लाल क़िले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो कहा उसके मायनेः नज़रिया

  • 15 अगस्त 2019
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चाहे अनुच्छेद 370 और 35-ए को निरस्त करने का ज़िक्र हो या पूरे भारत में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और नेशनल मोबिलिटी कार्ड को लागू करना हो या ट्रिपल तलाक़ का अंत कर मुसलमान महिलाओं को अन्य धर्म की महिलाओं के साथ बराबरी पर लाने के लक्ष्य को पूरा करने की बात हो, लाल क़िले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे भारत को एक धागे में पिरोता राष्ट्रवाद से प्रभावित भाषण दिया.

हालांकि इस दौरान उन्होंने कई प्रशासनिक और आर्थिक पहल को भी अपनी हरी झंडी दिखाई, जिसके दूरगामी प्रभाव होंगे.

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प्रधानमंत्री ने चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ (सीडीएस) की नियुक्ति की जो घोषणा की है वो लंबे समय से चली आ रही एक प्रशासनिक नियुक्ति है जिसकी वकालत पूर्व कैबिनेट सचिव नरेश चंद्र की अध्यक्षता वाली समिति ने 1990 में दोहराया था.

हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सीएसडी तीनों सेनाओं से जुड़े मुद्दों पर समन्वयक का काम करेगा, उन्होंने सीडीएस का मॉडल क्या होगा यह नहीं बतलाया- क्या यह वर्तमान इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ़ की महज एक औपचारिकता होगी या प्रधानमंत्री को सभी सैन्य मामलों पर सलाह देने वाला एक अंतिम बिंदु होगा जो सशस्त्र बल के भीतर अधिकार के संतुलन को बदलने में काफ़ी प्रभावी होगा.

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प्रधानमंत्री ने सशस्त्र बलों के सामने नई चुनौतियों का उल्लेख कर रहे थे. विशेषकर उन्होंने आतंकवाद की चुनौती का ज़िक्र किया. इस दौरान उन्होंने एक बार भी पाकिस्तान का नाम नहीं लिया लेकिन बाक़ी पड़ोसी देशों जैसे अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका के बारे में कहा कि पड़ोस के सभी देश किसी न किसी प्रकार के आतंकवाद का शिकार थे.

प्रधानमंत्री ने आर्थिक प्रबंधन की बात की और विकास पर जोर देते हुए कहा कि इसी के बल पर सामाजिक समता प्राप्त की जा सकती है.

उन्होंने ग़रीबों के सशक्तिकरण की दिशा में योगदान के लिए किए गए सभी उपायों जिसमें वित्तीय समावेशी योजनाएं, टॉयलेट के निर्माण, बिजली, पानी और अन्य कदमों के प्रावधानों की बात की.

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लेकिन अगर निजी उद्योग प्रधानमंत्री के भाषण में किसी प्रोत्साहन पैकेज के घोषणा या टैक्स से कुछ राहत की उम्मीद कर रहे थे तो उन्हें निराशा हुई.

इसके बजाए, प्रधानमंत्री ने यह बताते हुए कि भारत के गांवों की केवल 50 फ़ीसदी आबादी के पास ही पीने का साफ़ पानी उपलब्ध है और देश के सभी नागरिकों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था के लिए ज़रूरी सरकार व्यय (3.5 लाख करोड़ रुपये) की घोषणा और जल संरक्षण और पानी को रिसाइकल करने को लेकर योजना की घोषणा की.

लाल क़िले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 100 लाख करोड़ रुपये आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लगाए जाने की बात भी की. भारत एक गैस पर आधारित अर्थव्यवस्था होगी और एक गैस ग्रिड तैयार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि भविष्य में भारत निर्यात हब बनने जा रहा है लेकिन यह नहीं बताया कि कैसे, जबकि बीते सात महीनों (जनवरी से जुलाई 2019) के दौरान निर्यात में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 9.7 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

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पीएम मोदी ने यह भी कहा कि वेल्थ क्रिएशन को शक और संदेह की नज़रों से नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि उनका सम्मान किया जाना चाहिए.

आर्थिक प्रबंधन की दिशा में किसी ठोस घोषणा के अभाव में प्रधानमंत्री ने जो कुछ भी कहा वो बहुत महत्व रखता है.

लाल क़िले से दिए अपने भाषण में एक बार फिर उन्होंने डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने और नकदी को हतोत्साहित करने पर जोर दिया. यह देखते हुए कि सरकार डेटा से जुड़े महत्वपूर्ण क़ानूनों पर काम कर रही है और साल के अंत तक इसके घोषणा की उम्मीद है, यह घोषणा बेहद महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि कोशिश की जानी चाहिए कि भारत 2022 से पहले ही सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त देश बन जाए. खुद प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ वर्ष पहले संयुक्त राष्ट्र के सामने यह वादा किया था. भारत में अधिकांश सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पादक उद्योग बगैर दस्तावेज़ वाली कंपनियां हैं और लघु और सूक्ष्म उद्योग के तहत आती हैं, इसका पूरे उद्यम पर ख़राब असर पड़ेगा.

उन्होंने लोगों से घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की बात की- जो कि कम लागत कम बजट का पर्यटन है.

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सबसे ज़रूरी, उन्होंने इस बात को दोहराया कि बिज़नेस में कम से कम सरकारी दखल के लिए उन्होंने सैकड़ों की संख्या में क़ानूनों को समाप्त कर दिया है और आगे भी इसे सहज बनाने की दिशा में नियम कायदे में बदलाव किए जाते रहेंगे. इससे न केवल भारत में 'इज़ ऑफ़ डूइंग' बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा और विश्व पटल पर उसकी वरीयता बढ़ेगी बल्कि इज़ ऑफ़ लीविंग इंडेक्स में भी उसका रैंक बढ़ेगा.

प्रधानमंत्री मोदी ने भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद की समस्या का उल्लेख किया- जो पांच साल पहले इन प्रथाओं को समाप्त करने की उनकी घोषणा के बावजूद बदस्तूर जारी रहा.

प्रधानमंत्री ने ये नहीं कहा

प्रधानमंत्री ने जो नहीं कहा, वो भी उतना ही महत्वपूर्ण है जो उन्होंने नहीं कहा. कश्मीर के लोग बीते 10 दिनों से रोजी रोटी, पानी, खाना और संचार की सुविधाओं से वंचित हैं- वे प्रधानमंत्री के मुंह से यह सुनना चाहते थे कि उनकी यह समस्या कब तक ख़त्म होगी. उन्हें निराश हुई होगी. कश्मीर पहुंच कर उनके आंसू पोंछने की कोशिशों की जगह प्रधानमंत्री ने लाल क़िले की प्राचीर से लगातार अनुच्छेद 370 और 35ए के ख़ात्मे की बात की. प्रधानमंत्री ने कहा कि 'मेरे लिए देश का भविष्य सबसे अधिक महत्वपूर्ण है, न कि राजनीतिक हित.' कश्मीर के मुसलमानों को प्रधानमंत्री के इस दावे से निराश ज़रूर हुई होगी.

बीते पांच वर्षों के दौरान, यहां तक कि अपने लाल क़िले से दिए भाषण में भी प्रधानमंत्री क़ानून को हाथ में लेकर सड़क पर उतरने वालों (स्वयंभू सुधारकों) का ज़िक्र कर चुके हैं. आज के उनके भाषण में उनका कोई ज़िक्र नहीं था. न ही राज्य सरकारों से इस पर मजबूत कदम उठाने की कोई अपील ही की गई.

पीएम ने अपने भाषण में एक नया एजेंडा पेश किया जिसके बारे में कभी किसी ने सुना ही नहीं था- यह जनसंख्या विस्फ़ोट को लेकर काम करने की बात थी.

उनके अपने सांसदों और विधायकों के बीच यह चर्चा का विषय है कि बहुसंख्यकों की तुलना में अल्पसंख्यक तेज़ी से जनसंख्या बढ़ा रहे हैं (जो तथ्यों के अनुरूप नहीं है). प्रधानमंत्री ने धर्म से इतर जनसंख्या विस्फ़ोट पर अपनी चिंता जताई. उन्होंने कहा परिवारों को चाहिए कि वो पहले यह सोचें कि क्या वे अपने भावी बच्चों की देखभाल करने की स्थिति में हैं.

पीएम ने अपने पहले के एक बयान को भी दोहराया- एक राष्ट्र, एक चुनाव का विचार. लेकिन एक बार फिर उन्होंने यह नहीं बताया कि इसे चरितार्थ कैसे किया जाएगा.

प्रधानमंत्री ने उम्मीदों का हवाला देते हुए कहा, खास कर युवाओं और उनकी महत्वकांक्षाओं के बढ़ने की बात की. उन्होंने कहा कि भारतीयों की महत्वकांक्षाएं बहुत बढ़ गई हैं और उनकी सरकार से बहुत अधिक उम्मीद की जा रही हैं जो बेकार नहीं जाएंगी.

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