क्या ओझा के इशारे पर डायन समझकर की गई हत्या? : ग्राउंड रिपोर्ट

  • 23 जुलाई 2019
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झारखंड के गुमला ज़िले के सिसकारी गांव में डायन-बिसाही के आरोप में चार लोगों की हत्या कर दी गई है. मरने वालों में सुन्ना उरांव (60), चापा उरांव (69) उनकी पत्नी पीरा उराईन (60) और फगनी उराईन (60) शामिल हैं.

घटना रविवार तड़के तीन बजे की है. शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने गांव के आठ लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है.

गिरफ्तार लोगों में गांव के पाहन (मुख्य पुजारी) सुकरा उरांव, पुजार (सहायक पुजारी) तुला उरांव, कुन्दरू उरांव, लालू उरांव, राम उरांव, शुकु उरांव, महावीर उरांव और झाड़ी उरांव शामिल हैं.

गुमला के एसपी अंजनी कुमार झा ने बताया कि मामला पूरी तरह अंधविश्वास का है. गिरफ्तार लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा-147 (उपद्रव का दोषी)-148 (घातक हथियार से हमला)-149 (भीड़ द्वारा हिंसा)-302 (हत्या) और डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम-2001 के तहत एफआईआर दर्ज करा दिया गया है.

कुछ अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ भी एफ़आईआर दर्ज किया जाएगा.

उन्होंने यह भी बताया कि सिसकारी गांव के लोग जिस दूसरे गांव (मुर्गा) में ओझाइन (महिला ओझा) के पास पहले गए थे, वहां भी पुलिस दबिश दे रही है. उन्हें जाँच के बाद गिरफ्तार किया जाएगा.

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Image caption घटना के दिन ग्रामीणों से बात करते विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव

बीमारी से मौत की वजह मान रहे डायन

रांची ज़िला मुख्यालय से 94 किलोमीटर दूर नगर पंचायत के सिसकारी गांव में चारो तरफ़ सन्नाटा पसरा हुआ है. हत्या के बाद जिस जगह लाश रखी गई थी, वहां पुलिस का पहरा लगा दिया गया है.

सोमवार 22 जुलाई की दोपहर यहां पर ग्राम प्रधान मारवाड़ी उरांव (45), उप मुखिया रुक्मनी देवी के पति दामोदर सिंह कुछ अन्य सरकारी कर्मी मिले. उन्होंने बताया कि गांव में कुल 94 घर हैं. जिसमें 90 घर उरांव जनजाति के, लोहरा जनजाति के तीन और एक घर नागेसिया जनजाति का है.

उन्होंने यह भी बताया कि 31 जून को सीएम कृषि आशीर्वाद योजना के तहत जमा किए गए आंकड़े के मुताबिक़ मृतक चापा उरांव के पास छह एकड़ ज़मीन, सुना उरांव के पास चार एकड़ ज़मीन हैं. जबकि फगनी उराईन का रैयत पेपर नहीं मिला था, जिस वजह से पता नहीं चल पाया कि उसके पास कितनी ज़मीन हैं.

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Image caption मृतक फगनी देवी की बहू बूढ़न देवी

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गांव में मात्र चार घर बनाए गए हैं. किसी भी घर में शौचालय नहीं है.

बीबीसी को गांववालों से मिली जानकारी के मुताबिक़ गांव के युवक बोलो उरांव और सरकारी शिक्षक नरुआ उरांव की पत्नी की मृत्यु एक महीना पहले बीमारी की वजह से हो गई थी. वहीं एक साल पहले गौरा उरांव की पत्नी की मृत्यु भी कई बीमारियों की वजह से हो गई थी.

बोलो उरांव को शराब की लत थी. वह पहले से भी बीमार थे. नरुआ उरांव की पत्नी को किडनी संबंधी बीमारी थी.

मारवाड़ी उरांव ने बताया कि मृतक सुना उरांव, चापा उरांव और पीरी देवी हर दिन चार बजे सुबह ज़ोर-ज़ोर से मंत्र पढ़कर पूजा करते थे. अगले ही पल उन्होंने यह भी बताया कि यह मंत्र नागपुरी भाषा में करमा गीत (आदिवासी त्योहार), सरना माई का गीत हुआ करता था. जिसे खास मौक़ों पर अन्य ग्रामीण भी सरना पूजा के वक़्त गाया करते हैं.

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Image caption गांव में तैनात सुरक्षाबल

ग्रामसभा में लगाया गया था आरोप

घटनाक्रम से बारे में उन्होंने बताया कि बीते 17 जुलाई को गांव में एक सभा का आयोजन किया गया था. जिसमें 200 से अधिक ग्रामीणों के साथ वह भी मौजूद थे. बात हुई कि गांव पर किसी की बुरी नज़र लग गई है. तय किया गया कि सावन महीने के सातवें दिन यानी 24 जुलाई को गांव की देवी को एक बकरे का बलि चढ़ाकर इसे शांत किया जाएगा.

इसके बाद कुछ ग्रामीण पास के गांव चडरी टोली के ओझा जटु उरांव के पास पहुंचे. उन्होंने बताया कि गांव के हालत गंभीर हैं. उनसे नहीं संभल सकता है. किसी बड़े ओझा को दिखाओ.

एक अन्य ग्रामीण ठुमैर देवी ने बताया कि जटु उरांव की सलाह के बाद शुक्रवार 19 जुलाई को 50 से अधिक ग्रामीण रांची ज़िले के बुढ़मू प्रखंड के मुर्गी गांव के एक ओझा के पास पहुंचे. वहीं तेतरी देवी ने बताया कि उनलोगों के साथ ग्रामीणों में मृतकों में एक फगनी देवी के अलावा अन्य तीन भी शामिल थे. यही नहीं चापा उरांव और पीरी देवी के बहु-बेटे भी शामिल थे.

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Image caption मृतक सूना उरांव के परिजन

मुर्गा गांव के ओझा के इशारे पर हुई हत्या

एक अन्य ग्रामीण लाली देवी के मुताबिक़ मुर्गी गांव में एक महिला ओझा (जिसका नाम किसी भी ग्रामीण ने नहीं बताया) ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि किसी के घर के आगे सूखा पीपल, का पेड़ है, वही गांव को तबाह कर रहा है. बीते माह और पूर्व में गांव में हुई मौत के लिए इन्हीं लोगों को जिम्मेदार ठहराया.

बुढ़मू के स्थानीय पत्रकार रंगनाथ बातते हैं कि आसपास के इलाक़ों में पहले भी डायन के आरोप में हत्याएं हुई है. उसमें भी मुर्गी गांव के ओझा का नाम ही सामने आता रहा है.

वहीं डायन कुप्रथा उन्मूलन को लेकर पिछले 30 सालों से काम कर रहे आशा नामक एनजीओ के सचिव अजय कुमार जायसवाल ने बताया कि उनलोगों ने साल 2015 में झारखंड के आठ ज़िलों के 332 पंचायत में सर्वे किया था. इसमें 76 ओझा चिन्हित किए गए थे.

उनके मुताबिक़, इनको ऐसी महिलाओं ने चिन्हित किया था जिन्हें डायन कहा जा रहा था. ऐसी महिलाओं की संख्या 256 थी. ये सभी झारखंड के सरायकेला, बोकारो, रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा जिलों से थीं.

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Image caption सिसकारी के ग्रामीण

गांव में पसरा है सन्नाटा

सिसकारी गांव में मृतक फगनी देवी की बहु बुधन देवी (32) हाल-चाल लेने आए मेहमानों के लिए चावल और साग बना रही थीं. बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उनकी सास का गांव में इससे पहले कभी किसी के साथ झगड़ा नहीं हुआ था. वह पूजा पाठ करती थी, लेकिन हर दिन नहीं. वह भी गांव की देवी और सरना माई (आदिवासियों की देवी) की पूजा करती थी.

उन्होंने यह भी बताया कि घटना की रात (शनिवार की रात) इतना हो-हल्ला होने के बाद भी उसकी आंखें नहीं खुली. पति बाक़ी दिनों की तरह हंड़िया पी कर सोया था, वह भी नहीं जग पाया. सुबह होने पर पता चला कि उसकी सास को गांव के लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला है.

बुधन देवी के चार बेटे हैं. कोई भी स्कूल नहीं जाता है. पति बिंदो उरांव खेती करते हैं. साल के छह महीने वह ईंट भट्ठा में काम करने हज़ारीबाग जाते हैं.

इनके घर से दो सौ क़दम की दूरी पर दूसरे मृतक सुना उरांव का घर है. घर में उनकी बेटी हीरा उराईन और उनके कुछ और सगे संबंधी मौजूद थे. हीरा घटना के बाद अपने ससुराल लोहरदगा से यहां आई हैं. पूछने पर बताया कि मां सुनी उराईन और भाई सनिका उरांव को पुलिस ले गई है.

वहीं चापा उरांव और पीरी देवी के घर में कोई नहीं था. वारदात स्थल पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने बताया कि सभी को सिसई थाना ले जाया गया है. सिसई थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर सुधीर प्रसाद साहू ने बताया कि परिजनों की सुरक्षा को देखते हुए इन्हें थाना बुलाया गया है.

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Image caption फगनी देवी का बेटा बिंदू उरांव

बहू ने कहा उसके सास-ससुर थे डायन

सिसई थाना पहुंचने पर बाहर बने आगंतुक कक्ष में सभी परिजन बैठे मिले. चापा उरांव और पीरी देवी की बहू पैरबा देवी (25) ने बताया कि मुर्गा गांव में महिला भगत के पास वह भी गई थीं. वहां उसने अपने आंचल से चावल निकाल कर दिया. जिसे देखने के बाद महिला ओझा ने कहा कि तुम्हारे घर में ही कोई है जो गांव को परेशान कर रहा है.

पैरबा ने साफ तौर पर कहा कि उससे सास-ससुर डायन थे. उन्हीं की वजह से उनका बच्चा भी बीमार रहता है. हालांकि उन्हें दुःख है कि गांव वालों ने मिलकर उनकी हत्या कर दी. उसकी बात से पति फेकू उरांव (28) भी सहमत दिखे.

वहीं सुना उरांव की पत्नी सुनी उराईन (55) ने बताया कि देर रात जब उसके पति को लोग घर से निकाल रहे थे, तो वह उन्हें बचाने आगे आई. इस दौरान लोगों ने उसके हाथ पर भी डंडे मारे. वह अपना चोट से फूला हाथ दिखाते हुए कहती हैं बेटा बचाने आया तो उसे भी मारने लगे. वह डर के मारे भाग गया.

पास खड़ा बेटा सनिका उरांव (24) ने बताया कि ग्रेजुएशन की पढ़ाई अधूरा छोड़ अब वह मनरेगा मज़दूर है और खेती करता है. उसने यह भी बताया कि महिला समूह में जमा हुए पैसे से सिसकारी से मुर्गा आने के लिए सभी लोगों का किराया (5300 रुपए) दिया गया था.

वहीं मुर्गा गांव में पहुंचने पर ओझाओं के बारे में पता किया तो किसी भी गांववालों ने उसके बारे में बताने से साफ़ इनकार कर दिया.

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Image caption महिला ग्रामीण थुमैर देवी

जारी है डायन के नाम पर हत्याओं का सिलसिला

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के हवाले से हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक़ झारखंड में 523 महिलाओं की हत्या डायन होने के आरोप में की गई है. यह सभी हत्याएं साल 2001 से 2016 तक हुई हैं. झारखंड पुलिस की वेबसाइट पर इससे संबंधित किसी प्रकार का डेटा जारी नहीं किया गया है.

वहीं डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम 2001 के मुताबिक़ ऐसे मामलों में अधिकतम छह माह की सज़ा और दो हज़ार रुपए जुर्माना लगाया जाता है. आशा एनजीओ के सचिव अजय कुमार जायसवाल बताते हैं कि यह इतना कमज़ोर क़ानून है कि इसके तहत गिरफ़्तार हुए ओझा तुरंत बाहर आ जाते हैं.

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