अमरीका में डूबती Netflix की नैया क्या भारत बचा पाएगा

  • 31 जुलाई 2019
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वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म नेटफ़्लिक्स ने भारतीय यूज़र्स के लिए अपना सस्ता 'मोबाइल-ओनली' प्लान लॉन्च किया है.

नेटफ़्लिक्स अमरीका में हज़ारों सब्सक्राइबर खो चुका है. लेकिन सवाल ये है कि क्या अब नेटफ़्लिक्स भारत से अपने वित्तीय संकट को उबार सकता है.

बतौर मनोरंजन पत्रकार रोहित खिलानी बॉलीवुड और टीवी जगत ने कई टीवी स्टार को देखा है, लेकिन जब साल 2017 में हॉलीवुड स्टार ब्रैड पिट मुंबई अपनी फ़िल्म के प्रमोशन में पहुंचे तो लगा कि अमरीकी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री भारत को लेकर एक्शन में है.

पिट पहले अमरीकी स्टार हैं जो भारत ख़ुद अपनी फ़िल्म को प्रमोट करने आए. इसके बाद क्रिश्चिन बेल और विल स्मिथ भी भारत आए. महत्वपूर्ण बात ये है कि ये स्टार किसी बड़े प्रोडक्शन हाउस जैसे- वार्नर ब्रदर्स या सोनी के लिए नहीं बल्कि नेटफ़्लिक्स के लिए आए थे.

कैलिफ़ोर्निया की इस वीडियो स्ट्रीमिंग कंपनी ने भारत पर फ़ोकस बढ़ाने की दिशा में एक और क़दम बढ़ाया है और 199 रुपये प्रति माह कीमत वाला 'मोबाइल ओनली' प्लान उतारा है और नेटफ़्लिक्स ने ये क़दम तब उठाया गया है जब उसने अपने ही देश में 1 लाख 26 हज़ार सब्सक्राइबर खो दिए हैं.

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भारत बड़ा बाज़ार

भारत में नेटफ़्लिक्स ने कई बड़े निवेश किए हैं कई हिट ओरिजनल सीरीज़ बनाई है, जैसे- सेक्रेड गेम, चॉपस्टिक, लस्ट स्टोरीज़ और घोल.

इसके बावजूद भारत में अब तक नेटफ्लिक्स अपने पांव उस हद तक नहीं पसार सका जिसकी उसे उम्मीद थी.

133 करोड़ आबादी वाले देश में नेटफ्लिक्स के पास केवल 40 से 60 लाख ही कस्टमर हैं. वहीं, कंसल्टिंग फर्म रेडशीर के मुताबिक भारतीय वीडियो स्ट्रीमिंग कंपनी हॉटस्टार के मासिक एक्टिव यूज़र्स की तादाद 30 करोड़ है.

कंसल्टिंग फ़र्म पीडब्लूसी के साझेदार राजीब बसु कहते हैं, ''भारत एक प्राइस सेंसेटिव मार्केट है, नेटफ्लिक्स ने एक सीमित वर्ग को ही टारगेट किया है जो शिक्षित और थोड़े कुलीन परिवार से है. जो इंटरनेशनल कंटेंट की समझ रखते हैं. नेटफ्लिक्स के भारतीय कंटेंट भी हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों ही भाषाओं में आते हैं.''

''भारत एक ऐसा देश है जो सस्ते केबल कनेक्शन और डेटा प्लान के लिए जाना जाता है. लेकिन इन सबके बीच नेटफ्लिक्स को लगता है कि लोग उसके कंटेंट को समझेंगे और इसके लिए पैसे भी देंगे.''

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भारत में नेटफ्लिक्स के दो बड़े प्रतिद्वंदी, हॉटस्टार और एमेज़न प्राइम कस्टमर्स को कई तरीकों से लुभाते हैं. जैसे हॉटस्टार लाइव क्रिकेट से जुड़े ऑफ़र देता है तो एमेज़न प्राइम में ग्राहकों को फ़्री डिलीवरी दी जाती है.

इसके अलावा इस क्षेत्र में कई छोटे खिलाड़ी भी हैं जिनको कई टेलीकॉम कंपनियां बंडल ऑफ़र में फ़्री देती हैं.

लेकिन उत्तरी अमरीका और यूरोप से अलग भारत एक ऐसा बाज़ार है जिसमें कई संभावनाएं हैं और नए- ओरिजनल कंटेंट की खपत को लेकर भी बड़ी गुंजाइश नज़र आती है.

कंसल्टिंग फ़र्म ईवाई के मुताबिक पिछले साल में डिजिटल सब्सक्रिप्शन में 262% का इज़ाफ़ा हुआ है. यानी 205 मिलियन डॉलर का व्यापार इस इंडस्ट्री में हो चुका है. ये उछाल ज़्यादातर वीडियो प्लेटफॉर्म के कारण ही हुआ है.

5जी के आने से आंकड़े और तेज़ी से बढ़ेंगे. ये बाज़ार इस वक़्त नए खिलाड़ियों के लिए भी उपयुक्त है.

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कंसल्टिंग कंपनी बीसीजी के मुताबिक हर भारतीय औसतन 4.6 घंटे मीडिया देखने में लगा रहा है, जिसमें टीवी, डिजिटल और रेडियो शामिल है. ये आंकड़े अमरीका से काफ़ी पीछे हैं जहां लोग औसतन 11.8 घंटे बिताते हैं.

बसु कहते हैं, ''अब नेटफ्लिक्स टू और थ्री टियर शहरों पर अपना फ़ोकस बढ़ाने वाली है. जहां हाई स्पीड ब्रॉडबैंड और केबल टीवी तो नहीं है लेकिन स्मार्टफोन सबके हाथों में है.''

''लोगों तक पहुंचने के लिए नेटफ्लिक्स को सेक्रेड गेम जैसे शो के साथ आना होगा और ज़रूरी है कि क्षेत्रीय भाषा में अब कंटेंट लाना होगा.''

रोहित खिलानी कहते हैं अपने विस्तार को बढ़ाने के लिए अब नेटफ्लिक्स को गांवों और कस्बों में पकड़ बनानी होगी और ये तभी संभव है जब मोबाइल को ध्यान में रखकर प्लान उतारे जाते हैं.

लेकिन ये ख़ास बात है कि ऐसे इलाक़ों में रहने वाले सीमित बजट और सीमित स्टोरेज वाले फोन के साथ आते हैं, ऐसे में वो ऐसे कस्टमर नहीं होंगे जो कई सब्सक्रिप्शन लें और यही तय करेगा कि इस इंडस्ट्री का लीडर कौन बनता है.

ध्यान देने वाली बात होगी अगर नियामक इसमें शामिल हो जाता है तो नेटफ्लिक्स की शानदार योजनाएं घाटे का सौदा साबित हो सकता है.

हाल ही में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) भारत में टीवी सब्सक्राइबर को केवल उन चैनलों के लिए भुगतान करना होता है जिसे वे देखना चाहते हैं. यदि स्ट्रीमिंग बाज़ार में ऐसा होता है तो ग्राहकों को मंथली पैकेज के बजाय कुछ खास शो के लिए बहुत कम रुपयों का भुगतान करना पड़ सकता है.

नेटफ्लिक्स ने भारत में जिस दर से निवेश बढ़ाया है उतना किसी दूसरे बाज़ार में नहीं देखा गया है. इस वक़्त नेटफ्लिक्स के पास 13 नई फिल्में और नौ नई सीरीज़ पर काम जारी है.

भारत में सीरीज़ की प्रोडक्शन कीमत अमरीका के मुकाबले बेहद कम पड़ती है, अगर भारत में नेटफ्लिक्स सफल होता है तो वह उसे अपने घरेलू बाज़ार अमरीका में भी मज़बूत होगा. हालांकि, अमरीका में उसकी कड़ी टक्कर डिज़नी और एचबीओ से है.

अगर ये खिलाड़ी भारत का रुख़ करते हैं तो नेटफ्लिक्स के लिए ये कड़ी प्रतिस्पर्धा वाला बाज़ार बन जाएगा.

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