JIO FIBER: क्या इसके आने से डिजिटल बाज़ार में मोनोपोली का ख़तरा बढ़ जाएगाः नज़रिया

  • 13 अगस्त 2019
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रिलायंस ने अपनी 42वीं वार्षिक आम सभा में कई घोषणाएं की. मुंबई के बिड़ला मातोश्री सभागार में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कंपनी की महत्वकांक्षी योजना जियो फाइबर के बारे में भी बताया.

कंपनी का मुख्य लक्ष्य देश में फाइबर इंटरनेट की दुनिया में बड़ा बदलाव लाने का है. कंपनी ने पहले इसे जियो गीगा फाइबर का नाम दिया था, अब इसका नाम बदल कर जियो फाइबर कर दिया गया है.

इसके तहत घरों तक फाइबर इंटरनेट की पहुंच बनाई जाएगी. इसके तहत कस्टमर को 100 MBPS से लेकर 1 GBPS तक की स्पीड उपलब्ध कराई जाएगी.

साथ ही टीवी सेटअप बॉक्स दिया जाएगा और लैंडलाइन कनेक्शन भी मिलेगा. सेटअप बॉक्स को जियो फाइबर से जोड़ा जा सकेगा और टीवी पर न सिर्फ़ पारंपरिक चैनल बल्कि नेटफ्लिक्स, अमेजन, जियो सिनेमा जैसे ऐप का भी दर्शक लुत्फ उठा सकेंगे.

साथ ही लैंडलाइन फोन से अनलिमिटेड कॉल भी कर सकेंगे. इतना ही नहीं अब कंपनी की नज़र इंटरनेशनल कॉल्स पर है. एजीएम मीटिंग में यह घोषणा की गई कि 500 रुपए महीने देकर उपभोक्ता अमरीका और कनाडा अनलिमिटेड कॉल कर सकेंगे.

एजीएम में कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने बताया कि पिछले साल देश के 1600 शहरों के पांच लाख घरों में जियो फाइबर इंस्टॉल किए गए थे और कंपनी का लक्ष्य दो करोड़ घरों तक पहुंचने का है.

कंपनी का यह भी दावा है कि जियो फाइबर के लिए करीब 15. करोड़ उपभोक्ता रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं. मुकेश अंबानी ने जियो फाइबर प्लान की भी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इसके लिए 700 रुपए से लेकर 10 हज़ार रुपए महीने तक का प्लान होगा.

कंपनी जियो के तीसरे वर्षगांठ पर 5 सितंबर को जियो फाइबर का कॉमर्शियल लॉन्चिंग करेगी.

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ब्रॉडबैंड सर्विस में आएगा बदलाव

कंपनी की इस घोषणा के बाद यह कहा जा सकता है कि यह देश की ब्रॉडबैंड की दुनिया बदल देगी. न सिर्फ़ ब्रॉडबैंड बल्कि इससे टीवी इंडस्ट्री, फिक्स्ड लाइन टेलीफोन इंडस्ट्री, ऑनलाइन इंटरनेटमेंट और बाद में ई-कॉर्मस इंडस्ट्री में भी बदलाव आएगा.

रिलायंस एक बड़ी और महत्वाकांक्षी कंपनी है. उनके पास सभी तरह के संसाधन है, जिससे वो अपने लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं.

याद कीजिए जियो ने तीन साल पहले जब टेलीकॉम इंडस्ट्री में कदम रखा था तो उसकी क्या हैसियत थी और आज उसकी क्या हैसियत है. यह यह भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी बन गई है, जिसके पास 34 करोड़ उपभोक्ता है.

टेलीकॉम इंडस्ट्री में इसके आने के बाद पहले से स्थापित कई टेलीकॉम कंपनियां इस बाजार से बाहर हो गई. मसलन, यूनिनॉर, एयरसेल, एमटीएस, रिलायंस कम्यूनिकेशन जैसी कंपनियां डूब गईं. आइडिया और वोडाफ़ोन जैसी कंपनियों को साथ आना पड़ा.

कितना आसान होगा

अब सवाल उठता है कि क्या जियो फोन की तरह जियो फाइबर अपनी सफलता की इबारत लिख पाएगा?

मुझे लगता है कि जियो फाइबर का विस्तार जियो फोन के मुकाबले थोड़ा मुश्किल होगा. मोबाइल का सिम बदलवा देना आसान था लेकिन घर-घर तक फाइबर केबल पहुंचाना थोड़ा मुश्किल है.

जियो फाइबर की घोषणा पिछले साल की गई थी. एक साल में यह अपनी पहुंच कितने घरों तक बना पाया है, इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि घर-घर तक फाइबर पहुंचाना कितना मुश्किल होगा.

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कितना किफायती होगी सेवा

जियो फाइबर इंटरनेट, टेलीफोन के साथ-साथ टीवी सेटअप बॉक्स की भी सुविधा देगा. यानी पहले लोग वाई-फाई, टीवी और लैंडलाइन के अलग-अलग खर्च करते थे, वो अब नहीं करना पड़ेगा.

जियो की यह स्ट्रैटजी रही है कि वो किफ़ायती दामों पर सेवाएं उपलब्ध कराता है. ऐसे में इस बात से बिल्कुल इनकार नहीं किया जा सकता है कि इसका असर DTH कंपनियों पर पड़ेगा. इतना ही नहीं बीएसएनएल जैसी कंपनियों को ख़ासा नुकसान उठाना पड़ सकता है.

जिन-जिन क्षेत्रों में बीएसएनल की सेवा है, अगर उन क्षेत्रों में जियो फाइबर अपना विस्तार करता है तो लैंडलाइन फोन के यूज़र उसकी तरफ खिसकेंगे.

बीएसएनएल अपने बुरे दौर से गुज़र रहा है. कंपनी का हाल बहुत अच्छा नहीं है, लेकिन देश में इसका विस्तार बहुत बड़ा है. ऐसे में इसके विस्तार को अगर जियो फाइबर चुनौती देती है, जो थोड़ा मुश्किल है, तो बीएसएनएल को इसका सीधा नुकसान होगा.

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ऑनलाइन स्ट्रीमिंग की दुनिया कितनी बदलेगी

जियो फाइबर टीवी पर ऐप चलाने की भी सुविधा देगा. यानी वेब सीरिज़ और शो टीवी पर भी देखे जा सकेंगे. इसका बाज़ार अभी तक कमोबेश मोबाइल पर था, जियो फाइबर के आने के बाद ऑनलाइन स्ट्रीमिंग की दुनिया में काफी बदलाव देखने को मिलेगा.

जैसे-जैसे इसका बाज़ार बढ़ेगा, बड़ी-बड़ी फ़िल्म निर्माता कंपनियां इस क्षेत्र में आएंगी. जियो फाइबर की स्पीड 1 GBPS तक होगी. अभी तक लोग 4जी की स्पीड में वेब सीरिज देखते थे. जियो फाइबर का हाई स्पीड इंटरनेट दर्शकों को हाई क्वालिटी व्यूइंग एक्सपीरियंस भी देगा. बफरिंग जैसी समस्या नहीं होगी.

मोनोपोली का ख़तरा

जियो ने टेलीकॉम सेक्टर में घुसने के साथ ही प्राइस वॉर छेड़ दिया था, जिसका असर एयरटेल, आइडिया जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों पर पड़ा.

अब जियो फाइबर के आने से डीटीएच, वाई-फाई और लैंडलाइन टेलीफोन इंडस्ट्री पर असर पड़ना मुमकिन है. आने वाले समय में कंपनी डिजिटल मार्केट पर पूरी तरह अपनी पकड़ बनाने की लक्ष्य रखती है.

ऐसे में मोनोपोली का ख़तरा बढ़ेगा. इसके लिए सरकार को सचेत रहना होगा. सरकारी नियामक ईकाइयों को उपभोक्ता के हित में उचित कदम उठाने होंगे ताकि बाजार बना रहे और उसके खिलाड़ी भी एक से ज़्यादा हों.

(बीबीसी संवाददाता अभिमन्यु कुमार साहा से बातचीत पर आधारित)

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