कश्मीर: विवादास्पद मौतों के कारण तनाव

  • 16 सितंबर 2019
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Image caption पाक प्रशासित कश्मीर में रैली

जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष राज्य का दर्जा ख़त्म करने के बाद क्षेत्र में हुई कई मौतों को लेकर परस्पर विरोधी दावे किए जा रहे हैं.

इन परस्पर विरोधी दावों के आख़िर क्या कारण हैं, यही जानने के लिए बीबीसी संवाददाता योगिता लिमये ने श्रीनगर शहर में कुछ मामलों की पड़ताल की.

छह अगस्त को 17 साल का असरार अहमद ख़ान उस समय ज़ख्मी हो गया जब वह अपने घर के बाहर सड़क पर था.

इस घटना के चार सप्ताह के बाद उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया.

'मेधावी छात्र' कहे जाने वाले और खेल का शौक़ रखने वाले असरार अहमद ख़ान की मौत जिन हालात में हुई वो इस बात की ताज़ा मिसाल है कि न केवल किसी की मौत पर बल्कि इन दिनों भारत प्रशासित कश्मीर की बहुत सारी घटनाओं पर परस्पर विरोधी दावे किए जा रहे हैं.

अंसार के​ पिता फ़िरदौस अहमद ख़ान का कहना है कि अंसार अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेल रहा था उसी समय उसके सिर पर आंसू गैस का कैन आकर लगा और उसे गोली का छर्रा लगा.

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जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म हुए बीते छह हफ़्ते, हालात सामान्य नहीं

घटना के समय उसके साथ मौजूद उसके एक दोस्त का कहना है कि शाम को अपनी ड्यूटी से वापस लौट रहे भारतीय अर्धसैनिक बलों के जवानों ने उस पर गोली चलाई.

अंसार की मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि एक आंसू गैस के गोले के​ विस्फोट के कारण उसकी मौत हुई. हालांकि कश्मीर में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन का कहना है कि प्रदर्शनकारी सशस्त्र बलों पर पत्थर फेंक रहे थे और उन्हीं में से एक पत्थर असरार को लगा जिससे उनकी मौत हो गई.

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Image caption कश्मीर में बंद दुकानें

कश्मीर पु​लिस ने बीबीसी को बताया कि वे भी सेना के अधिकारी के इस बयान पर क़ायम हैं. उन्होंने अस्पताल की रिपोर्ट को संदिग्ध क़रार दिया और कहा कि इसकी आगे जाँच की ज़रूरत है.

यह घटना भारत सरकार के उस घोषणा के एक दिन बाद हुई जिसमें जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा समाप्त कर दी गई थी और साथ ही राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटने की घोषणा की गई थी.

अप्रत्याशित तरीक़े से किए गए इस घोषणा से ठीक पहले कश्मीर में कई हज़ार अतिरिक्त सैनिकों को तैनात किया गया था. अमरनाथ तीर्थयात्रा रद्द कर दी गई थी और स्कूल एवं कॉलेजों को बंद कर दिया गया था.

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पर्यटकों को जल्द से जल्द घाटी से जाने के लिए कहा गया और टेलीफोन एवं इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थी. इसके अलावा बीजेपी को छोड़ पूर्व मुख्यमंत्री समेत राज्य के सभी प्रमुख नेताओं को नज़रबंद कर दिया गया था.

एक रिपोर्ट कार्ड से पता चलता है कि अंसार ने दसवीं के स्कूली परीक्षा में 84 प्रतिशत अंक अर्जित किए थे. एक अख़बार के पुराने क​टिंग में छपी एक तस्वीर में वह किक्रेट की एक ट्रॉफ़ी पकड़े हुए नज़र आ रहा है.

असरार के ​पिता ने बीबीसी से पूछा, "क्या मोदी मेरा दुख महसूस कर सकते हैं? क्या वह इसके लिए माफ़ी मांगेंगे? क्या उन्होंने इसकी निंदा की है?"

उन्होंने आगे कहा, "कल और मौतें होंगी. आज कश्मीर में किसी की कोई जवाबदेही नहीं है."

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Image caption क्षेत्र में बंद के बावजूद विरोध प्रदर्शन हुए हैं

भारत सरकार ने कहा है कि कश्मीर का विशेष दर्जा हटाए जाने के बाद से सुरक्षा बलों की कार्रवाई में एक भी व्यक्ति की जान नहीं गई है. सरकार का कहना है कि सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों द्वारा किए गए पत्थरबाज़ी में असरार सहित दो व्यक्तियों की मौत हुई है.

सरकार के मुताबिक़, इस दौरान चरमपंथियों ने तीन और लोगों की हत्या कर दी है.

लेकिन कई लोगों का कहना है कि सरकार ने अपने 'आधिकारिक आंकड़ों' में हाल के दिनों में हुई उनके कई क़रीबी रिश्तेदारों की अप्राकृतिक मौतों को शामिल नहीं किया है.

इनमें से एक रफ़ीक़ शागू ने बीबीसी को बताया कि वह नौ अगस्त को श्रीनगर के बेमीना इलाक़े में स्थित अपने दोमंज़िला घर में अपनी पत्नी फ़हमीदा बानो के साथ चाय पी रहे थे. उसी समय पड़ोस में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष शुरू हो गया.

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Image caption भारत प्रशासित कश्मीर में सेना

उन्होंने कहा कि आंसू गैस से उनका घर भर गया और फ़हमीदा का दम घुटने लगा.

उन्होंने बताया, "उसने मुझे बताया कि उसे सांस लेने में समस्या हो रही है. ऐसे में मैं उसे अस्पताल ले गया. वह मुझसे पूछने लगी 'मुझे क्या हो रहा है' और बहुत डरी हुई थी. डॉक्टरों ने बहुत प्रयास किया लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका."

बानो के मेडिकल रिपोर्ट में बताया गया कि विषाक्त गैस के संपर्क में आने के कारण उनकी मौत हुई. उनके पति अब अपनी पत्नी की मौत की जाँच की मांग को लेकर अदालत में एक याचिका दायर करने की योजना बना रहे हैं.

श्रीनगर के सफकदल इलाक़े में 60 साल के मोहम्मद अय्यूब ख़ान की मौत की परिस्थितियां भी बहुत हद तक बानो से मिलती जुलती हैं.

अय्यूब ख़ान के दोस्त फ़य्याज़ अहमद ख़ान ने बताया कि 17 अगस्त को वो उसे इलाक़े से गुज़र रहे थे तभी इलाक़े में सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें शुरू हो गईं.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि उन्होंने ख़ान के पांव के पास आंसू गैस के दो कैन गिरते देखे. उनके दोस्त को अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी. परिवार को अभी तक उनकी मौत की मेडिकल रिपोर्ट नहीं दी गई है.

पुलिस ने बताया कि यह एक अफ़वाह है कि आंसू गैस के संपर्क में आने के कारण ख़ान की मौत हुई.

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Image caption भारत प्रशासित कश्मीर में सेना

क्षेत्र में लॉकडाउन और लगातार कर्फ्यू जैसी स्थिति के बावजूद सरकार और सुरक्षा बलों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन की घटना हुई हैं जो अक्सर हिंसक हो गई हैं.

अस्पतालों ने हताहतों की संख्या के बारे में चुप्पी साध रखी है. घायल होने वाले कई लोग उचित चिकित्सा सेवा के लिए नहीं गए क्योंकि उन्हें आशंका थी कि प्रदर्शन में शा​मिल होने के कारण उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है.

माना जा रहा है कि सरकार ने पहले ही कार्यकर्ताओं, स्थानीय राजनेताओं और व्यापारियों सहित हज़ारों लोगों को हिरासत में ले रखा है. इनमें से अधि​कांश को राज्य के बाहर जेलों में रखा गया है.

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Image caption भारत प्रशासित कश्मीर में सेना

हालांकि, अभी यह आकलन करना मुश्किल है कि कितने लोग मारे गए हैं या घायल हुए हैं. यह साफ़ है कि कश्मीर में पूर्व में हुई हिंसा के मुक़ाबले यह बहुत छोटा है.

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने संवाददाताओें को बताया, "2008, 2010 और 2016 में हुई हिंसक वारदातों में भारी संख्या में लोगों की जान गई थी. उनकी तुलना में तो इस बार बहुत कम हिंसा हुई है."

उन्होंने कहा, "किसी भी व्यक्ति को नुक़सान पहुंचाए बिना धीरे-धीरे सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सभी सुरक्षा बल दिन-रात काम कर रहे हैं."

हालांकि, संचार सेवा ठप्प रहने और कठोर सैन्य के सख़्त रवैये के कारण लोगों का ग़ुस्सा पूरी तरह से सामने नहीं आ पा रहा है.

यह स्पष्ट नहीं है कि कश्मीर में लगाया गया प्रतिबंध कब पूरी तरह से हटाया जाएगा और पाबंदी हटाने के बाद क्या होगा.

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