जितेंद्र सिंह ने कहा, कश्मीर के नेताओं को 18 महीने से पहले रिहा करेंगे- प्रेस रिव्यू

  • 18 सितंबर 2019
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Image caption प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जितेंद्र सिंह

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद से जिन नेताओं को हिरासत में लिया गया है उन सबको 18 महीने से पहले रिहा कर दिया जाएगा.

अख़बार के अनुसार उन्होंने कहा कि पत्रकार अक्सर कश्मीर में नेताओं के हिरासत में लिए जाने के बारे में सवाल करते हैं, उन्हें मैं हमेशा यही कहता हूं कि 18 महीने से पहले उन्हें रिहा कर दिया जाएगा.

माना जा रहा है उनका इशारा आपातकाल के दौर की तरफ़ था जब विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया था और जेल में डाल दिया था.

मोदी-जिनपिंग मुलाक़ात में कश्मीर मुद्दा नहीं

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक में कश्मीर एक बड़ा मुद्दा नहीं रहेगा.

अख़बार के अनुसार एक वरिष्ठ चीनी अधिकारी ने मंगलवार को बताया है कि दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक तौर पर अहम कई मुद्दों पर चर्चा होगी लेकिन कश्मीर बड़ा मुद्दा नहीं होगा.

दोनों नेताओं के बीच ये एक अनौपचारिक बैठक अक्टूबर में होगी. बैठक की तारीख़ों का अब तक ऐलान नहीं किया गया है.

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Image caption सांकेतिक तस्वीर

पालकी पर मरीज़

द हिंदू में छपी एक ख़बर के अनुसार ओडिशा में एक बीमार बच्चे को एंबुलेंस तक पहुंचाने के लिए डॉक्टर और एंबुलेंस ड्राइवर ने उसे उठा कर पाँच किलोमीटर का सफर तय किया.

मामला मालकानगिरी के पहाड़ी इलाक़े में मौजूद नुआगड़ा गाँव का है जहां तक पक्की सड़क नहीं है. ऐसे में बीमार बच्चे को जिला अस्पताल में पहुंचाने के लिए डॉक्टर को जंगल और पहाड़ी नाला पार कर उबड़-खाबड़ रास्तों से हो कर बच्चे को सड़क तक लाना पड़ा.

इसके लिए दोनों ने एक बड़ी लकड़ी का इस्तेमाल कर पालकी बनाई जिसमें रस्सियों से बनाए झूले पर बच्चे को बैठाया और फिर उसे उठा कर गाँव से पांच किलोमीटर दूर नज़दीकी सड़क तक लाए और फिर उसे अस्पताल में भर्ती कराया.

जाति के नाम पर बीजेपी सांसद का रास्ता रोका

एशियन एज में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक के चित्रदुर्ग से बीजेपी सांसद ए नारायणस्वामी को कथित तौर पर तुमाकुर जिले में एक गांव में प्रवेश करने से रोका गया है.

अख़बार के अनुसार मामला जाति से जुड़ा है. इस गांव में बीते सौ सालों में मादिगा समुदाय के लोगों को प्रवेश करने नहीं दिया गया है और जब बीजेपी सांसद कुछ लोगों के साथ मांग पहुंचे तो एक ख़ास जाति के लोगों ने उनका रास्ता रोका.

अख़बार के अनुसार बीजेपी सांसद की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी भी इस मामले में कुछ नहीं कर सके और उन्हें गांव के बाहर से ही लौटना पड़ा.

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