कुलभूषण जाधव को दूसरी बार कॉन्सुलर एक्सेस से पाकिस्तान का इनकार, भारत की प्रतिक्रिया

  • 12 सितंबर 2019
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भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने गुरुवार को कहा है कि जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला पूरी तरह से लागू हो, भारत इसके लिए लगातार कोशिश जारी रखेगा.

रवीश कुमार ने ये बात तब कही जब उनसे उस फ़ैसले के बारे में पूछा गया जिसके मुताबिक़ पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को दूसरी बार कान्सुलर एक्सेस देने से इनकार कर दिया है.

रवीश कुमार ने ये भी दोहराया है कि भारत सरकार इस मामले में इस्लामाबाद के साथ कूटनीतिक स्तर पर कोशिशें जारी रखेगी.

इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फ़ैसल ने कहा कि कुलभूषण जाधव को दूसरी बार कान्सुलर एक्सेस नहीं मिलेगा. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा, "कोई दूसरी मीटिंग नहीं हुई. जाधव को दूसरी बार कॉन्सुलर एक्सेस नहीं मिलेगा."

कुलभूषण जाधव को बीते तीन साल में पहली बार कॉन्सुलर एक्सेस इसी दो सितंबर को मिला था.

इस्लामाबाद में मौजूद भारतीय डिप्टी हाईकमिश्नर गौरव अहलूवालिया ने क़रीब दो घंटे तक जाधव से मुलाक़ात की थी. इस मुलाक़ात के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश ने प्रेस नोट जारी करके बताया था, ''ये साफ़ लग रहा था कि श्री जाधव उनके बारे में किए गए झूठे दावों की वजह से बेहद तनाव में हैं. आज जो मुलाक़ात हुई, पाकिस्तान उसके लिए बाध्य था.''

दो सितंबर को दो घंटे की मुलाकात

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत सरकार कुलभूषण जाधव को न्याय दिलाने और उन्हें स्वदेश सुरक्षित लाने के लिए प्रतिबद्ध है.

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पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी आज एक प्रेस नोट जारी किया है.

इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान ने वियना संधि, अंतरराष्ट्रीय अदालत के फ़ैसले और पाकिस्तान के क़ानूनों के अनुरूप कुलभूषण जाधव को कॉन्सुलर ऐक्सेस दी है.

पाकिस्तान का दावा रहा है कि कुलभूषण जाधव एक भारतीय जासूस हैं जो भारतीय नौसेना और ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ के लिए काम कर रहे थे.

कुलभूषण सुधीर जाधव को मार्च 2016 में पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान में गिरफ़्तार किया गया था और इस मामले ने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा दिया था.

पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने 2017 में जाधव को जासूसी के इलज़ाम में फांसी की सज़ा सुनाई थी जिसके बाद भारत ने इसके ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था.

पाकिस्तान ने इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाया था. अदालत ने इस एतराज़ को रद्द कर दिया था. ये भारत के हक़ में आया पहला फ़ैसला था. अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा, "1963 के वियना कन्वेंशन के अनुसार आईसीजे दो देशों के बीच विवादों का अनिवार्य निपटारा कर सकता है."

अदालत ने भारत के इस तर्क को सही माना था कि कुलभूषण जाधव को इतने दिनों तक क़ानूनी सहायता नहीं देकर पाकिस्तान ने वियना संधि का उल्लंघन किया.

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