सुप्रीम कोर्ट ने आरे में पेड़ों के काटने पर लगाई रोक

  • 7 अक्तूबर 2019
विरोध कर रहे लोग इमेज कॉपीरइट RADHIKA JHAVERI

सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के आरे कॉलोनी इलाक़े में पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है.

देश की सर्वोच्च अदालत ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए विशेष बेंच का गठन किया था.

सुनवाई पर नज़र रख रहे वरिष्ठ पत्रकार सुचित्र मोहंती ने कहा कि अदालत ने अधिकारियों से आगे पेड़ों के काटने पर रोक लगाते हुए उनसे यथास्थिति बरक़रार रखने का आदेश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मेट्रो कंपनी एमएमआरसीएल ने एक बयान जारी कर कहा कि वो अदालत के आदेश का पालन करते हुए पेड़ काटना बंद कर दिया है.

एमएमआरसीएल ने अपने बयान में कहा, ''हम सुप्रीम कोर्ट के आज के फ़ैसले का सम्मान करते हैं. आरे मिल्क कॉलोनी के कार शेड साइट पर अब कोई भी पेड़ नहीं काटा जाएगा. लेकिन कटे हुए पेड़ों को वहां से हटाने समेत दूसरे काम साइट पर होते रहेंगे. उच्च न्यायालय के फ़ैसले के बाद चार और पांच अक्तूबर को कुल 2185 में से 2141 पेड़ों को काटा जा चुका है. एमएमआरसीएल ने ने अपनी ग्रीन परियोजना के तहत अब तक 23846 पेड़ लगाए हैं और 25000 पौधे लोगों में बांटे हैं. इस परियोजना में पहले ही क़ानूनी और दूसरी रिकावटों के कारण छह महीने की देरी हो चुकी है. लेकिन फिर भी हमें आशा है कि हम इस प्रोजक्ट को समय पर पूरा कर लेंगे.''

पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे कुछ छात्रों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था जिसके बाद अदालत ने सुनवाई की और य​​ह फ़ैसला सुनाया.

छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को चीफ़ जस्टिस को पत्र लिखकर पेड़ों की कटाई के मामले में संज्ञान लेने का अनुरोध किया था.

जस्टिस मिश्रा की अगुआई वाली पीठ ने महाराष्ट्र सरकार से ये भी पूछा कि विरोध कर रहे जिन लोगों को गिरफ़्तार या हिरासत में लिया गया उन्हें रिहा किया गया है या नहीं.

न्यायाधीश ने कहा, "अगर उन्हें रिहा नहीं किया गया है तो उन्हें निजी बॉण्ड पर तत्काल रिहा किया जाए."

सुप्रीम कोर्ट इस बारे में आगामी सुनवाई 21 अक्तूबर को करेगा.

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आरे कॉलोनी में मेट्रो शेड के लिए मुंबई पुलिस, मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और ग्रेटर मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन 2700 पेड़ों को काटना चाहते हैं.

सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने माना कि 1500 से ज़्यादा पेड़ों को काटा जा चुका है. हालाँकि याचिकाकर्ताओं का दावा है कि 2500 से ज़्यादा पेड़ों को काटा जा चुका है.

मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए इस इलाक़े में कार शेड बनाने का पहले से ही विरोध हो रहा था. इसे लेकर हाई कोर्ट में कई याचिकाएं भी डाली गई थीं मगर अदालत ने उन सभी को ख़ारिज कर दिया था.

सैकड़ों पेड़ कटने की आशंका

बॉम्बे हाई कोर्ट ने आरे कॉलोनी को जंगल न मानते हुए पेड़ों की कटाई की मंजूरी के फ़ैसले को रद्द करने से इनकार कर दिया था.

इसके बाद से ही पेड़ों की कटाई का काम शुरू हुआ और आशंका जताई जा रही है कि अब तक सैकड़ों पेड़ काटे जा चुके हैं.

पर्यावरण कार्यकर्ता पेड़ों को काटने का विरोध कर रहे हैं. शनिवार को प्रदर्शन कर रहे लोगों की पुलिसकर्मियों से हाथापाई के बाद इलाके में धारा 144 भी लगा दी गई थी.

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शनिवार को पुलिस ने विरोध कर रहे 50 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया और अन्य कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया.

पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने शनिवार को हाई कोर्ट में एक नई याचिका डाली थी मगर अदालत ने इस पर विचार करने से इनकार कर दिया था.

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