भूटान के साथ रिश्ते को भारत इतना तवज्जो क्यों देता हैः नज़रिया

  • 18 अगस्त 2019
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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूटान की दो दिवसीय यात्रा पर हैं, जहां उनका शाही स्वागत किया गया.

मोदी इन दो दिनों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए भूटान के नेताओं से बात करेंगे.

नरेंद्र मोदी ने वहां अपने संबोधन में कहा कि 130 करोड़ भारतीयों करे दिलों में भूटान एक विशेष स्थान रखता है.

"मेरे पिछले कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री के रूप में मेरी पहली यात्रा लिए भूटान का चुनाव स्वाभाविक था. इस बार भी अपने दूसरे कार्यकाल के शुरू में ही भूटान आकर मैं बहुत खुश हूं."

ऐसे में आम लोगों के मन में यह सवाल उठता होगा कि आख़िर भारत के लिए भूटान इतना महत्व क्यों रखता है?

इसका बहुत आसान सा जवाब है कि भूटान, भारत का सबसे क़रीबी दोस्त है. मुश्किलों में भी वो हमारे साथ हमेशा खड़ा रहता है.

दोनों देशों के बीच रिश्ते इतने ख़ास हैं कि भारत में एक अनौपचारिक प्रथा है कि भारतीय प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, विदेश सचिव, सेना और रॉ प्रमुख की पहली विदेश यात्रा भूटान ही होती है.

इस वक़्त प्रधानमंत्री की भूटान की औपचारिक यात्रा दोनों देशों के बीच के रिश्ते को और बेहतर करेगी.

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चीन के मद्देनजर भूटान यात्रा

चीन के लिहाज से भारतीय प्रधानमंत्री का भूटान दौरा भी ख़ास मायने रखता है.

चीन की कोशिश हमेशा से रही है कि भूटान में उसका प्रभाव बढ़े और कूटनीतिक संबंध बेहतर हों, लेकिन भूटान का साफ रुख़ यह है कि वो भारत के साथ है.

भारत के साथ भूटान के कूटनीतिक रिश्ते हैं जबकि चीन के साथ उसके इस तरह के रिश्ते भी नहीं है.

कितने अहम हैं रिश्ते

भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा जब भी ऐसे पड़ोसी देश में होती है तो द्विपक्षीय संबंध, उनका एक जायजा लेने और उसे मजबूत करने के लिए भी होती है.

एक उदाहरण के तौर पर हाइड्रो पावर उत्पादन में जो रिश्ते दोनों देशों के बीच हैं, वो बहुत ही अहम हैं और ये रिश्ते दोनों देशों के लिए ज़रूरी हैं.

दोनों देशों ने मिलकर भूटान की नदियों की शक्ति को बिजली में ही नहीं, पारस्परिक समृद्धि में भी बदला है. शनिवार को भारत और भूटान ने मांगदेछु परियोजना के उद्घाटन के साथ इस यात्रा का एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया.

दोनों देशों के सहयोग से भूटान में हाइड्रो-पावर उत्पादन क्षमता 2000 मेगावाट को पार कर गयी है.

इसके अलावा इस यात्रा के दौरान शिक्षा पर ख़ास जोर दिया जाएगा.

दर्जनों ऐसे क्षेत्र हैं जहां भूटान के साथ भारत के रिश्ते बहुत अहम हैं, इसलिए प्रधानमंत्री की भूटान यात्रा स्वाभाविक है.

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डोकलाम के बाद रिश्ते

पिछले साल डोकलाम विवाद हुआ था, चीन ने निर्माण भी शुरू कर दिया था, सेना भी तैनात कर दी गई थी. ये कहा जा रहा था कि भूटान का भारत पर जो भरोसा था वो कम हुआ है पर वास्तव में ऐसा था नहीं.

मैं समझता हूं कि भूटान जानता है कि जहां तक चीन का मसला है उसमें उसका भारत के साथ ही रहना फायदे का सौदा है.

चीन के साथ भूटान का सरहद पर फ़ैसला होना बाक़ी है. चीन के साथ भारत का भी सीमा विवाद है. ऐसे में भारत और भूटान का साथ रहना कूटनीतिक दृष्टि से फ़ायदेमंद होगा.

सीमा के मामले में दोनों देश एक क़रीबी की तरह राय-मशविरा रखते हैं. जब भी प्रधानमंत्री भूटान जाते हैं तो वहां के सभी महत्वपूर्ण लोगों के मुलाक़ात करते हैं.

भूटान में भी भारत के लिए एक ख़ास जगह है और उसको बना कर रखना भी भी हमारा दायित्व है.

(बीबीसी संवाददाता गुरप्रीत सैनी से बातचीत पर आधारित)

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