पांच राज्यों में बाढ़ का कहर, केरल में 72 की मौत

  • 12 अगस्त 2019
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"उस दिन दोपहर में भारी बारिश हो रही थी, मेरी पत्नी ने कहा कि हमें सुरक्षित जगह चलना चाहिए. मैं जगह तलाशने बाहर निकला. मुझे एक ठिकाना मिला जिसकी चाबी लेने के लिए मैं अपने घर से बाहर गया. लेकिन आधे घंटे के बाद जब मैं वापस लौटा तो मेरी पत्नी श्याला नहीं मिलीं."

ये शब्द हैं केरल की बाढ़ में अपने परिवार को खोने वाले शख़्स लॉरेंस के.

लॉरेंस इस समय अपने 12 साल के बेटे लिंटो के साथ वायनाड के मेप्पडी हायर सेकेंडरी स्कूल में बनाए गए अस्थायी राहत शिविर में दूसरे तमाम बाढ़ पीड़ितों के साथ मौजूद हैं.

बीते 8 अगस्त को वायनाड में पच्चाकाडुमला नाम का पहाड़ धसकने की वजह से कई लोग मलबे में फंस गए थे.

रविवार तक इस मलबे से 10 लोगों के शवों को निकाला गया है.

ज़िला प्रशासन के मुताबिक़, मलबे में अभी भी 8 लोगों के दबे होने की आशंका है.

मेप्पडी हायर सेकेंड्री स्कूल में बनाए गए राहत शिविर में इस समय 500 लोग मौजूद हैं.

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लेकिन ज़्यादातर लोगों की कहानियां लॉरेंस की तरह दर्द और दुख से भरी हुई हैं.

लोग एक दूसरे को ढांढ़स बंधाते हुए देखे जा सकते हैं.

एक वृद्ध महिला अजिथा बताती हैं कि इस बाढ़ में उन्होंने सब कुछ खो दिया.

इसी शिविर में शरण लेने वाली अम्बिका के माता-पिता भूस्खलन के बाद लापता हो गए थे. उनके शव दो दिन बाद मिले.

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Image caption केरल के मेपाडी में बाढ़ का पानी सामने जो कुछ आया उसे अपने साथ बहा कर ले गया. यहां हुए भूस्खलन के कारण कई जानें गई हैं.

भूस्खलन से भारी तबाही

बीबीसी संवाददाता दीप्ति बतिनी बताती हैं कि केरल में बाढ़ और भूस्खलन से भारी जनधन की हानि हुई है.

राज्य में 70 से ज़्यादा लोगों की जान जाने की ख़बर है, जबकि 58 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं.

यहां एक लाख 65 हज़ार लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है.

दिप्ती बताती हैं कि वायनाड में जितनी भी मौतें हुई हैं, उनमें से ज़्यादातार भूस्खलन से हुई हैं. मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ने की आशंका है.

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वायनाड की डिप्टी डिस्ट्रिक्ट मेडिकल ऑफ़िसर डॉ. प्रिया बताती हैं कि उनकी टीम मेप्पडी राहत शिविर में मौजूद लोगों की मदद करने की पूरी कोशिश कर रही हैं.

उन्होंने कहा, "हम राहत शिविरों में मौजूद लोगों की सेहत को प्राथमिकता दे रहे हैं. हम साफ सफाई और मेडिकल चेकअप किए जाने की व्यवस्था कर रहे हैं. हम उन लोगों का भी ध्यान रखने की कोशिश कर रहे हैं जिन्होंने अपने परिजनों को बाढ़ के चलते खो दिया है."

एर्नाकुलम, इडुकी पलक्कड़, मल्लापुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड़ में बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है.

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने ट्वीट कर कहा है, "पूरे राज्य में 1318 बाढ़ राहत कैंप बनाए गए हैं. इनमें 46400 परिवारों ने शरण ली है."

मुख्यमंत्री के अनुसार, आठ ज़िलों में तीन दिन में 80 भूस्खलन हुए हैं. सबसे अधिक 19 मौतें मल्लापुरम ज़िले में जबकि कोझिकोड में 14 और वायनाड में 10 लोगों की मौत हुई है.

वायनाड पहुंचे राहुल गांधी

देश के आधे हिस्से में भारी बारिश के कारण सैकड़ों लोगों की मौत हुई है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को वायनाड पहुंचकर लोगों का हाल जाना.

मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "मैंने राहत शिविरों का दौरा किया है. मैंने प्रधानमंत्री मोदी से बात करके ज़रूरी मदद उपलब्ध करवाने के लिए भी कहा है. और मैं अगले कुछ दिनों तक यहीं रहूंगा."

महाराष्ट्र और गुजरात में स्थिति

महाराष्ट्र और गुजरात में भी बाढ़ की वजह से हालात भयावह बने हुए हैं.

नर्मदा नदी में उफान आने से कई इलाके जलमग्न हो गए हैं.

महाराष्ट्र में बाढ़ से पांच ज़िले प्रभावित हैं जिनमें कोल्हापुर और सांगली में सबसे गंभीर स्थिति है.

कर्नाटक में भारी बारिश के चलते महाराष्ट्र के इन इलाक़ों में बाढ़ का पानी बहुत तेज़ी से बढ़ा. लेकिन शनिवार को शोलापुर और सांगली में एक से डेढ़ फुट तक पानी कम होने से हालात में सुधार आने की उम्मीद की जा रही है.

महाराष्ट्र में मौजूद बीबीसी संवाददाता मयूरेश कन्नूर के अनुसार, "कर्नाटक की कृष्णा नदी पर अलमाटी के बांध से पानी अगर छोड़ दिया जाता है तो पानी तेज़ी से कम हो सकता है."

इस संबंध में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री से इस बारे में बात भी की है. उनका कहना है कि कर्नाटक सरकार ने उनसे मदद करने का वादा किया है.

कोल्हापुर ज़िले में एक शिरोड़ नामका इलाक़ा है जहां बाढ़ आने के बाद अभी तक राहत और बचाव कर्मी नहीं पहुंच पाए थे वहां रविवार को मदद पहुंच गई है.

लेकिन ये हालात सिर्फ महाराष्ट्र के ही नहीं हैं, बल्कि गुजरात और दक्षिण भारत के कर्नाटक में भी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है.

महाराष्ट्र से लगे गुजरात में रविवार को बारिश के कम होने से हालत में थोड़ा सुधार आया है. लेकिन अभी भी कुछ इलाकों में पानी भरा हुआ है.

यहां सौराष्ट्र और कच्छ के कुछ इलाक़े सबसे अधिक प्रभावित हैं. गोधरा में कराड नदी उफान पर है.

अहमदाबाद में मौजूद बीबीसी संवाददाता रॉक्सी गागडेकर छारा का कहना है कि अगले 24 घंटों में हालात में कुछ सुधार होने की संभावना है.

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कर्नाटक में स्थिति

कर्नाटक में पिछले 24 घंटे में बारिश कम हुई है और लेकिन अभी भी वहां कई इलाक़े पानी में डूबे हुए हैं.

बाढ़ की वजह से भारी तबाही हुई है और अधिकारियों का कहना है कि ज़िंदगी के फिर से पटरी पर लौटने में काफ़ी वक्त लग सकता है.

बंगलुरु से वरिष्ठ पत्रकार इमरान कुरैशी के अनुसार, "महाराष्ट्र और उत्तर कर्नाटक बेलगावी, बागलकोट इलाकों में बारिश कम हुई है, ये राहत की बात है."

कर्नाटक में बाढ़ के कारण राष्ट्रीय मार्ग और राजमार्ग समेत 136 सड़कों को भारी नुकसान पहुंचा है.

रविवार को गृहमंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के बाढ़ग्रस्त इलाक़ों का हवाई सर्वे किया. उनके साथ कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा भी मौजूद थे.

राज्य सरकार ने केंद्र से 3000 करोड़ रुपए तत्काल राहत पैकेज जारी करने की मांग की है.

महाराष्ट्र और कर्नाटक के पड़ोसी राज्य गोवा में भी भारी बारिश के कारण निचले इलाक़ों में पानी भर जाने से कई गांव जलमग्न हो गए.

लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है लेकिन बारिश के कम होने से जलस्तर में धीरे-धीरे कमी आ रही है.

अधिकारियों का कहना है कि राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है और इसमें एनडीआरएफ़ की टीम के साथ सेना और एयरफ़ोर्स के हेलिकॉप्टरों की भी मदद ली जा रही है. बाढ़ के कारण कई ट्रेनें भी रद्द की गई हैं.

महाराष्ट्र में हेलिकॉप्टर से 1700 किलोग्राम राहत सामग्री प्रभावित लोगों तक पहुंचाई गई है.

मानसून के कमज़ोर होने के साथ हालात में तेज़ी से सुधार आने की संभावना है.

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