चंद्रयान-2 की लैंडिंग के गवाह बने मोदी के साथ ये बच्चे

  • 6 सितंबर 2019
चंद्रयान 2 देखने वाले बच्चे

सात सितंबर भारत के लिए एक ऐतिहासिक तारीख होने जा रही है जब चंद्रयान 2 मिशन चंद्रमा पर उतरेगा.

इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बंगलुरू में इसरो के केंद्र में मौजूद होंगे.

इस पल की गवाह बनने के लिए देश भर के 60 छात्र छात्राएं भी होंगी जिनको एक क्विज़ के बाद चुना गया है.

ऑनलाइन स्पेस क्विज़ में चयनित उत्तर प्रदेश के दो बच्चों में 10वीं की छात्रा राशि वर्मा भी हैं.

चंद्रयान की लैंडिंग देखने का मौका मिलने को लेकर ये बच्चे बेहद उत्साहित हैं.

लखनऊ की रहने वाली राशि वर्मा ने स्थानीय पत्रकार अमिता पारुल को बताया कि उन्हें स्पेस क्विज़ के बारे में स्कूल के प्रिंसिपल से पता चला.

इमेज कॉपीरइट Amita Parul/BBC
Image caption राशि वर्मा

अपने चुने जाने पर राशि को यक़ीन नहीं हो रहा. वो कहती हैं कि क्विज़ में हिस्सा लेते हुए भी उन्हें इतना यक़ीन नहीं था कि वो चंद्रयान की लैंडिंग के मौके पर मौजूद होंगी और प्रधानमंत्री मोदी से मिलना के मौका मिलेगा.

राशि का कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी उनके आदर्श हैं और जब वो उनसे मिलेंगी तो उनके फिट रहने का राज़ और उनके टाइम मैनेजमेंट को लेकर जरूर सवाल करेंगी.

इमेज कॉपीरइट iSro

राशि का कहना है, "मैं उनसे जानना चाहूंगी कि वो कैसे फ़िट रहते हैं, कैसे वो इतना सारे काम को मैनेज करते हैं. मैं उनसे पूछूंगी कि एक समय में डिफ़ेंस, इंटर्नल अफ़ेयर्स, फ़ॉरेन अफ़ेयर्स, मनी आदि कैसे इतना जल्दी और आसानी से मैनेज करते हैं."

उनके पिता राजकुमार वर्मा किसान हैं और मां सीमा देवी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं. पढ़ाई के चलते वो कक्षा पांच से ही अपनी बुआ के पास जानकीपुरम में रहती हैं.

राशि वर्मा की तरह बिहार के गया से आठवीं की क्षात्रा सौम्या शर्मा भी स्पेस क्विज़ में चुनी गई हैं.

बीबीसी संवाददाता नीरज प्रियदर्शी को सौम्या ने बताया, "मैं एक साइंटिस्ट बनना चाहती हूं. इतने करीब से चंद्रमा को देखने का मौका मिलेगा. मैं चंद्रमा को वहां पर अच्छे से समझना चाहती हूं. इसलिए ही मैंने प्रतियोगिता में भाग लिया था."

उनके पिता राजनंदन ने बताया कि उन्हें करीब एक महीना पहले प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम से इसके बारे में पता चला था और अब जब बेटी चुन ली गई है तो उन्हें गर्व इसका है.

सौम्या के पिता राजनंदन बताते हैं, "करीब एक महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में इसके बारे में बताया था. मुझे पता चला तो मैंने रिसर्च किया, इसरो की वेबसाइट से एक लिंक मिला जिसके ज़रिए अप्लाई करना था. मैंने ही सौम्या को इसके बारे में बताया और आवेदन करने को कहा."

प्रधानमंत्री से मिलने की बात पर सौम्या कहती हैं, "ये मेरा सपना था. क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री बहुत ही अच्छे हैं. उन्होंने दो-दो सर्जिकल स्ट्राइक किए. कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया. इसके अलावा उनका स्वच्छ भारत कैंपेन भी मुझे बहुत अच्छा लगता है."

सौम्या के अलावा बिहार से जो दूसरे छात्र प्रधानमंत्री के साथ बैठकर चंद्रयान की लैंडिंग देखेंगे वो हैं हर्ष प्रकाश.

हरियाणा के रोहतक से चुने गए 13 साल के अर्नव सैनी मानते हैं कि सात सितंबर का पल बहुत ऐतिहासिक होने वाला है जब चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह पर लैंड करेगा.

स्थानीय पत्रकार सत सिंह ने बताया कि 'अर्नव की मां नूतन सैनी का कहना है कि उनका बेटा इससे पहले कभी 100 किलोमीटर से दूर नहीं गया है और अब वो अपनी ज़िंदगी की पहली उड़ान दिल्ली से बेंगलुरू भरेगा. इसरो के मुख्यालय का अनुभव और मंगलयान-2 की लैंडिंग का गवाह बनना उसकी ज़िंदगी को बदल देगा.'

वो कहते हैं कि इस पल का इंतज़ार पूरे देश को है और हर भारतवासी को इस बात पर गर्व महसूस होगा.

इसरो ने कहा है कि चंद्रयान-2 सात सितंबर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा, जहां पहले कोई यान नहीं उतरा था. वैज्ञानिकों को चंद्रमा के इस हिस्से में पानी और जीवाश्म मिलने की उम्मीद है.

भारत का चाँद पर यह दूसरा मिशन है. भारत चाँद पर तब अपना मिशन भेज रहा है जब अपोलो 11 के चाँद मिशन की 50 वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है.

भारत ने इससे पहले चंद्रयान-1 2008 में लॉन्च किया था. यह भी चाँद पर पानी की खोज में निकला था.

भारत ने 1960 के दशक में अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किया था और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एजेंडे में यह काफ़ी ऊपर है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार