हिमाचल की मांग, 'लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने से पहले सीमा विवाद का हल हो'

  • 9 अक्तूबर 2019
लाहौल घाटी इमेज कॉपीरइट Pradeep Kumar/BBC
Image caption लाहौल घाटी

अपनी प्राचीन बौद्ध संस्कृति और बर्फ़ से ढके ऊंचे दर्रों के लिए जाने जाने वाला शांत आदिवासी इलाका लाहौल-स्पीति की शांति अपने शांतिप्रिय पड़ोसी लद्दाख के साथ लगातार चली आ रही सीमा विवाद की वजह से लंबे वक्त से भंग है. भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लद्दाख जल्द ही एक केंद्र शासित प्रदेश बनने वाला है.

हालांकि, क्षेत्रीय सीमा पर यह विवाद पांच साल पहले ही उपजा है लेकिन हिमाचल प्रदेश की बीजेपी सरकार चाहती है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 31 अक्तूबर से पहले इस सीमा विवाद को हल कर दें क्योंकि 1 नवंबर को जम्मू-कश्मीर से अलग हो कर लद्दाख एक नया केंद्र शासित प्रदेश बन जाएगा.

भारतीय संसद के भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद फ़ैसले और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेश में बांटने के फ़ैसले के बाद 1 नवंबर से ही लद्दाख के साथ साथ जम्मू-कश्मीर भी केंद्र शासित प्रदेश के रूप में काम करना शुरू कर देगा.

इसके साथ ही यहां के राजनीतिक और प्रशासनिक आयाम 31 अक्तूबर के बाद बदल जाएंगे. लेकिन इस बदलाव के साथ ही सीमा विवाद के निपटारे में और देरी न हो इसके लिए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इसे लेकर हस्तक्षेप की मांग की है.

मुख्यमंत्री ने राजधानी शिमला में बीबीसी हिंदी को बताया, "हमें खुशी है कि लद्दाख की लंबे समय से लंबित मांग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वीकार कर लिया है और हम लद्दाख के लोगों की इसके लिए शुभकामनाएं देते हैं. इसके साथ ही मैंने कुछ वर्षों पहले उपजे इस सीमा विवाद से गृह मंत्री अमित शाह को बीते महीने अवगत कराते हुए बताया कि यह अब तक अनसुलझा है."

जय राम ठाकुर ने कहा कि लद्दाख एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनने जा रहा है लिहाजा उन्होंने अमित शाह से यह अनुरोध किया है कि 31 अक्तूबर से पहले इसे सुलझाते हुए हिमाचल प्रदेश से जोड़ दिया जाए.

बीते महीने अमित शाह ने चंडीगढ़ में नॉर्दर्न ज़ोनल काउंसिल (एनज़ेडसी) की बैठक की अध्यक्षता की जिसमें मुख्यमंत्रियों, नॉर्दर्न इलाके के मंत्रियों और भारत सरकार के उच्चाधिकारियों और उत्तर भारतीय राज्य शामिल हुए थे.

इमेज कॉपीरइट Pradeep Kumar/BBC
Image caption 10,000 फ़ीट की ऊंचाई पर लाहौल स्पिति का प्रशासकीय मुख्यालय

क्या है विवाद?

यह विवाद हिमाचल प्रदेश के सरचू की सीमा के भीतर कुछ व्यापारियों के अतिक्रमण से जुड़ा है. ये व्यापारी इस इलाके में पर्यटन के सीजन में यहां बिजनेस के लिए दुकानें लगाते हैं. उस दौरान बड़ी संख्या में देश-विदेश के पर्यटक और ट्रैकिंग पर जाने वाले लोग मनाली-रोहतांग दर्रे और कीलॉन्ग (लाहौल-स्पीति का मुख्यालय) से होकर गुजरते हैं.

कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने भी अपने ज़रूरत के सामानों के पहुंचाने के वैकल्पिक रास्ते के रूप में मनाली-कीलॉन्ग को इस्तेमाल किया था.

स्थानीय निवासियों ने भी पड़ोसी राज्य के लोगों के यहां क़रीब 20 किलोमीटर क्षेत्र में अतिक्रमण की शिकायत की है.एनज़ेडसी की बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा था कि "लेह-लद्दाख की ज़िला प्रशासन ने हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति ज़िले में अनाधिकृत अतिक्रमण किया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय को इस मुद्दे के जल्द निपटारे के लिए कदम उठाने चाहिए क्योंकि इसकी वजह से इलाके में पहले ही कुछ तनाव हो चुका है."

लाहौल-स्पीति से विधायक और राज्य के कैबिनेट मंत्री डॉ. राम लाल मार्कण्ड याद करते हैं, "बीते वर्ष मनाली से 220 किलोमीटर दूर सरचू में व्यापारियों के बीच झड़पें हुई थीं. वहां पथराव और हाथापाई भी हुई थी. तब इसे पुलिस को दखल देकर उस झड़प को शांत किया. तब उसकी वजह दोनों राज्यों के बीच सीमा के निर्धारण का नहीं होना ही था."

मार्कण्ड कहते हैं, "मई-जून में बर्फ़ के हटने के बाद लेह के व्यापारियों ने यहां टेंट और दुकानें लगा दी थीं. इसकी वजह से यहां संघर्ष की स्थिति पैदा हो जाती है क्योंकि हमारे व्यापारी पर्यटन के सीजन में यहां व्यापार नहीं कर पाते."

पहले की सरकारों के दौरान तत्कालीन कांग्रेस विधायक और अनुसूचित जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष रहे रवि ठाकुर ने भी भारत सरकार के सामने इस मामले को मुखर रूप से उठाया था.

वे कहते हैं, "मैं इस मुद्दे को बहुत आक्रामक तरीके से उठा रहा हूं. दारचा मेरी अपनी पंचायत है. मैंने भारत सरकार को सलाह दी थी कि सर्वेयर जनरल से सीमा का नक्शा मांगे ताकि वास्तविक स्थिति की दोनों राज्यों को पता चले."

इमेज कॉपीरइट Pradeep Kumar/BBC
Image caption केलॉन्ग

हिमाचल का क्या है स्टैंड?

लाहौल स्पीति को लेह-लद्दाख से जोड़ने वाले सरचू को हिमाचल प्रदेश ने हमेशा लाहौल स्पीति ज़िले का हिस्सा माना है. लद्दाख के व्यापारी और जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने हिमाचल की सीमा के अंदर 20 किलोमीटर का अतिक्रमण किया है. पुलिस ने बीते वर्ष सरचू में एक पुलिस पोस्ट भी बनाया था.

लाहौल स्पीति के व्यापारी यहां टेंट और दुकानें लगाकर फास्ट-फूड बेचते हैं. रोहतांग पास से जब बर्फ़ हट जाता है तो इसकी दूसरी तरफ सरचू में भी व्यापारी ठीक ऐसी ही गतिविधियां करते हैं.

अब रोहतांग सुरंग अपने निर्माण के अंतिम चरण में है, इसके चालू होने के बाद लाहौल-स्पीति के मनाली-कीलॉन्ग में नई संभावनाएं शुरू होंगी क्योंकि भारी बर्फ़बारी को छोड़ कर सभी मौसम में यहां होकर लेह-लद्दाख जाया जा सकेगा लिहाजा स्थानीय लोग सरकार पर इस मसले को सुलझाने का दबाव बना रहे हैं.

स्थानीय निवासी जय बोध कहते हैं कि इसकी सीमाओं को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया जाना चाहिए. वे मानते हैं कि सीमा विवाद को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता है. यह उनके व्यवसाय के लिए ख़तरा बन गया है क्योंकि पर्यटन के अलावा यहां रोज़गार का कोई और बड़ा जरिया नहीं है. यहां खेती केवल छह सात महीने के लिए की जा सकती हैं क्योंकि बाकी समय ज़मीनें बर्फ़ से ढकी होती हैं.

राज्य के नव नियुक्त मुख्य सचिव श्रीकांत बाल्दी ने बीबीसी से कहा, "राज्य सरकार ने यहां की ज़मीन के रिकॉर्ड से जुड़े सभी दस्तावेज़ नॉर्दर्न काउंसिल की टीम को चंडीगढ़ में दे दिया है. उन्होंने हमारे साथ अलग से अधिकारी स्तर की बातचीत भी की है."

उन्होंने कहा, "हमने दो बुनियादी चीज़ों पर जोर दिया है. पहली, क्षेत्रीय सीमाओं को अच्छी तरह से परिभाषित किया जाएगा क्योंकि लद्दाख अब केंद्र शासित प्रदेश बन जाएगा. ऐसा भारत के सर्वेयर जनरल के पास पूरे मसले को ले जाकर ही किया जा सकता है. दूसरा, यह जल्द से जल्द किया जाना चाहिए."

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (जीएसआई) की टीमों ने भी तीन साल पहले इस क्षेत्र का दौरा किया था. लाहौल-स्पीति के डिप्टी कमिश्नर, डीसी लद्दाख और डीसी कारगिल भी उस वक्त यहां मौजूद थे. लेकिन, तब कुछ तकनीकी कारणों से सीमा का निर्धारण नहीं किया जा सका.

इमेज कॉपीरइट hplahaulspiti.nic.in

लाहौल-स्पीति से जुड़े कुछ तथ्य

राज्य के 12 ज़िलों में से एक लाहौल और स्पीति को दो अलग अलग ज़िलों लाहौल और स्पीति को मिलाकर बनाया गया है. स्पीति किन्नौर से जुड़ा है, जो कि राज्य का एक अन्य आदिवासी ज़िला है, इसकी सीमा तिब्बत के इलाके से लगी हुई है और इसे ठंडा रेगिस्तान भी कहा जाता है.

यहां की कठिन परिस्थितियों की वजह से लाहौल स्पीति का इलाका अव्यवस्थित है. 16 हज़ार फ़ीट की ऊंचाई पर यहां ग्लेशियर या हिम नदियां मौजूद हैं. जलवायु परिवर्तन के कारण आज तक यहां लोग पत्ता गोभी, टमाटर, गाजर, मूली, हरी मटर, आलू जैसी हर तरह की पत्तेदार सब्जियां उगाने में सक्षम हो रहे हैं. वहीं कुछ बागीचे सेब के कारोबार में लगे हैं.

पिन वैली नेशनल पार्क और किब्बर वन्यजीव अभ्यारण्य इस इलाके के ऐसे दो संरक्षित क्षेत्र हैं जहां स्नो लेपर्ड रहते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार