नेपाल भी जा रहे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग- पाँच बड़ी ख़बरें

  • 11 अक्तूबर 2019
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत के दो दिन के दौरे के बाद नेपाल के दौरे पर जाएंगे. नेपाल विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टी की है.

शी जिनपिंग शुक्रवार और शनिवार को भारत में रहेंगे, जहां वो भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनौपचारिक मुलाक़ात करेंगे. इसके बाद शनिवार को ही वो नेपाल के दौरे पर चले जाएंगे.

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल के राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी के निमंत्रण को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने स्वीकार कर लिया है और वो 12 और 13 अक्टूबर को नेपाल में रहेंगे.

अपने दौरे के दौरान शी जिनपिंग राष्ट्रपति भंडारी से मुलाक़ात करेंगे. इसके साथ ही उनकी एक अहम बैठक नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के साथ भी होगी.

बताया जा रहा है कि नेपाल में शी जिनपिंग के आने से पहले ही उनके स्वागत की तमाम तैयारियां हो चुकी हैं.

चीन का कोई राष्ट्रपति 23 साल बाद नेपाल के दौरे पर पहुंच रहा है. अंतिम बार साल 1996 में जियांग ज़ेमिन नेपाल के दौरे पर गए थे.

रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर गिरफ़्तार

दवा कंपनी रेनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर मलविंदर सिंह और शिविंदर सिंह को पुलिस ने धोखाधड़ी और ठगी के आरोप में गिरफ़्तार किया है. मलविंदर और शिविंदर की गिरफ़्तारी आर्थिक अपराध शाखा से हुई है.

शिविंदर को गुरुवार शाम दिल्ली से गिरफ़्तार किया गया वहीं मलविंदर सिंह को आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने गुरुवार देर रात पंजाब से पकड़ा.

दोनों भाइयों पर धोखाधड़ी और ठगी का आरोप हैं. शिविंदर के साथ तीन और लोगों की गिरफ़्तारी भी हुई है.

आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की डीसीपी वर्षा शर्मा ने बताया कि पुलिस ने शिविंदर सिंह, सुनील गोडवानी, कवि अरोड़ा और अनिल सक्सेना को गिरफ़्तार किया है. इन्हें आईपीसी की धारा 409 और 420 के तहत गिरफ़्तार किया गया है.

बताया जा रहा है कि रेलीगेयर फिनवेस्ट की शिक़ायत पर यह कार्रवाई की गई है.

श्रीनगर के सेंटोर होटल में कम से कम 33 नेता हिरासत में

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रमुख प्रावधानों को हटाए जाने के फ़ैसले से पहले ही वहां के नेताओं को नज़रबंद कर दिया गया था.

इस फ़ैसले के दो महीने से भी लंबा वक़्त बीत जाने के बाद अब भी श्रीनगर के सेंटोर होटल में कम से कम 33 नेता हिरासत में हैं.

इनमें वरिष्ठ नेता फ़ारुख़ अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती भी शामिल हैं.

इससे पहले जम्मू के कुछ नेताओं को छोड़े जाने की ख़बर थी, इसके साथ ही घाटी के भी कुछ नेताओं को घर से बाहर निकलने की इजाज़त दी गई थी. इनमें पीडीपी के नेता नूर अहमद शेख़ शामिल हैं.

नूर अहमद को सेंटोर होटल से बाहर जाने की इजाज़त दे दी गई. नूर अहमद की बेटी की शादी होने वाले है इसलिए उन्हें रिहा कर दिया गया. बीते दो हफ़्तों में कांग्रेस के शोएब लोन और पीडीपी के पूर्व विधायक यावर दिलावर मीर को भी बाहर जाने की इजाज़त दी गई थी.

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भारत ने तुर्की से संयम बरतने को कहा

अमरीका के सीरिया से अपनी सेना हटाने के फै़सले के तुरंत बाद तुर्की ने पड़ोसी देश सीरिया में हवाई हमले शुरू कर दिए हैं, इसमें आम लोगों के हताहत होने की सूचना है.

तुर्की की इन हमलों पर भारत ने गहरी चिंता जताई है और अपील की है कि तुर्की सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करे.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ''हम पूर्वोत्तर सीरिया में तुर्की के एकतरफा सैन्य हमले पर गहरी चिंता जाहिर करते हैं. तुर्की का क़दम क्षेत्र में स्थिरता और आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई को कमज़ोर कर सकता है. इस क़दम से मानवीय संकट पैदा होने की आशंका है.''

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भारतीय विदेश मंत्रालय ने तुर्की से कहा है कि वो सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करे और संयम बरते.

हालांकि तुर्की का दावा है कि वह कुर्द बलों और इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रहा है. तुर्की कुर्द लड़ाकों को आतंकी मानता है.

दरअसल भारत का तुर्की से संयम बरतने की अपील करना इस वक़्त बहुत ख़ास है क्योंकि हाल ही में तुर्की के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का ज़िक्र करते हुए पाकिस्तान का समर्थन किया था.

तुर्की ने कई बार कश्मीर में कथित तौर पर मानवाधिकार के उल्लंघन की बात की है.

अक्टूबर अंततक हो सकता है ब्रेग्ज़िट

आयरिश प्रधानमंत्री लियो वराडकर ने कहा है कि अक्टूबर के अंत तक ब्रेग्ज़िट समझौता हो सकता है.

लियो वराडकर ने उत्तर-पश्चिम इंग्लैंड में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बॉरिस जॉनसन के साथ हुई बातचीत को बहुत सकारात्मक और आशाजनक बताया.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि किसी भी समझौते में आयरलैंड में सीमा शुल्क से बचना चाहिए और उत्तरी आयरलैंड में लोकतांत्रिक समर्थन को स्वीकारना चाहिए.

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Image caption आयरलैंड के प्रधानमंत्री लियो वराडकर

लियो वरादकर के रुख पर आयरिश प्रसारक आरटीई के यूरोपीय संपादक टॉनी कोनॉली कहते हैं कि वो समझौते की तरफ़ सकारात्मक संकेत देते हुए दिखे लेकिन अपनी शर्त से पीछे नहीं हटे.

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