भारत में ऑटो इंडस्ट्री का पहिया क्यों थम गया

  • 14 अगस्त 2019
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ऑटो इंडस्ट्री में लगातार 9वें महीने गिरावट दर्ज की गई है. ब्रिकी के लिहाज़ से जुलाई का महीना बीते 18 सालों में सबसे ख़राब रहा. इस दौरान बिक्री में 31% की गिरावट दर्ज की गई.

सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबिल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के मुताबिक़ जुलाई में बीते 9 महीनों के दौरान सबसे कम 2,00,790 वाहनों की बिक्री ही हुई. इसके मुताबिक़ स्पोर्ट्स यूटिलिटी वीकल की बिक्री में 15% तो सवारी कार में 36% की गिरावट दर्ज की गई है.

सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर कहते हैं कि इस इंडस्ट्री को तुरंत एक राहत पैकेज की ज़रूरत है. उनका कहना है कि जीएसटी की दरों में अस्थायी कटौती से भी इंडस्ट्री को कुछ राहत मिल सकती है.

माथुर कहते हैं, "ऑटो इंडस्ट्री की स्थिति और बिगड़ने से रोकने के लिए उद्योग प्रतिनिधियों की सरकार के साथ हाल ही में बातचीत हुई है. हमने राहत पैकेज की मांग की. गाड़ियों पर जीएसटी की दर घटाने, स्क्रैपेज पॉलिसी लाने और वित्तीय क्षेत्र- ख़ासकर ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों- को मज़बूत करने की मांग की है."

दूसरी ओर फेडरेशन ऑफ़ ऑटोमोबिल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के मुताबिक़, इस मंदी की वजह से बीते तीन महीने में दो लाख लोगों का रोज़गार छिन गया है.

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बीते एक वर्ष के दौरान एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत में गाड़ियों की ख़रीद में भारी कमी आई है, इसकी वजह ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में क्रेडिट की कमी का होना बताया गया है.

इसकी वजह से इस दौरान देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी और टाटा मोटर्स ने अपने उत्पादन में कटौती की. लिहाजा हज़ारों की संख्या में नौकरियां भी ख़त्म हुई हैं. इनकी वजह से ऑटो इंडस्ट्री अपने सबसे बड़ी गिरावट के दौर में पहुंच गई है.

घरेलू बाज़ार में 51 फ़ीसदी हिस्सा रखने वाली मारुति सुज़ुकी ने जनवरी में 1.42 लाख कारें बेचीं. लेकिन छह महीने में ही 31% की गिरावट आ गई और जुलाई में उसकी सिर्फ़ 98,210 कारें बिकीं.

घरेलू बाज़ार में दूसरी बड़ी कार निर्माता कंपनी हुंदई की बिक्री में भी ख़ासी गिरावट हुई है. हुंदई की क़रीब 45 हज़ार कारें जनवरी में बिकी थीं लेकिन जुलाई में केवल 39 हज़ार कारों की बिक्री के साथ इसमें 15% की गिरावट हो गई.

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शेयर बाज़ार में इन कंपनियों के शेयर में तेज़ गिरावट देखी गई है. जनवरी से अब तक मारुति के शेयर की क़ीमतों में 22% की गिरावट हुई है तो टाटा मोटर्स के शेयर इसी अवधि में 29% गिरे.

इनकी तुलना में मुंबई शेयर सूचकांक सेंसेक्स इस अवधि के दौरान 2.4% बढ़ा है.

मंदी की वजह से कई डीलरशिप बंद हो गए हैं, इसलिए अब इस उद्योग में जीएसटी की दरों में कटौती जैसे उपायों की मांग तेज़ हुई है.

ऑटो इंडस्ट्री के लोगों ने मांग की है कि सरकार को ऑटोमोबिइल सेक्टर में जीएसटी की दर 28% से घटाकर 18% करनी चाहिए.

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फ़रवरी से अब तक रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में लगातार चार बार कटौती की है. लेकिन इंडस्ट्री पर नज़र रखने वाले जानकारों का मानना है कि तरलता (नक़दी) की कमी को पूरा करने के लिए अभी और उपाय करने होंगे.

बीते हफ़्ते ऑटो सेक्टर के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाक़ात कर उन्हें वर्तमान हालात से अवगत कराया.

सरकार ने ऑटो इंडस्ट्री की मंदी को दूर करने के लिए परामर्श कर रही है, लेकिन अब तक इसकी मांग को लेकर किसी भी उपाय की घोषणा नहीं की है.

सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर कहते हैं कि इस महीने से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन में भी ज़्यादा छूट नहीं मिल रही है.

माथुर कहते हैं, "अप्रैल में शुरू हुए नए वित्तीय वर्ष में सियाम ने पैसेंजर वीकल की वार्षिक बिक्री में 3% से 5% तक की वृद्धि का अनुमान लगाया था. लेकिन अब मंदी को देखते हुए उन पूर्वानुमानों को संशोधित करना पड़ सकता है."

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जुलाई के महीने में मारुति कारों की बिक्री में 34% की कमी आई जो सात वर्षों के दौरान किसी एक महीने में दर्ज की गई सबसे अधिक गिरावट है. बीते वर्ष इस कार निर्माता के कारों की बिक्री में महज 4.7% का ही इजाफ़ा हुआ.

हाल ही में आई रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ कंपनी ने अपनी अस्थायी कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी है. जून के अंत तक इनकी संख्या में 6% कम हो गई है.

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दुनियाभर की कई कंपनियां उड़ने वाली टैक्सियों के कन्सेप्ट पर काम कर रही हैं

साथ ही मारुति ने उत्पादन में भी कटौती की है. इस साल के पहले छह महीनों के दौरान इसने उत्पादन में 10% से अधिक की कटौती की है.

अपने पैसेंजर वीकल की घरेलू बिक्री में 34% गिरावट दर्ज करने वाले टाटा मोटर्स ने बीते हफ़्ते कहा कि बाज़ार की वर्तमान मुश्किल परिस्थितियों के कारण महाराष्ट्र के कुछ संयंत्रों को बंद कर दिया है.

इस बीच, जुलाई के महीने में 15% गिरावट दर्ज करने वाली प्रतिद्वंद्वी कार निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा ने कहा है कि वो इस तिमाही में 14 दिनों तक उत्पादन में कटौती करेगा.

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सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़ जुलाई में सभी सेगमेंट की गाड़ियों की बिक्री में गिरावट हुई है.

26% की कमी के साथ इस दौरान महज 56,866 ट्रक और बस बिके जबकि क़रीब 15 लाख यूनिट बिक्री के साथ दोपहिया वाहनों में यह कमी 17% दर्ज की गई है.

इस मंदी का प्रभाव गाड़ियों के कलपुर्जे बनाने वाली सहायक कंपनियों पर भी हुआ है. टाटा मोटर्स और अशोक लेलैंड के लिए सस्पेंशन (शॉकर) बनाने वाली जमना ऑटो इंडस्ट्री ने कहा कि कमज़ोर मांग के चलते अगस्त में वो अपने सभी नौ उत्पादन संयंत्रों को बंद कर सकते हैं.

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इस इंडस्ट्री पर दोहरी मार तब पड़ी जब जून में बजट के दौरान ऑटो पार्ट्स पर ड्यूटी बढ़ाई गई और पेट्रोल, डीज़ल पर अतिरिक्त टैक्स लगाया गया.

सिआम के महानिदेशक विष्णु माथुर ने एक न्यूज़ पोर्टल से बातचीत में बताया कि ऑटो इंडस्ट्री ने 3.7 करोड़ से ज़्यादा लोगों को जॉब दे रखा है और अगर मंदी ख़त्म नहीं हुई तो कई नौकरियां जाएंगी.

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