कश्मीर घाटी में सोमवार दोपहर से काम करेंगे पोस्टपेड मोबाइल

  • 12 अक्तूबर 2019
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भारत प्रशासित कश्मीर में सोमवार से पोस्टपेड मोबाइल फ़ोन सेवा काम करने लगेगी. जम्मू-कश्मीर के प्रधान सचिव रोहित कंसल ने यह जानकारी दी है.

रोहित कंसल ने शनिवार को श्रीनगर में प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके बताया कि स्थिति की समीक्षा करने के बाद जम्मू-कश्मीर के शेष हिस्सों में मोबाइल फॉोन सेवा बहाल करने का निर्णय लिया गया.

टेलिकॉम ऑपरेटरों के सभी पोस्टपेड मोबाइल फ़ोन सोमवार यानी 14 अक्टूबर 2019 दोपहर 12 बजे से काम करने लगेंगे. यह फ़ैसला घाटी के सभी 10 ज़िलों में प्रभावी होगा.

श्रीनगर के डेवलपमेंट कमिश्नर शाहिद चौधरी ने ट्वीट किया, "कश्मीर में सोमवार से टेलिफ़ोन नेटवर्क लगभग सामान्य हो जाएगा. अगर राजनीति को छोड़ दें तो दुनिया के सबसे अहम न्यूज़रूम्स से लेकर और संयुक्त राष्ट्र महसभा तक, पिछले 5 अगस्त से सबकी यही सबसे बड़ी चिंता थी. हम उम्मीद करते हैं कि इंटरनेट सुविधा भी जल्दी बहाल हो जाए."

श्रीनगर में मौजूद हमारे सहयोगी माजिद जहांगीर ने बताया कि घाटी में अभी भी इंटरनेट सेवा ठप पड़ी है. इसमें मोबाइल इंटरनेट के अलावा ब्रॉडबैंड सेवाएं भी शामिल हैं.

भारत सरकार की ओर से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने के बाद क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए पांच अगस्त को पूरे जम्मू-कश्मीर में मोबाइल नेटवर्क और लैंडलाइन सेवाओं को रोक दिया गया था.

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लैंडलाइन सेवा को तो चरणबद्ध ढंग से बहाल कर दिया गया था मगर घाटी के विभिन्न इलाक़ों में मोबाइल सेवाओं पर अभी तक प्रतिबंध लागू था.

अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने के तीन सप्ताह बाद जम्मू के डोडा, किश्तवाड़, रामबन, राजौरी और पुंछ जैसे ज़िलों में मोबाइल पोस्टपेड सेवा बहाल की गई थी.

12 सितंबर को प्रधान सचिव कंसल ने कहा था कि कुपवाड़ा और हंदवाड़ा में भी कुछ मोबाइल फ़ोन शुरू किए गए हैं. शेष इलाक़ों में पाबंदियां जारी थीं.

'99 प्रतिशत घाटी में कोई पाबंदी नहीं'

जम्मू-कश्मीर के प्रधान सचिव रोहित कंसल ने कहा है कि घाटी के 99 प्रतिशत इलाक़ों में आवाजाही पर कोई पाबंदी नहीं है. उन्होंने कहा कि लैंडलाइन फ़ोन भी पूरी तरह काम कर रहे हैं.

दुकानें बंद रहने और यातायात के साधन कम होने के लिए रोहित कंसल ने चरमपंथी संगठनों को ज़िम्मेदार बताया. उन्होंने कहा कि ये संगठन नहीं चाहते कि घाटी में शांति हो इसलिए इनके डर से लोग दुकानें नहीं खोल रहे.

जम्मू-कश्मीर के प्रधान सचिव ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में कश्मीर का उच्च क्वॉलिटी का सेब बाज़ार में पहुंचेगा और केंद्र सरकार की योजना के तहत अब बागवानों को अच्छे दाम भी मिलेंगे.

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने 10 अक्टूबर को ही पर्यटकों के लिए जारी सुरक्षा परामर्श वापस लिया था. प्रशासन ने यह भी कहा था कि जो पर्यटक इस क्षेत्र में घूमने के इच्छुक हैं, उनको परिवहन समेत ज़रूरी सहायता मुहैया कराई जाएंगी. इसके दो दिन बाद ही मोबाइल फ़ोन सेवा को बहाल करने का निर्णय लिया गया है.

भारत सरकार ने पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था. इसके बाद केन्द्र ने कहा था कि राज्य के लोगों को देश के बाक़ी हिस्सों के जैसे ही संवैधानिक लाभ मिलेंगे और प्रदेश का विकास होगा.

अनुच्छेद 370 की हटाए जाने के बाद किसी तरह की प्रतिक्रिया तो रोकने के लिए केन्द्र सरकार ने व्यापक पैमाने पर प्रतिबंध लगाए थे. इंटरनेट और अन्य संचार सेवाओं को ठप करने के अलावा नेताओं को हिरासत में लिया गया, पर्यटकों को राज्य से बाहर जाने के लिए कहा गया और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई थी.

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