क्या मोदी-जिनपिंग कश्मीर पर करेंगे चर्चा?

  • 11 अक्तूबर 2019
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शुक्रवार को भारत के दौरे पर आ रहे हैं, यहां वो भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनौपचारिक मुलाक़ात करेंगे. इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान चीन के दौर पर गए और वहां उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाक़ात की.

चीन के राष्ट्रपति का इस तरह पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मिलना और उसके तुरंत बाद भारत के दौरे पर आना सुर्खियों में रहा. ख़ासकर तब जब भारत और पाकिस्तान के बीच भारत प्रशासित कश्मीर का मसला बड़ा बन चुका है.

भारत प्रशासित कश्मीर के मुद्दे पर चीन शुरुआत में पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा रहा है. भारत आने से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ मुलाक़ात के दौरान भी शी जिनपिंग ने दोहराया कि वो कश्मीर मामले में किसी भी तरह की एकतरफ़ा कार्रवाई का विरोध करते हैं.

चीन ने कहा कि कश्मीर एक विवादित मुद्दा है और इसका समाधान शांतिपूर्ण तरीक़े से यूएन चार्टर और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव और द्विपक्षीय समझौतों के आधार पर होना चाहिए.

एक तरफ़ चीन कश्मीर के मुद्दे पर लगातार पाकिस्तान का साथ देता रहा है तो वहीं भारत के साथ भी अपने व्यापारिक रिश्तों को मज़बूत करने की भरसक कोशिशें कर रहा है. आखिर चीन एक ही वक़्त में भारत और पाकिस्तान दोनों का हाथ एक साथ पकड़कर चलता हुआ क्यों दिख रहा है?

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Image caption शी जिनपिंग और नरेंद्र मोदी

मोदी-जिनपिंग मुलाक़ात पर इमरान का असर?

कश्मीर के बारे में चीन की ओर से आए बयान पर पाकिस्तान का कहना है कि चीन अपने राष्ट्रपति के भारत दौरे से पहले पाकिस्तान को भरोसे में लेना चाहता है.

इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता आसिफ़ फ़ारुक़ी के मुताबिक, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा था कि चीन, भारत के दौरे पर जाने से पहले पाकिस्तान की लीडरशिप को अपने भरोसे में लेना चाहता है.

आसिफ़ फ़ारुखी कहते हैं, ''पाकिस्तान यह मान रहा है कि चीन के राष्ट्रपति भारत जाकर पाकिस्तान का पक्ष भारत के सामने रखेंगे.''

ऐसे में एक सवाल यह भी उठता है कि क्या इमरान ख़ान की शी जिनपिंग के साथ मुलाक़ात का असर जिनपिंग और मोदी की मुलाक़ात पर पड़ेगा.

इस पर दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह का मानना है कि मोदी जिनपिंग की मुलाक़ात पर पाकिस्तान का असर नहीं दिखेगा.

वो कहते हैं, ''पिछले एक साल में इमरान ख़ान ने चीन का तीसरा दौरा कर लिया है. यह दिखाता है कि पाकिस्तान किस तरह से हर चीज़ के लिए चीन पर निर्भर है. शायद इमरान और जिनपिंग का थोड़ा-सा असर मोदी-जिनपिंग की मुलाक़ात पर पड़ सकता है. लेकिन, हमें इसे इस तरह देखना चाहिए कि आज के वक़्त में पाकिस्तान चीन के लिए मजबूरी और परेशानी बन गया है जबकि भारत में चीन को एक उम्मीद नज़र आती है साथ ही चुनौती भी दिखती है.''

भारत सरकार ने जबसे जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 के कई प्रावधानों को निष्प्रभावी किया है और जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा खत्म किया है तभी से इस मुद्दे पर पाकिस्तान भारत को घेरता रहा है.

मोदी और जिनपिंग की मुलाक़ात में कश्मीर मसला उठने की संभावनाओं पर प्रोफेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं, ''भारत ने साफ़ तौर पर कहा है कि कश्मीर उसका अंदरूनी मुद्दा है इसलिए यह नहीं समझा जा सकता कि मोदी-जिनपिंग की मुलाक़ात में कश्मीर पर चर्चा होगी. हां, इतना ज़रूर हो सकता है कि अनौपचारिक मुलाक़ात के दौरान जिपनिंग मोदी से यह कह दें कि भारत की कश्मीर पर क्या नीति है. शायद इस तरह से कुछ बातचीत हो जाए लेकिन इससे अधिक चर्चा होने की उम्मीद नहीं लगती.''

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चीन की कथनी-करनी में फ़र्क

चीन के रुख को अस्पष्ट मानते हुए भारत-चीन मामलों की जानकार जेएनयू की प्रोफेसर अलका आचार्य कहती हैं कि चीन की कथनी और करनी में विरोधाभास देखने को मिलता रहता है.

वे कहती हैं, ''चीन के दिल में क्या है, यह कहना बहुत मुश्किल है, क्योंकि चीन की कथनी और करनी में एक विरोधाभास हमेशा ज़रूर दिखता है. ऐसा अक्सर देखा गया है कि चीन ने जो कहा है, उसके कदम उसके विपरीत होते हैं. लेकिन फिर भी भारत और चीन के बीच लगातार बातचीत होती रहती है और इस तरह से कहा जा सकता है कि इन दोनों देशों की सोच कहीं ना कहीं तो मेल खा रही है.''

प्रोफेसर आचार्य, मोदी-जिनपिंग की अनौपचारिक मुलाक़ात को काफी अहम बताती हैं. वो कहती हैं, ''मुलाक़ात भले ही अनौपचारिक हो लेकिन फिर भी इस मुलाक़ात के कई मायने हैं, क्योंकि इस मुलाक़ात के ज़रिए दोनों देश उन मुद्दों को एक-दूसरे के सामने रख सकेंगे जिस पर उनके बीच विवाद हैं या फिर जो मुद्दे दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित करते हैं. इसके साथ ही अनौपचारिक बातचीत से दो देशों के रिश्तों में लचीलापन भी आता है.''

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मोदी-जिनपिंग की किन मुद्दों पर होगी बात

नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच तमिलनाडु के मामल्लपुरम में शुक्रवार और शनिवार को अनौपचारिक बातचीत होगी. इस दौरान दोनों नेता सीमा पर शांति बनाए रखने और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे.

प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं, ''भारत और चीन के बीच कई बड़े मुद्दे हैं, जिसमें आतंकवाद भी है. इसके साथ ही चीन भारत में 5जी लगाना चाहता है, भारत में ख़्वावे कंपनी का व्यापार बढ़ाना चाहता है. पिछले तीन साल में भारत में चीन का निवेश बहुत तेज़ी से बढ़ा है, आज यह आठ अरब डॉलर से बड़ा हो गया है, उस पर भी बातचीत होगी. इसके अलावा जलवायु परिवर्तन पर भी बात होगी.''

इस बीच चीन और पाकिस्तान के बीच सीपैक समझौते से जुड़े कुछ आर्थिक समझौते भी हुए हैं. पाकिस्तान चीन को यह भरोसा भी दे रहा है कि चीन की आर्थिक मदद से चल रही सीपैक परियोजना की गति धीमी ज़रूर है लेकिन पाकिस्तान इसके प्रति गंभीर है.

आसिफ़ फ़ारुखी इस बारे में कहते हैं, ''पिछले एक साल से इस तरह के संकेत मिल रहे थे कि सीपैक परियोजना की गति धीमी हो गई है. पाकिस्तान के आर्थिक हालत ख़राब होने की वजह से वो इस परियोजना के कई हिस्सों को पूरा नहीं कर पाया है, लेकिन पाकिस्तान के नेतृत्व ने चीन को यह बताया है कि वो इसके प्रति गंभीर हैं.''

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कुल मिलाकर कह सकते हैं कि चीन एक तरफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भले ही पाकिस्तान का पक्ष लेता हुआ दिखता हो, लेकिन उसके लिए भारत का साथ भी व्यापारिक दृष्टिकोण से काफ़ी अहम है.

शायद यही वजह है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मिलने के दो दिन बाद ही चीन के राष्ट्रपति भारत के दौरे पर आ रहे हैं.

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