कश्मीर अपडेटः महीनों से मोबाइल बंद, कंपनियों को कितना नुकसान?

  • 22 सितंबर 2019
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ट्राई की तरफ से जो आंकड़ें सामने आए हैं उसमें बताया गया है कि पूरे जम्मू कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में 1 करोड़ 25 लाख की आबादी है. इनमें से 1 करोड़ 13 लाख मोबाइल सब्सक्राइबर हैं जो अलग-अलग मोबाइल सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं.

इन 1 करोड़ 13 लाख में से करीब 60 लाख सब्सक्राइबर कश्मीर क्षेत्र से आते हैं. ट्राई की ओर से पिछले 45 दिन के आंकड़े बताए हैं जिसके मुताबिक मोबाइल कंपनियों को लगभग 90 करोड़ का नुकसान बताया गया है. यानी की जब घाटी में मोबाइल सेवाएं बंद कर दी जाती हैं तो हर दिन इन कंपनियों को दो करोड़ का नुकसान उठाना पड़ता है.

साल 2016 में भी तीन महीनें तक मोबाइल सेवाएं बंद की गई थी तब इन कंपनियों को 180 करोड़ का घाटा हुआ था.

इस तरह से घाटे को देखते हुए कई मोबाइल कंपनियां कश्मीर से अपना कारोबार समेटकर जम्मू शिफ़्ट हो जाती है. इन कंपनियों में कई कश्मीरी युवा काम करते हैं. जब इन कंपनियों को नुकसान होता है तो इन युवाओं की नौकरी पर भी ख़तरा मंडराने लगता है. ऐसा ही ख़तरा मौजूदा हालात में भी युवाओं को महसूस हो रहा है.

हम समझ सकते हैं कि मोबाइल या इंटरनेट सेवाएं बंद होने से सिर्फ़ संपर्क स्थापित करने में ही दिक्कतें नहीं आ रही हैं बल्की इस वजह से बहुत बड़े पैमाने में नौकरियां भी जा सकती हैं.

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कश्मीर में मोबाइल और इंटरनेट सेवा बंद होने से हर रोज़ हो रहा है करोड़ों का नुकसान

प्रशासन की पहल

केंद्र सरकार, राज्य सरकार और उनके तमाम अधिकारी घाटी में काफी सक्रिय हैं. वो हर रोज़ घाटी में हालात का जायज़ा लेने आते हैं. अलग-अलग विभागों में निवेश की बातें भी हो रही हैं.

जैसे बिजली विभाग में 10 हज़ार करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी गई है. इसी तरह शिक्षा और इंफ़्रास्ट्रकचर के लिए 900 करोड़ रुपए अलग से रखे गए हैं. चार नए डिग्री कॉलेज जम्मू कश्मीर में बनाए जाने हैं. इसके लिए चार हज़ार अध्यापकों को पहले ही नियुक्त कर लिया गया है. पंचायतों को 800 करोड़ रुपए खर्च करने के आदेश दिए गए हैं. उनको यह पैसा सीधे दिया गया है.

लेकिन विपक्षी नेता इन तमाम कोशिशों को नाकाफी बता रहे हैं. उनका कहना है कि जब लोग नाराज़ हों तो उन पर पैसा खर्च कर उनकी वफादारी खरीदने की कोशिश हो रही है.

विपक्षी नेता यहां तक कहते हैं कि जम्मू कश्मीर में अध्यापक और छात्रों का अनुपात पूरे देश के मुकाबले सबसे बेहतर है. उनका कहना है कि जम्मू कश्मीर में 16 छात्रों के लिए 1 अध्यापक है, जबकि अन्य राज्यों में 25 से 50 छात्रों के लिए एक अध्यापक होता है.

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संयुक्त राष्ट्र आम सभा से उम्मीदें

अमरीका में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की मुलाक़ात और उसके बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की ट्रंप से मुलाकात होगी.

इसके बाद मोदी और इमरान ख़ान संयुक्त राष्ट्र की महासभा को भी संबोधित करेंगे. इससे कश्मीरी आवाम को काफी उम्मीदें हैं.

यहां के लोगों को लगता है कि आने वाले दिनों में उनके लिए कुछ बड़ी घोषणाएं होने वाली हैं. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कुछ ख़ास नहीं होगा, मोदी और इमरान कश्मीर के बारे में अपनी-अपनी बातें सामने रखेंगे.

फिर भी आम लोग और व्यापारियों को इस संयुक्त राष्ट्र से बहुत आशाएं हैं. अगर वहां से कुछ निकलकर नहीं आता है तो इससे आम कश्मीरी को बहुत निराशा हाथ लगेगी.

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48 दिन बाद क्या है जम्मू-कश्मीर का हाल?

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