वर्धा विश्वविद्यालय: क्या प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखने पर निलंबित हुए छात्र

  • 12 अक्तूबर 2019
छात्र

महाराष्ट्र के वर्धा में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के छह छात्रों को निलंबित कर दिया गया है.

निलंबित छात्रों के नाम चंदन सरोज, रजनीश कुमार आंबेडकर, वैभव पिंपलकर, राजेश सारथी, नीरज कुमार और पंकज बेला हैं.

छात्रों का आरोप है कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखने की वजह से निलंबित किया गया. विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों को ग़लत बताया है.

विश्वविद्यालय के कुलपति रजनीश कुमार शुक्ला ने बीबीसी से कहा, "हमने विश्वविद्यालय में क़ानून व्यवस्था और शांति बनाए रखने के मक़सद से छह छात्रों पर कार्रवाई की है."

इन छात्रों ने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की याद में एक कार्यक्रम आयोजित करने की इजाज़त मांगी थी. छात्रों का कहना है कि उन्हें इसकी इजाज़त नहीं मिली.

ये भी पढ़ें:'मुझे अपनी जाति की वजह से नौकरी छोड़नी पड़ी'

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption नरेंद्र मोदी

पूरा मामला क्या है?

विश्वविद्यालय के छह छात्रों चंदन सरोज, रजनीश कुमार आंबेडकर, वैभव पिंपलकर, राजेश सारथी, नीरज कुमार और पंकज बेला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर देश के कई मुद्दों पर ध्यान देने की गुज़ारिश की थी.

इसमें छात्रों ने मॉब लिंचिंग, यौन उत्पीड़न, बलात्कार, कश्मीर की स्थिति और एनआरसी से जैसे मुद्दों का ज़िक्र किया था.

इसके अलावा छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखने वाले 49 बुद्धिजीवियों पर देशद्रोह का मामला दर्ज किए जाने (बाद में यह केस वापस ले लिया गया था) के बारे में भी अपनी बात रखी थी.

निलंबित हुए छात्र रजनीश आंबेडर ने बताया, "हमने कांशीराम की पुण्यतिथि पर एक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए अनुमति मांगी थी लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने हमें जानबूझकर इजाज़त नहीं दी. इसके बाद हमने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर देश के तमाम मुद्दों पर चर्चा करने की अनुमति मांगी थी."

रजनीश बताते हैं, "हमने प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया था कि वो विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा को प्राथमिकता दिलाएं. हमने विश्वविद्यालय से अनुमति न मिलने के बावजूद कांशीराम की पुण्यतिथि भी मनाई और हमें कार्यक्रम के बीच में ही रोक दिया गया. चर्चा के दौरान ही हमें देर रात निलंबित कर दिया गया."

ये भी पढ़ें: क्यों दलितों और सवर्णों के बीच टकराव बढ़ने की आशंका है?

विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष

यूनिवर्सिटी के कुलपति रजनीश शुक्ला ने छात्रों के इस दावे का खंडन किया कि उन्होंने कांशीराम की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम के लिए अनुमति मांगी थी."

कुलपति का कहना है कि राज्य में चुनाव का माहौल है और आदर्श आचार संहिता लागू है. उन्होंने कहा, "हमने छात्रों को बताया कि ऐसे माहौल में विश्वविद्यालय किसी भी तरह के राजनीतिक कार्यक्रम की अनुमति नहीं दे सकता."

कुलपति ने बीबीसी को बताया, "हमारे इनकार के बावजूद छात्रों ने 9 अक्टूबर को गांधी हिल में इकट्ठा होकर आंदोलन किया. इसके बाद हमने उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की."

ये भी पढ़ें: मॉब लिंचिंग क्यों नहीं बना चुनावी मुद्दा

इमेज कॉपीरइट MGAHV

चुनाव अधिकारी क्या कहते हैं?

चुनाव निरीक्षक की ज़िम्मेदारी है कि वो जांच करे कि आदर्श आचार संहिता का पालन हो रहा है या नहीं.

यह पूछे जाने पर कि आचार संहिता का पालन न करने के लिए छात्रों पर कार्रवाई क्यों की गई, कुलपति ने कहा, "अभी चुनाव का माहौल है. इस दौरान हम विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी राजनीतिक कार्यक्रमों की अनुमति नहीं है. अगर इन नियमों का पालन नहीं हुआ तो स्थिति बिगड़ने पर कार्रवाई की जा सकती है. हमने इस बारे में चुनाव अधिकारियों को भी सूचित किया है."

वहीं चुनाव अधिकारी सुरेश बागले का कहना है कि विश्वविद्यालय ने उन्हें पत्र भेजा तो था लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब भेजे जाने से पहले ही छात्रों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर दी गई.

बागले ने कहा, "हमने अभी विश्वविद्यालय प्रशासन की चिट्ठी का जवाब नहीं दिया है. उन्हें पूछताछ पूरी होने के बाद ही फ़ैसला लेना चाहिए था. हमें नहीं मालूम कि उन्होंने क्या निर्णय लिया है. हम मामले की जांच कर रहे हैं."

ये भी पढ़ें: मॉब लिंचिंग: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा उसके निर्देश लागू हुए या नहीं?

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार