तीन तलाक़ विधेयक राज्यसभा से भी पारित

  • 30 जुलाई 2019
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लोकसभा में पारित होने के बाद तीन तलाक़ विधेयक राज्यसभा में भी पारित हो गया है. विधेयक के पक्ष में 99 और विरोध में 84 वोट पड़े.

ये विधेयक पिछले सप्ताह लोकसभा में आसानी से ध्वनिमत से पारित हो गया था मगर राज्यसभा में इसे पारित करवाना सरकार के लिए एक परीक्षा मानी जा रही थी.

लेकिन टीआरएस, जेडीयू और एआईएडीएमके के वॉकआउट करने की वजह से सरकार मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 को आसानी से पारित करवाने में कामयाब रही.

राज्यसभा में अभी 241 सदस्य हैं मगर जेडीयू और एआईएडीएमके के वॉकआउट की वजह से उपस्थित सदस्यों की संख्या घटकर 213 रह गई. ऐसे में बिल पारित करवाने के लिए 107 सदस्यों की ज़रुरत होती और राज्यसभा में एनडीए के सदस्यों की संख्या 107 ही है जिससे बिल का पारित होना तय माना जा रहा था.

दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा जिसके बाद ये क़ानून बन जाएगा.

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बहस

मंगलवार को तीन तलाक़ विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया. बहस के लिए चार घंटे का समय निर्धारित किया गया था और उसके बाद वोटिंग होनी थी.

विधेयक के पक्ष में बहस करते हुए क़ानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने इस क़ानून को महिलाओं की गरिमा के लिए ज़रूरी बताया.

उन्होंने बिल को पेश करते हुए इसे 'महिला सशक्तीकरण और लैंगिक समानता' सुनिश्चित करने वाला बताया.

विधेयक पर चर्चा के दौरान एनसीपी नेता माजिद मेनन ने कहा कि इसमें पति को तीन साल की सज़ा का प्रावधान हटाया जाए. उन्होंने इस विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने की मांग की.

इस विधेयक को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने पर हुई वोटिंग में पक्ष में 84 जबकि विरोध में 100 वोट पड़े.

टीआरएस और जेडीयू ने भी वोटिंग के दौरान ग़ैरहाज़िर रहने का फैसला किया था. जबकि बीजेडी ने इस बिल का समर्थन करने का मन बनाया था.

लेकिन एआईएडीएमके के राज्य सभा में नेता नवनीतकृष्णन ने समाचार एजेंसी एएनएई को बताया कि उनकी पार्टी इस विधेयक के विरोध में है इसलिए वोटिंग के समय वो वॉक आउट कर जाएंगे.

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बहस में हिस्सा लेते हुए विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा, "ये बिल शादी में अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए लाया जा रहा है लेकिन इसका असल मक़सद परिवारों का विनाश है."

उन्होंने कहा कि 'ये क़ानून राजनीति से प्रेरित है ताकि अल्पसंख्यक आपस में भी उलझ जाएं. पति और पत्नी एक दूसरे के ख़िलाफ़ वकील करें और उनकी फ़ीस देने के लिए ज़मीनें बिक जाएंगे. जबतक जेल की सज़ा पूरी होगी, वे कंगाल हो चुके होंगे. जब वे जेल से बाहर आएंगे वो या तो आत्महत्या कर लेंगे या डाकू और चोर बन जाएंगे. आपके बिल की यही मंशा है.'

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