महाराष्ट्र चुनाव: क्या वादे के मुताबिक़ किसानों के कर्ज़ माफ़ हुए?

  • 13 अक्तूबर 2019
इमेज कॉपीरइट Getty Images

दावा: 'छत्रपति शिवाजी महाराज किसान सम्मान योजना-2017' के तहत राज्य के 89 लाख किसानों का कर्ज़ माफ़ होगा और इसके लिए 34 हज़ार करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाएगा. ये दावा था महाराष्ट्र सरकार का जो उसने जून 2017 में किया था.

हक़ीक़त: सरकार ने जून 2017 में कहा था कि 89 लाख किसानों को कर्ज़ माफ़ी मिलेगी, लेकिन दो साल बाद केवल 43 लाख किसानों के खातों में 18,000 करोड़ रुपये जमा हुए हैं.

महाराष्ट्र सरकार ने छत्रपति शिवाजी महाराज किसान सम्मान योजना को जून 2017 में लागू किया था.

जिन किसानों का क़र्ज़ 1.5 लाख रुपये से कम था उसे तुरंत माफ़ कर दिया गया. इसके तहत यह नहीं देखा गया कि किसी किसान के पास कितनी ज़मीन है.

जिन किसानों का ऋण 1.5 लाख रुपये से अधिक था, उन्हें भी इस योजना का कुछ लाभ मिला है.

इस योजना में 1 अप्रैल 2001 से 31 मार्च 2009 तक ऋण लेने वाले किसानों को शामिल किया गया. साथ ही उन किसानों को भी शामिल किया गया जिन्हें 2008 और 2009 में आई कर्ज़ माफ़ी योजना का लाभ नहीं मिला था और जिन्होंने 1 अप्रैल 2009 के बाद ऋण लिया था. साथ ही वे भी शामिल किये गए जो 30 जून, 2016 तक कर्ज़ नहीं चुका सके थे.

Image caption गणेश कबीरे

ऋण माफ़ी के योग्य होने पर भी कोई लाभ नहीं मिला

गणेश कबीरे अमरावती ज़िले के कारला गाँव में रहते हैं. उनके पास ढाई एकड़ खेत है.

कर्ज़ माफी के बारे में वो कहते हैं "मैंने 2015 में आईडीबीआई बैंक से 50 हज़ार रुपये का कर्ज़ लिया था. वो माफ़ हुआ या नहीं यही जानने के लिए मैं बैंक भी गया. लेकिन बैंक वालों ने कहा कि कर्ज़ माफ़ी के लिए सरकार की ओर से अभी तक कोई पत्र नहीं आया है."

बीबीसी ने जब बैंक में पूछताछ की तो पता चला कि गणेश कबीरे का नाम ऋण माफ़ी के लिए जारी की गई आधिकारिक सूची में था. आईडीबीआई की पिंपलकुटा शाखा के प्रबंधक राम सदर ने कहा, "जब तक फंड ऊपर से नहीं आएगा, हम कुछ नहीं कर सकते."

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का दावा है कि पचास लाक किसानों के कर्ज़ माफ़ी को मंज़ूरी दी गई है. इस पर गणेश कबीरे कहते हैं, "उन्होंने पचास लाख किसानों के कर्ज़ माफ़ करने का दावा किया है लेकिन ऐसा दिखता नहीं है. कुछ किसानों के कर्ज़ माफ़ हुए हैं और कुछ के नहीं."

कबीरे कहते हैं कि हालात ऐसे हैं कि इस साल तूर (एक किस्म की दाल) और कपास की बुवाई के लिए ब्याज पर पैसा लेना पड़ा.

'कर्ज़ माफ़ हुआ'

हालांकि, कारला से 10 किमी दूर बोडना गांव के प्रमोद ठाकरे को ऋण माफ़ी का लाभ मिला है.

वह कहते हैं, "मैंने 2016 में बुवाई के लिए आईडीबीआई बैंक शाखा पिंपलकुटा से 35,000 रुपये का ऋण लिया था. इसे इस साल सितंबर में माफ़ कर दिया गया है."

"मैंने अब एक नए ऋण के लिए बैंक में आवेदन किया है. बैंक द्वारा मुझे बताया गया है कि मुझे 40 हज़ार रुपये तक का ऋण मिल सकता है."

प्रमोद ठाकरे 2 एकड़ खेत के मालिक हैं और अपने खेत में सोयाबीन और तूर की दाल उगाते हैं.

इमेज कॉपीरइट SUBHASH DESHMUKH

क्या कहते हैं आँकड़े?

महाराष्ट्र सरकार ने जून 2017 में राज्य में "छत्रपति शिवाजी महाराज किसान सम्मान योजना" लागू की थी.

सरकार ने कहा था कि 89 लाख किसानों को कर्ज़ माफ़ी मिलेगी और उसके लिए 34 हज़ार करोड़ रुपये का प्रवधान किया जाएगा.

लेकिन, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़, 31 जुलाई 2019 तक केवल 43 लाख 64 हजार 966 किसानों के खातों में 18,649 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं. इसका मतलब यह है कि इस योजना का लाभ आधे से भी कम किसानों को मिला है.

इमेज कॉपीरइट RDD.MAHARASHTRA.GOV.IN

आंकड़ों में ये अंतर क्या कहते हैं?

सरकार ने दावा किया था कि 89 लाख किसानों को कर्ज़ माफ़ी का लाभ मिलेगा लेकिन लाभान्वित सिर्फ़ 43 लाख किसान ही हुए हैं.

आंकड़ों में इस विसंगति के बारे में, सहकारिता मंत्री सुभाष देशमुख ने बीबीसी को बताया, "राज्य में 89 लाख खाताधारक थे, जिनमें से 43 लाख खातों में पैसे जमा किए गए हैं. करदाताओं, जनप्रतिनिधियों, सरकारी कर्मचारियों को इस 89 लाख खातेदारों को इससे बाहर रखा गया है. इसलिए संख्या में विसंगति दिखती है."

राज्य में सरकारी कर्मचारियों की कुल संख्या के बारे में, राज्य सरकार के कर्मचारी संघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष, देवीदास जवारे ने बीबीसी को बताया, "राज्य में कुल 19 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जिनमें सरकार के सभी विभाग, सभी गैर-सरकारी संगठन, ज़िला परिषद, शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी भी शामिल हैं. इनमें से लगभग 20 से 22 फ़ीसदी किसान परिवार से हो सकते हैं."

ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग के 2011 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 33 ज़िला परिषदों में 4,273 प्रतिनिधि हैं, 351 पंचायत समितियों में 4,273, और 27,990 ग्राम पंचायतों में 2 लाख 51 हजार 766 लोग हैं.

इसके अलावा, राज्य विधानसभा और विधान परिषद में विधायकों की संख्या 367 है, जबकि लोकसभा और राज्यसभा में 67 प्रतिनिधि हैं.

जिसका अभिप्राय यह हुआ कि स्थानीय निकायों, साथ ही विधानसभाओं और संसद के प्रतिनिधियों की संख्या लगभग 2 लाख 58 हजार है. लोकप्रतिनिधि और सरकारी कर्मचारियों की कुल संख्या का योग लगभग 22 लाख है.

सरकार के कहने के अनुसार अगर इन सभी को किसान मान लिया जाए तो भी लगभग 24 लाख किसान कर्ज़ माफी के दायरे से बाहर रह जाते हैं. हालांकि इन किसानों में आयकर कितने किसान देते हैं ये आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.

इमेज कॉपीरइट SHUBHAM MANVAR

विपक्ष का आरोप- कर्ज़माफ़ी एक धोखा है

विधान परिषद के विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे का कहना है कि हम सरकार द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़ों पर विश्वास नहीं करते हैं.

वह कहते हैं, "सरकार द्वारा दी गई कर्ज़ माफी एक धोखा है, क्योंकि जिन किसानों को कर्ज़ माफ़ी का प्रमाणपत्र मिला है, उनका ही कर्ज़ अभी तक माफ़ नहीं हुआ है."

हालांकि सरकार इन आरोपों को ख़ारिज करती है.

सहकारिता मंत्री सुभाष देशमुख का कहना है कि अगर कर्ज़ माफ़ी एक धोखा है तो विपक्ष इसे साबित करके दिखाए.

कर्ज़ माफ़ी के लिए आवश्यक शर्तें

कृषि समस्याओं पर विस्तृत जानकारी रखने वाले विजय ज़ावंधिया कहते हैं "समय-समय पर सरकार द्वारा बदलते मानदंडों के कारण कई किसान कर्ज़ माफ़ी से वंचित रह गए."

वह कहते हैं, "सरकार ने शुरू में अनुमान लगाया था कि लगभग 90 लाख किसानों को ऋण माफ़ी का लाभ मिलेगा. लेकिन, जब से ऋण माफ़ी की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है, सरकार का दावा है कि कई फ़र्ज़ी किसान इस लाभ की लिस्ट से बाहर हो गए हैं.

"लेकिन सही मायने में, अधिकांश किसान अभी भी कर्ज़ माफ़ी से वंचित हैं. यह सरकार की कर्ज़ माफ़ी के लिए फॉर्म भरने और कर्ज़ माफ़ी के बदलते मानदंडों के कारण है"

वो आगे कहते हैं "इसके अलावा, सरकार ने किसानों में यह विश्वास नहीं पैदा किया कि ऋण माफ़ी के तुरंत बाद उन्हें नया ऋण मिल सकता है. इसलिए, बहुत से किसान यह नहीं समझ पाए कि यदि किसानों को 1.5 लाख से अधिक ऋण के साथ भुगतान किया जाता है, तो उनका ब्याज माफ़ कर दिया जाएगा और नया ऋण उपलब्ध होगा."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार