शीला दीक्षित शुक्रवार तक ठीक थीं, अचानक शनिवार को कैसे हुई मौत- प्रेस रिव्यू

  • 21 जुलाई 2019
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द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ शीला दीक्षित शुक्रवार तक ठीक थीं. वो दिल की मरीज़ थीं और बीते कुछ सालों में उनकी कई सर्जरी हुई थी.

शनिवार सुबह दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने सांस में परेशानी की शिकायत की. उनका दिल भी सामान्य से तेज़ धड़क रहा था.

परिवार उनको तुरंत दक्षिणी दिल्ली के फोर्टिस एस्कॉर्ट हॉर्ट इंस्टीट्यूट लेकर गया. इस अस्पताल में ही क़रीब दो दशक से शीला दीक्षित की दिल की बीमारियों का इलाज चलता रहा था.

लेकिन रास्ते में ही अचानक उनके दिल की धड़कन रुक गई. अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है, "जब सुबह दस बजकर 40 मिनट पर वो अस्पताल पहुंचीं तो बेहोश थीं और उनकी धड़कन रुक गई थी."

अस्पतालों में डॉक्टरों की एक टीम ने उन्हें तुरंत होश में लाने की कोशिशें की. कार्डियोपल्मोनरी और डिफिब्रिलेशन के प्रयास किए गए. शीला को कुछ समय के लिए होश आ गया.

उनकी हालत स्थिर थी और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था. लेकिन दिन में तीन बजे उन्हें दोबारा दिल का दौरा पड़ गया. इस बार डॉक्टरों के सभी प्रयास नाकाम रहे और 3.55 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.

शीला दीक्षित ने बीते सप्ताह ही रूटीन हेल्थ चेक अप कराया था और डॉक्टरों ने उनकी सेहत को कोई ख़तरा नहीं बताया था. शीला के एक क़रीबी ने अख़बार से कहा, "शीला दीक्षित बहुत सक्रिय थीं और शुक्रवार तक वो दिल्ली में कांग्रेस को पुनर्जीवित करने की योजना पर काम कर रहीं थीं."

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इंडियन एक्सप्रेस में दी गई ख़बर के मुताबिक़ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक जांच रिपोर्ट में आरोप है कि अलगाववादी नेता और जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक के पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी आईएसआई से संबंध पाए गए हैं.

रिपोर्ट में उन पर भारत प्रशासित कश्मीर में अशांति पैदा करने के लिए पाकिस्तान से फंड लेने का आरोप लगाया गया है. हालांकि, यासीन मलिक के वकील का कहना है कि उन्हें बदनाम किया जा रहा है.

एनआईए कश्मीर में अलगाववादी नेताओं के ख़िलाफ़ टेरर फंडिंग के एक मामले की जांच कर रही है. एक कश्मीरी कारोबारी ज़हूर अहमद शाह वटाली सहित दर्जनों लोगों के ख़िलाफ़ एक चार्जशीट दायर की गई है.

इसमें दावा किया गया है कि वटाली के पास मिली एक डायरी से पता चलता है कि उन्हें पाकिस्तानी उच्चायोग और हाफ़िज़ सईद से फंड मिला था. इस फंड को जिन अलगाववादी नेताओं के बीच बांटा गया उनमें यासीन मलिक का नाम भी शामिल है.

यासीन मलिक के वकील राजा तुफ़ैल ने कहा है, ''जांच एजेंसी ने हर तरह के सबूत खोजने की कोशिश की लेकिन वो असफल रहे. ये उन्हें बदनाम करने की कोशिश है.''

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आनंदीबेन पटेल बनी यूपी कीराज्यपाल

गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को उत्तर प्रदेश का नया राज्यपाल बनाया गया है.

वह मौजूदा राज्यपाल राम नाईक की जगह लेंगी.

इसके अलावा मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, त्रिपुरा और नागालैंड में भी नए राज्यपालों की नियुक्ति की गई है. इस संबंध में शनिवार को राष्ट्रपति भवन की ओर से अधिसूचना जारी की गई थी.

बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन को मध्य प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है. पूर्व सांसद और वरिष्ठ वकील जगदीप धनखड़ पश्चिम बंगाल के, छत्तीसगड़ में बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश बैस त्रिपुरा के, एन रवि को नगालैंड और फागू चौहान को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया है.

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अब सिर्फ बछियां पैदा करेंगी गाय

जनसत्ता अख़बार के अनुसार हरियाणा में गायें अब बछड़ों की बजाए बछियां ही पैदा करेंगी. पशुपालन विभाग ने इसका सफल ट्रायल करने के बाद पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है.

अब हरियाणा की गाय कृत्रिम गर्भधारण की मदद से सिर्फ बछियां पैदा करेंगी.

ये फ़ैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि प्रदेश में लोग बछड़ों और बैल के कारण होने वाले फसलों के नुकसान और सड़क हादसों से परेशानी झेल रहे थे. पहले इन्हें किसान खेत जोतने के लिए इस्तेमाल करते थे लेकिन अब ट्रैक्टर का इस्तेमाल होने लगा है.

पहले इन्हें उन राज्यों में भेजने की योजना बनाई गई थी जहां खेती में अब भी इनका इस्तेमाल होता है लेकिन ये योजना सफ़ल नहीं हो सकी थी.

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क्यों टला चंद्रयान-2 अभियान

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक इसरो अपने पहले प्रयास में चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण इसलिए नहीं कर पाया था क्योंकि जीएसएलवी-3 रॉकेट के टैंकों में से एक में भरे हीलियम में दबाव कम हो गया था.

15 जुलाई को प्रक्षेपण रद्द होने के पीछे तकनीकी कारण बताया गया था. अभियान को तय समय से आधा घंटा पहले रोक दिया गया था.

इसरो का कहना है कि उसकी विशेषज्ञ समिति ने समस्या का पता लगाकर उसे ठीक कर दिया और अब सिस्टम सामान्य तरीके से काम करने लगा है.

अख़बार ने एक वैज्ञानिक के हवाले से लिखा है कि रॉकेट में क्रायोजैनिक फ़्यूल भरा गया था जिसका तापमान 100 डिग्री सेल्सियस से कम था. इससे फ़्यूल टैंक के आसपास मौजूद चीजें भी ठंडी हो गईं.

इसके पास ही हीलियम टैंक भी था जिसका दबाव गिर गया. लेकिन, उस वक़्त वैज्ञानिकों को ये पता नहीं चल पाया कि ये फ़्यूल टैंक के कारण हुआ या हीलियम चैंबर लीक होने के कारण. इससे चैंबर फट भी सकता था.

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