#100WOMEN: 100 वीमेन 2019 - कैसा होगा महिलाओं का भविष्य

  • 22 अक्तूबर 2019
BBC 100 WOMEN

बीबीसी की ख़ास मुहिम - बीबीसी 100 वीमेन - के इस साल के आयोजन में हिस्सा लेनेवाली 100 महिलाएँ ये सवाल पूछ रही हैं - "दुनिया भर में महिलाओं के लिए आने वाले दिन कैसे होने वाले हैं?"

बीबीसी 100 वीमेन - ये बीबीसी की एक ख़ास मुहिम है जिसकी शुरुआत 2013 में हुई थी. इसके तहत बीबीसी साल दर साल ऐसी महिलाओं की कहानियों को दुनिया के सामने लेकर आती है जिनसे दुनिया भर की दूसरी महिलाओं को प्रेरणा मिल सकती है.

पिछले 6 सालों में 100 वीमेन सीरीज़ के तहत बीबीसी ने अलग अलग क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया है.

मेक-अप उद्यमी बॉबी ब्राउन, संयुक्त राष्ट्र की डिप्टी सेक्रेटरी जनरल अमीना मोहम्मद, ऐक्टिविस्ट मलाला युसूफ़ज़ई, एथलीट सिमोन बायल्स, सुपरमॉडल एलेक वेक, म्यूज़िशियन अलीसिया कीज़ और ओलंपिक चैंपियन बॉक्सर निकोला ऐडम्स.

2019 में बीबीसी 100 वीमेन सीरीज़ में बात होगी 'द फ़ीमेल फ़्यूचर' की.

'फ़्यूचरिज़्म' यानी - भविष्य को देखने और उसे संवारने की प्रक्रिया. पितृसत्तात्मक समाज में अब तक भविष्य बनाने और संवारने का ज़िम्मा पुरुष ही उठाते रहे हैं. लेकिन इस साल बीबीसी की खास सीरीज़ 100 वीमेन, आप सबको ये बताने जा रही है कि अगर हमारा भविष्य महिलाओं द्वारा संचालित होगा तो कैसा होगा?

बीबीसी 100 वीमेन - सीजन 2019 की सबसे खास पेशकश हैं आने वाली दो फ़्यूचर कॉन्फ़्रेंस. पहली 17 अक्टूबर को लंदन में और दूसरी 22 अक्टूबर को दिल्ली में.

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धुरंधर महिलाएँ

इन कॉन्फ़्रेंस में हम आपकी मुलाकात करावाएंगे उन महिलाओं से जो अपने-अपने क्षेत्र की धुरन्धर हैं- ऐसी महिलाएं, जो विज्ञान, कला, मीडिया, सिनेमा, शिक्षा, फैशन, धर्म, स्पेस और जेंडर के मुद्दों पर ज़ोरदार पकड़ रखती हैं और भविष्य को देखने-समझने के साथ उसको संवारने की ताक़त भी रखती हैं.

स्मार्टफ़ोन और 5G के इस ज़माने में हम आपको मिलवाएंगे एक ईरानी आंत्रप्रन्योर से, जो आपको बताएंगी आने वाले वक्त में यानी भविष्य के स्कूल कैसे होंगे?

इस कॉन्फ़्रेंस में आपकी मुलाक़ात होगी बंगलूरु की उस इंजीनियर से जो 'स्पेस टूरिज्म' जैसी नई अवधारणा से आपको रूबरू करवाएंगी।

इस दौरान फैशन की दुनिया में नाम कमाने वाली इज़राइल की भी एक हस्ती होंगी, जो 3D फैशन की बारीकियों से आपका परिचय करवाएंगी.

अपने-अपने क्षेत्रों की ये महारथी हम सबको 2030 के भविष्य की दुनिया से रूबरू करवाएंगी.

इस कॉन्फ़्रेंस में मौजूद दर्शकों को भी हमारे सम्मानित मेहमानों से सवाल करने का भी मौक़ा मिलेगा. इस कॉन्फ़्रेंस में एक VR एक्सपीरियंस जोन भी होगा, जहां वर्चुअल रिऐलिटी की अलग दुनिया का अनुभव कर पाएंगे।

बीबीसी 100 वीमेन - सीज़न 2019 आप तक एक ऐसा अनुभव लेकर आएगा, जो आपके भविष्य के प्रति आपकी सोच को चुनौती देगा, उसे झकझोरेगा और आपको भविष्य के बारे में अलग नज़रिये से सोचने पर मजबूर कर देगा.

दिल्ली कॉन्फ़्रेंस

कब?

22 अक्टूबर को

कहाँ?

गोदावरी ऑडिटोरियम, आंध्र एसोसिएशन,

24-25 लोधी इंस्टिट्यूशनल एरिया,

नई दिल्ली - 110003

पूरे कॉन्फ़्रेंस को दो हिस्सों में बांटा गया है: सुबह 9.00 से दोपहर 13.00 बजे और दोपहर 14.00 से शाम 17.45 बजे तक

प्रोग्राम

अरण्या जौहर - कविता, समानता और भविष्य

राया बिदशहरी (शिक्षा) - भविष्य के स्कूल: ना कोई विषय, ना दीवारों में बंधा स्कूल, आने वाले वक़्त के लिए एक नई तरह की शिक्षा की परिकल्पना.

साराह मार्टिन्स दा सिल्वा (फ़र्टिलिटी)- पुरुषों का बांझपन: क्या इसका कोई हल है?

सुस्मिता मोहंती (स्पेस ऐंड साइंस)- 21वीं सदी की स्पेस फ्लाइट: कमर की पेटी कस लें और अंतरिक्ष की सैर के लिए तैयार हो जाएं

मैरिलिन वेरिंग और शुभलक्ष्मी नंदी के साथ बातचीत करेंगी देवीना गुप्ता. बातचीत का मुद्दा होगा - महिलाएं जो रोज़मर्रा के काम करती हैं और जिसके लिए उन्हें कोई मेहनताना नहीं मिलता, अगर उनके इस काम को अर्थव्यवस्था में जोड़ लिया जाए तो देश की अर्थव्यवस्था में क्या बदलाव होगा?

दनित पेलेग (फैशन) - 3D प्रिंटिंग के जरिए भविष्य के फ़ैशन में होने वाले बदलाव.

दोपहर का सेशन

पाओला विलारियल (जस्टिस और डाटा इक्वॉलिटी): भविष्य में न्याय की प्रक्रिया क्या होगी? आने वाले दिनों में डेटा और तकनीक कैसे दुनिया की न्याय प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं?

गिना ज़ुर्लो (धर्म) - भविष्य में धर्म की अवधारणां: क्या बच्चे दुनिया चलाएंगे?

प्रगति सिंह (सेक्सुऐलिटी ऐंड जेंडर आइडेंटिटी): सेक्स के आगे क्या: प्यार, परिवार और अपनेपन का भविष्य.

हाइफ़ा सदिरी (बिज़नेस ऐंड आन्त्रप्रन्योरशिप)- वर्चुअल इन्वेस्टमेंट किस प्रकार उत्तरी अफ़्रीका में शिक्षित नौजवानों के पलायन को रोक सकता है?

वासु पीरमलानी (एनवायरनमेंट): पर्यावरण को बचाने के लिए महिलाओं का एक कदम, दुनिया को बचाने में कितनी बड़ी भूमिका निभा सकता है? इतिहास से सबक लेते हुए हम अपनी तरफ क्या एहतियाती कदम उठा सकते हैं?

नंदिता दास (फ़िल्म)- गोरे रंग के लिए फ़िल्म इंडस्ट्री का जुनून: क्या त्वचा का रंग देखकर महिलाओं को फ़िल्मों में काम दिया जाता है?

*इन कार्यक्रमों में ज़रूरत के मुताबिक मामूली फेरबदल हो सकते हैं. ताज़ा अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें.

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