जब एक एमपी के साथ हुआ यौन दुर्व्यवहार

  • 26 जुलाई 2019
डेरेक ओ ब्रायन, पोक्सो एक्ट
Image caption डेरेक ओ ब्रायन

यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2019 बुधवार को राज्यसभा में पास कर दिया गया.

इस विधेयक पर चर्चा के दौरान तृणमूल सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने न सिर्फ़ विधेयक का समर्थन किया बल्कि आपबीती भी बताई.

उन्होंने बताया कि किस तरह वो भी 13 साल की उम्र में यौन दुर्व्यवहार के शिकार हुए थे और कई सालों तक इस पर बात तक नहीं कर पाए थे.

डेरेक ओ ब्रायन ने राज्यसभा में कहा, ''ये बहुत साफ़ है कि यौन शोषण कहां शुरू होता है, इसकी शुरूआत घर से होती है. लोगों को इस पर खुलकर बात करने और एक चर्चा शुरू करने की ज़रूरत है. पब्लिक लाइफ़ में शामिल जितने लोग इस शोषण पर बोलेंगे, बच्चों के लिए अपनी बात कहना उतना आसान हो जाएगा.''

''सर मैं इसी के बारे में बोलना चाहता हूं, बहुत गर्व, दुख और तकलीफ़ के साथ, मैं बताना चाहता हूं- मेरा परिवार इस बारे में जानता है और मुझे लगता है कि भारत को भी इस बारे में जानने की ज़रूरत है- 13 साल की उम्र में कोलकाता में एक बस में मेरे साथ भी यौन दुर्व्यवहार हुआ था.''

''मैं टेनिस की प्रैक्टिस से लौट रहा था और मैंने हाफ़ पैंट व टी-शर्ट पहना था. मैं एक भीड़ भरी बस में चढ़ा और एक आदमी ने मेरे साथ यौन दुर्व्यवहार किया. मैंने इस बारे में किसी से कुछ नहीं बोला. हमें लोगों तक ये बात पहुंचाने के लिए इस मंच का इस्तेमाल करने की ज़रूरत है. जितना हम इस पर बात करेंगे, उतना ही बच्चे सुरक्षित होंगे. उन्होंने कहा कि ये सज़ा के बारे में नहीं है बल्कि इसे रोकने के बारे में है. इसलिए इस अपराध के बारे में बात करने से इन्हें रोकने में मदद मिलेगी.''

महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने डेरेक ओ ब्रायन के इस बयान की तारीफ़ की.

स्मृति ईरानी ने कहा, ''एक सांसद ने 13 साल की उम्र में जो झेला उसे 46 साल की उम्र में बताया. ये दिखाता है कि यौन दुर्व्यवहार बच्चों पर कैसा असर डालता है.''

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Image caption स्मृति ईरानी

बनेंगे एक हज़ार नए कोर्ट

इससे पहले स्मृति ईरानी ने राज्यसभा में संशोधन विधेयक पेश करते हुए ये भी बताया, ''पॉक्सो क़ानून के तहत दर्ज मामले और यौन उत्पीड़न के अन्य मामलों के निपटान के लिए सरकार ने कम से कम 1023 फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की अनुमति दी है, ख़ासतौर पर महिलाओं के लिए. देश में ऐसे एक लाख से ज़्यादा मामले लंबित हैं और 18 राज्यों ने कोर्ट बनाने पर सहमति जताई है. सरकार ने इसके लिए 767 करोड़ के ख़र्च की मंज़ूरी दी है जिसमें 474 करोड़ रुपये का ख़र्च केंद्र सरकार उठाएगी. इन्हें 2021 तक बनाने का लक्ष्य है.''

राज्यसभा में पेश हुए पोक्सो (संशोधन) विधेयक, 2019 का कई विपक्षी दलों ने समर्थन भी किया. इस विधेयक में सबसे बड़ा बदलाव ये है कि अब बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के लिए मौत की सज़ा का प्रावधान भी किया गया है.

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क्या-क्या हैं बदलाव

बच्चों और किशोरों को यौन अपराधों से बचाने के लिए 2012 में पॉक्सो क़ानून बनाया गया था. इसमें 18 वर्ष से कम आयु के किशोर और बच्चों के ख़िलाफ़ यौन अपराध के दोषी को कड़ी सज़ा देने का प्रावधान किया गया था.

केंद्र सरकार ने बच्चों के ख़िलाफ़ यौन अपराध की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के मक़सद से यह संशोधन किया है.

अपराधियों को सख्त सज़ा देने के लिए पॉक्सो क़ानून 2012 की धारा 4, 5, 6, 9, 14, 15 और 42 में संशोधन किया गया है.

विधेयक में किए गए संशोधनों के मुताबिक़ अब बच्चों के साथ यौन शोषण के मामलों में भी मौत की सज़ा दी जा सकती है. बच्चों के साथ यौन अपराध के गंभीर मामलों में 20 साल से लेकर आजीवन कारावास और मृत्युदंड की सज़ा का प्रावधान किया गया है. साथी ही अपराधी पर जुर्माना भी लगाया जाएगा.

इनमें प्राकृतिक आपदा के दौरान किए गए उत्पीड़न और बच्चे को समयपूर्व लैंगिक परिपक्वता के लिए हार्मोन या केमिकल देना भी शामिल है.

चाइल्ड पॉर्नोग्राफी के लिए बच्चों का इस्तेमाल करने के लिए पांच साल सज़ा और जुर्माना लगेगा. कोई दोबारा इस तरह के अपराध में लिप्त पाया जाता है तो सात साल की सज़ा और जुर्माना लगाया जाएगा.

साथ ही पॉर्नोग्राफ़ी के दायरे को बढ़ाते हुए इसमें वीडियो के अलावा फोटोग्राफ, वीडियो और कंप्यूटर से बनाई गईं तस्वीरें भी शामिल की गई हैं. ऐसी कोई सामग्री मिलने पर 5000 रुपये जुर्मान लगेगा.

अगर इसका इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्य से किया जाता है तो कम से कम तीन साल की सज़ा दी जाएगी जिसे पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब पिछले साल आपराधिक क़ानून (संशोधन) बिल पर चर्चा हुई थी तो उसके जेंडर न्यूट्रल न होने पर सवाल उठे थे. लेकिन पॉक्सो क़ानून में बदलाव के साथ इस क़ानून को जेंडर न्यूट्रल करने की कोशिश की गई है.

आपराधिक क़ानून (संशोधन) बिल में 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ रेप के अपराध में मृत्युदंड का प्रावधान किया गया था.

स्मृति ईरान ने राज्यसभा में ये भी बताया कि पिछले साल गृह मंत्रालय ने यौन अपराधियों का एक राष्ट्रीय डाटा बेस लॉन्च किया था. इसमें छह लाख 20 हज़ार यौन अपराधियों का डाटा है. ऐसे व्यक्ति जब नौकरी के लिए जाते हैं तो उनका संस्थान पुलिस के पास सत्यापन के लिए उनकी जानकारी भेजता है. तब ये डाटा उन्हें पहचानने में मदद करता है.

नेशनल क्राइम ब्यूरो के 2016 के आंकड़ों के मुताबिक़ पॉक्सो एक्ट के तहत एक साल में कुल 36022 मामले दर्ज हुए थे जिनमें 36321 पीड़ितों की संख्या थी.

इसी तरह बच्चों के साथ रेप के 19765 मामले दर्ज हुए थे. बच्चों के यौन उत्पीड़न के 934 मामले और पॉर्नोग्राफी में बच्चों के इस्तेमाल या चाइल्ड पॉर्नोग्राफी संबंधी सामग्री रखने के 47 मामले दर्ज किए गए.

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