कश्मीर: मोहर्रम पर क्या है कश्मीर का हाल

  • 9 सितंबर 2019
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कश्मीर में पिछले महीने पाँच अगस्त को अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी होने के बाद से हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं.

10 सितंबर को मोहर्रम को देखते हुए घाटी में कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए हैं. बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर अभी श्रीनगर में हैं और उनका कहना है कि मोहर्रम पर विरोध प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं.

मोहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है. इस महीने के पहले दस दिनों तक मुसलमान इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हैं. इमाम हुसैन इस्लाम के आख़िरी पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद के नवासे थे. साल 680 में इराक़ स्थित कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन और उनके समर्थकों की उस समय के शासक यज़ीद की सेना के ख़िलाफ़ जंग हुई थी जिसमें इमाम हुसैन अपने साथियों समेत मारे गए थे. दुनिया भर के मुसलमान इस घटना की याद में मोहर्रम के महीने में मातम मनाते हैं और शोक जुलूस निकालते हैं.

मोहर्रम पर जम्मू-कश्मीर में परंपरा रही है कि मोहर्रम की आठ, नौ और 10 तारीख़ को बड़े-बड़े जुलूस निकलते थे. लोग अपने हिसाब से मातम करते हैं.

लेकिन प्रशासन ने पहले ही घर-घर जाकर कह दिया था कि धारा 144 लागू है और एक साथ चार लोगों का इकट्ठा होना मना है. रविवार को श्रीनगर के लाल चौक से एक जुलूस निकालने की कोशिश की गई थी लेकिन लोगों को भगा दिया गया.

प्रशासन ने किसी भी तरह के जुलूस को निकालने की अनुमति नहीं दी है.

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रियाज़ बताते हैं, "जब से यहां चरमपंथ शुरू हुआ है यानि 1990 से अब तक कोई भी अनुमति नहीं दी जाती थी. बड़ी सड़कों पर बड़े जुलूसों की अमुमति नहीं मिलती थी लेकिन तीस सालों में छोटे जुलूसों की अनुमति मिल जाती थी. लेकिन इस बार पूरी तरह से इसको बंद कर दिया गया और धारा 144 को सख्ती से लागू कर दिया गया."

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जुलूस के अलावा झंडे और बैनर लगाने के बारे में रियाज़ ने कहा, "युवाओं ने लाल बाज़ार, लाल चौक जैसे इलाक़ों में बैनर और झंडे तो लगाए हैं लेकिन सड़कों पर किसी भी तरह की कोई गतिविधि करने की इजाज़त नहीं है."

प्रतिबंधों में लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है लेकिन सबसे ज़्यादा समस्या स्वास्थ्य को लेकर होती है.

क्योंकि प्रशासन सब कुछ बड़ी सख्ती के साथ लागू करता है. कुछ दिन पहले ये अफ़वाह उड़ी थी कि हुर्रियत के ज़रिए यूएन मार्च का आयोजन किया जा रहा है तो इस अफ़वाह के बाद भी प्रशासन ने ऐसी ही सख्तियां की थीं.

जो बीमार लोग गाड़ियों में जाते हैं उन्हें भी जाने नहीं दिया जाता. प्रशासन की पॉलिसी ये है कि किसी तरह की गतिविधि करने की इजाज़त न दी जाए.

इस बार प्रतिबंधों को कड़े रूप से लागू किया जा रहा है.

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