मध्यप्रदेश: कमलनाथ सरकार गिराने का दावा करने वाली बीजेपी को ख़ुद लगा झटका

  • 24 जुलाई 2019
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मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार ने बीजेपी को तगड़ा झटका दिया है. बीजेपी के दो विधायक बुधवार को कांग्रेस में शामिल हो गए हैं.

बीजेपी के दो विधायक नारायण त्रिपाठी और शरद कौल ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है. इस तरह से कमलनाथ सरकार को गिराने की धमकी देने वाली बीजेपी को ख़ुद नुक़सान उठाना पड़ा है.

मध्यप्रदेश सरकार को कभी भी गिरा देने का दावा करने वाली बीजेपी को मध्यप्रदेश विधानसभा में बुधवार को उस वक़्त झटका लगा, जब उसके दो विधायकों ने क्रास वोटिंग करके काग्रेंस के पक्ष में वोट डाला.

सरकार के पक्ष में कुल 122 मत पड़े. कांग्रेस को 121 विधायकों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन उसे 122 मत प्राप्त हुए हैं. एक मत अध्यक्ष का था.

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सियासी हलचल तेज़

कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार के गिरने के बाद मध्यप्रदेश में भी सियासी हलचल तेज़ हो गई थी. बुधवार को सदन में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा था कि अगर ऊपर से आदेश मिल जाए तो एक दिन के अंदर ही सरकार को गिराया जा सकता है.

जिसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बीजेपी को चुनौती दी थी कि वह सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाकर दिखाएं.

लेकिन बुधवार को काग्रेंस ने पहले से ही तैयारी कर रखी थी कि वह बीजेपी के विधायकों को तोड़ेगी और यही वजह है कि सदन में आपराधिक क़ानून संशोधन विधेयक पर वोटिंग कराई गई.

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दोनों विधायकों के आने के बाद कहा, "भारतीय जनता पार्टी पिछले छह महीने से कहती रही है कि यह अल्पमत की सरकार है. आज सुबह भी नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमें इशारा मिल जाए तो फ़ौरन सरकार चली जाएगी. मैंने उन्हें आमंत्रित किया, अविश्वास प्रस्ताव आज ही हो जाए. उन्होंने स्वीकार नहीं किया."

कमलनाथ ने आगे कहा, "एक बार सिद्ध करना था ताकि दूध का दूध पानी का पानी हो जाए. आज जो यह मतदान हुआ है यह केवल एक विधेयक पर नहीं है. यह मतदान बहुमत सिद्ध करने का मतदान है. और इस मतदान में भारतीय जनता पार्टी के दो सदस्यों ने काग्रेंस का साथ दिया है."

मैहर के बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी इससे पहले भी काग्रेंस के साथ रह चुके हैं.

पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने कहा, "मुझे मैहर का विकास भी चाहिए. मैं कहना चाहूंगा कि भारतीय जनता पार्टी झूठे वादे करके अपने आप को प्रचारित करती रहती है. मैहर में भी बहुत घोषणाएं हुई जिनपर कोई काम नहीं हुआ."

उन्होंने कहा, "आज मध्यप्रदेश में काग्रेंस की सरकार बहुत बेहतरीन ढंग से चल रही है. मैं कमलनाथ जी के साथ पहले भी था. इसे आप घर वापसी समझें. मुझे अपने क्षेत्र का विकास करना है इसलिए आया हूं."

सदन में वोटिंग की स्थिति आपराधिक क़ानून संशोधन विधेयक के दौरान हुई जब बसपा विधायक संजीव सिंह ने इस पर मत विभाजन की मांग की, जिसे स्पीकर ने स्वीकार कर लिया.

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विपक्ष में एक भी मत नहीं

कमलनाथ सरकार के विधेयक के पक्ष में 122 वोट पड़े. विपक्ष में एक भी मत नहीं पड़ा क्योंकि बीजेपी ने मत विभाजन में भाग नहीं लिया. अलबत्ता बीजेपी के दो विधायकों का साथ कांग्रेस को ज़रूर मिल गया.

विपक्षी बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा, "एक विधेयक के कारण वोटिंग हुई थी. जिस विधेयक के पक्ष में विपक्ष के नेता ने खड़े होकर विपक्ष की सहमति दी थी. वोटिंग कराने की मांग वही करता है जो इससे असहमत हो लेकिन वोटिंग की मांग उनके ही समर्थक ने की. यह डरी हुई काग्रेंस की सरकार है जिसने विधेयक पर ग़ैर-ज़रूरी वोटिंग करा कर अपनी पीठ थपथपाने का काम किया है."

उन्होंने आगे कहा कि यह न विश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग थी और न ही अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग थी.

हालांकि दोनों विधायकों के भविष्य के बारे में बीजेपी प्रवक्ता ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहले से ही तय था इसमें कुछ भी नया नहीं है.

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गिरिजा शंकर ने कहा, "प्रदेश में बीजेपी के ना अध्यक्ष का अता-पता है, न नेता प्रतिपक्ष का अता-पता है और न ही संगठन मंत्री का अता-पता है. जो कुछ कर सकता है उसे पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है."

वह कहते हैं कि जब माई-बाप ही नहीं बचेगा तो पार्टी के लोग इधर-उधर तो जाएंगे ही.

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कहा था कि मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार अगर गिरती है तो इसमें बीजेपी का कोई रोल नहीं होगा क्योंकि उनकी आतंरिक कलह और फूट इसके लिए ज़िम्मेदार होगी.

प्रदेश में 230 विधानसभा सीटों में से काग्रेंस के पास 114 विधायक हैं. वही सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से उसका आकड़ा 121 पर पहुंचता है. लेकिन दोऔर विधायकों के शामिल हो जाने से अब वह बेहतर स्थिती में नज़र आ रही है. बीजेपी के पास 108 विधायक थे.

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