मुकेश अंबानी की रिलायंस में सऊदी की अरामको करेगी अरबों डॉलर का निवेश

  • 12 अगस्त 2019
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रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने सोमवार को 42वें एजीएम यानी एनुअल जेनरल मीटिंग में घोषणा की है कि सऊदी अरब की जानी-मानी कंपनी अरामको आरआईएल ऑइल-टु-केमिकल करोबार के 20 फ़ीसदी शेयर लेगी.

इस कंपनी का कुल मूल्य 75 अरब डॉलर है. मुकेश अंबानी ने कहा अभी नियामक एजेंसियों से मुहर लगनी बाक़ी है.

मुकेश अंबानी ने कहा, ''मुझे यह घोषणा करते हुए बेहद ख़ुशी हो रही है कि रिलायंस के इतिहास में सबसे बड़ा विदेशी निवेश को लेकर सहमति बनी है. रिलायंस और सऊदी की अरामको लंबे समय की साझेदारी पर सहमत हुए हैं.''

आरआईएल ऑइल-टु-केमिकल कारोबार का राजस्व पाँच लाख करोड़ रुपए से ज़्यादा का है. रिलायंस इंडस्ट्रीज का जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्पलेक्स है, जिसकी उत्पादन क्षमता प्रति दिन 14 लाख बैरल है.

अंबानी ने ये बातें शेयरधारकों को संबोधित करते हुए कहीं. अरामको पाँच लाख बैरल तेल हर दिन रिलायंस के जामनगर रिफ़ाइनरी में भेजेगी. कहा जा रहा है कि यह भारत में विदेशी निवेश की सबसे बड़ी डील है.

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सऊदी अरब की विशाल तेल कंपनी आरामको की कमाई लंबे समय से एक रहस्य बनी हुई थी. यहां की सरकार हमेशा इसे छुपाकर रखती थी.

लेकिन इसी साल अप्रैल में आरामको ने रहस्य से पर्दा हटाया और कहा कि पिछले साल उसे 111.1 अरब डॉलर का मुनाफ़ा हुआ. कहा जा रहा था कि यह किसी भी एक कंपनी की सबसे बड़ी कमाई है.

2018 में एप्पल की कमाई 59.5 अरब डॉलर थी. इसके साथ ही अन्य तेल कंपनियां रॉयल डच शेल और एक्सोन मोबिल भी इस रेस में बहुत पीछे हैं. आरामको ने अपनी कमाई को सार्वजनिक कर यह बता दिया था कि उसकी क्षमता क्या है.

आरामको की ओर से वित्तीय आँकड़ा जारी करना बॉन्ड बेचकर 15 अरब डॉलर की पूंजी जुटाने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा था.

संपत्ति सार्वजनिक करने के बाद कहा जा रहा था कि आरामको और सऊदी अरब पूंजी जुटाने के लिए और आक्रामक रुख़ अपना सकते हैं. सऊदी अरब तेल और गैस पर राजस्व की निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहा है.

आरामको को इन पैसों से सऊदी अरब के स्वामित्व वाली पेट्रोकेमिकल कंपनी को ख़रीदने में मदद मिलेगी. इस पेट्रोकेमिकल कंपनी के चेयरमैन क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान हैं और यह सौदा 69 अरब डॉलर का है.

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क्राउन प्रिंस सलमान चाहते हैं कि सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में विविधता हो और तेल पर से निर्भरता कम हो. सऊदी अरब टेक्नॉलजी कंपनियों में भी निवेश कर रहा है.

इसी के तहत सऊदी ने ऊबर और टेस्ला में निवेश किया है. आरामको की योजना अपने शेयर बेचने की भी है ताकि और पूंजी जुटाई जा सके. हालांकि इस योजना को पिछले साल रोक दिया गया था.

सऊदी बेसिक इंडस्ट्रीज़ और पेट्रोकेमिकल कंपनी के शेयरों को बेच सऊदी अरब ने फ़ंड जुटाने का वैकल्पिक मार्ग तैयार किया है.

क्राउन प्रिंस नए निवेशों की ओर देख रहे हैं ताकि पिछले साल सऊदी मूल के पत्रकार जमाल ख़ाशोग्जी की हत्या में सऊदी की भूमिका सार्वजनिक होने के बाद से पैदा हुई अलगाव की स्थिति के असर को कम किया जा सके.

आरामको ख़ुद ही एक बड़ा ऊर्जा उत्पादक बनना चाहती है और ऐसे में सरकार इसके कुछ शेयर को बेचने का फ़ैसला करती है तो यह उसके हक़ में जाएगा.

आरामको के चीफ़ एग्जेक्युटिव अमीन नासीर ने कहा है कि कंपनी गैस सेक्टर में अधिग्रहण करना चाहती है ताकि तेल की तरह गैस में भी वो बादशाह बन सके.

आरामको की कमाई से यह बात भी स्पष्ट हो गई है कि इसका भविष्य तेल की क़ीमतों में उछाल और गिरावट पर निर्भर है. 2016 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब तेल की क़ीमत कम थी तब आरामको ने कहा था कि उसकी कमाई महज़ 13 अरब डॉलर हुई थी.

हालांकि निवेशकों के लिए आरामको और सऊदी का रिश्ता हमेशा के एक गंभीर मुद्दा रहा है. कंसल्टिंग फ़र्म यूरेशिया ग्रुप के एनालिस्ट अयहाम कामेल ने हाल ही में एक क्लाइंट नोट में लिखा था, ''एक्सोन और शेवरोन से अलग आरामको का राजस्व पूरी तरह से एक देश पर निर्भर है और यही इसकी स्थिरता के लिए ख़तरनाक है.''

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हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि सोमवार को आरामको की वित्तीय सूचना जारी हुई तो पता चला कि इसके पास बेशुमार क्षमता है और कई कंपनियों को अधिग्रहित करने की ताक़त है. सोमवार को मूडी इन्वेस्टर सर्विस के प्रबंधक डेविड जी स्टैपल्स ने कहा कि अरामको के पास बेशुमार पूंजी है.

स्टैपल्स और उनके सहकर्मी रेहान अकबर का कहना है कि कंपनी ने बिना किसी क़र्ज़ या बिना शेयर बेचे इतनी बड़ी कमाई की है.

2018 में अरामको ने सऊदी की सरकार को 160 अरब डॉलर की रक़म दी थी. मूडी का कहना है कि अरामको की कमाई तेल के ज़्यादा उत्पादन से हुई है. आरामको के पास दुनिया के कुछ बड़े तेल क्षेत्र हैं और बहुत ही कम क़ीमत में मिले हैं.

आरामको की इस वित्तीय सूचना आने के बाद सऊदी अरब के बड़े तेल क्षेत्रों की भी जानकारी सामने आई है. सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से में घवार सबसे बड़ा तेल क्षेत्र है. यह 193 किलोमीटर का है. घवार में सऊदी अरब के कुल तेल भंडार का आधा हिस्सा है. अब भी यहां 48 अरब बैरल तेल है.

आरामको तेल कंपनी के पांच फ़ीसदी शेयर को बेचने की योजना थी. इसे अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ कहा जा रहा था.

आरामको का आईपीओ मोहम्मद बिन सलमान के विजन 2030 के उस प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसके तहत वो सऊदी को तेल पर निर्भरता वाली अर्थव्यवस्था से बाहर निकालना चाहते हैं. सऊदी में अरामको शाही परिवार के लिए एक तेल कंपनी से ज़्यादा मायने रखती रही है.

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इस कंपनी की स्थापना अमरीकी तेल कंपनी ने की थी. आरामको यानी 'अरबी अमरीकन ऑइल कंपनी' का सऊदी ने 1970 के दशक में राष्ट्रीयकरण कर दिया था.

सोमवार आरामको की कमाई की सूचना आई तो उस आधार पर विश्लेषकों का कहना है कि यह एक से डेढ़ ट्रिलियन डॉलर की कंपनी है. हालांकि क्राउन प्रिंस सलमान चाहते हैं कि आरामको दो ट्रिलियन डॉलर की कंपनी बने. भारत की अर्थव्यवस्था पाँच ट्रिलियन डॉलर की है.

कहा जा रहा है कि आरामको को लेकर किंग सलमान और क्राउन प्रिंस मोहम्मद-बिन सलमान के बीच मतभेद था इसलिए क्राउन प्रिंस चाहकर भी इसकी लिस्टिंग नहीं करवा पाए. क्राउन प्रिंस इसका पाँच फ़ीसदी शेयर बेचना चाहते हैं लेकिन किंग सलमान इससे सहमत नहीं हैं.

दुनिया भर के मीडिया में ये बात कही जा रही है कि सलमान का यह फ़ैसला थोपने जैसा था. इस कंपनी के आईपीओ के साथ कई दिक़्क़तें जुड़ी हुई हैं.

पब्लिक लिस्टिंग के लिए निगरानी और कई चीज़ें सार्वजनिक करने की ज़रूरत पड़ेगी. इसके साथ ही अमरीका में 9/11 के आतंकवादी हमले में सऊदी से फंडिंग के आरोप का मामला भी आईपीओ को लेकर तुल पकड़ सकता था.

1980 से सऊदी अरब के पास अरामको का स्वामित्व है. 1982 से कंपनी के पास तेल भंडार के फील्ड को लेकर जो जानकारी होती थी, उसे गोपनीय बना दिया गया.

अगर आरामको शेयर बाज़ार में लिस्टिंग के नियमों का पालन करती है तो उसे तेल भंडार के बारे में जानकारी को साझा करना होगा.

हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि आरामको के शेयर बाज़ार में आने के बाद भी ज़्यादा पारदर्शिता की उम्मीद नहीं की जा सकती है.

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