़ैसला वियना कन्वेंशन का उल्लंघन

अदालत ने भारत के इस तर्क को सही माना. अदालत ने ये भी माना है कि कुलभूषण जाधव को इतने दिनों तक क़ानूनी सहायता नहीं देकर पाकिस्तान ने वियना संधि का उल्लंघन किया है.

अंतरराष्ट्रीय अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा कि पाकिस्तान ने जाधव तक कांसुलर ऐक्सेस से इनकार करके और उन्हें उनके अधिकारों की जानकारी नहीं देकर वियना कन्वेंशन का उल्लंघन किया है.

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अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा, "अदालत का मानना है कि कुलभूषण सुधीर जाधव को, उनके अधिकारों के तहत देरी किए बिना सूचित नहीं किया जाना वियना कन्वेंशन के आर्टिकल 36, पैरा 1 (बी), का उल्लंघन है."

1963 में आयोजित वियना कन्वेंशन के अंतर्गत किसी विदेशी को गिरफ़्तार करने के बाद उसके दूतावास के अधिकारियों को उस तक ऐक्सेस देना ज़रूरी है. इस कन्वेंशन पर भारत और पाकिस्तान दोनों हस्ताक्षर कर चुके हैं.

3) भारत की अपील थी कि पाकिस्तान अपनी सैन्य अदालत के फ़ैसले को रद्द करने के लिए कदम उठाये

अदालत ने भारत की इस अपील पर पाकिस्तान को ऐसा कोई आदेश नहीं दिया. अंतरराष्ट्रीय अदालत ने फ़ांसी पर रोक जारी करते हुए पाकिस्तान को इस पर फिर से विचार करने को ज़रूर कहा है. साथ ही ये भी साफ़ कर दिया है कि पाकिस्तान किस तरह से इस पर पुनः विचार करे, ये फ़ैसला उसे खुद करना है.

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4) भारत का अनुरोध था कि पाकिस्तान जाधव को रिहा करे और उसे सुरक्षित रूप से भारत वापस भेजे

अदालत ने इस अनुरोध को भी नहीं माना. पाकिस्तानी मीडिया इसी फ़ैसले का हवाला देकर पाकिस्तान की जीत की बात कर रही है.

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5) भारत का अनुरोध था कि पाकिस्तान से कहा जाए कि अपनी आम अदालत में जाधव पर फिर से मुक़दमा चलाये

अतंरराष्ट्रीय अदालत ने भारत की इस अपील को अपने फ़ैसले में शामिल ही नहीं किया.

दोनों देशों के बीच अपनी जीत पर जश्न के बीच का सच ये है कि दोनों अपनी जगह सही हैं. अब सवाल ये पैदा होता है कि फ़ैसला तो मिल गया लेकिन जाधव नहीं मिले है. अब कुलभूषण भारत कैसे लौटेंगे इस पर विचार हो सकता है लेकिन हक़ीकत ये है कि ये फ़ैसला पाकिस्तान का होगा.

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