संसद हमला केस से बरी प्रोफ़ेसर गिलानी का निधन

  • 25 अक्तूबर 2019
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Image caption प्रोफ़ेसर एसएआर गिलानी

दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफ़ेसर एसएआर गिलानी का गुरुवार शाम निधन हो गया. उन्हें साल 2001 में हुए संसद हमला मामले में अभियुक्त बनाया गया था हांलाकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इस मामले से बरी कर दिया था.

गिलानी की मौत की वजह कार्डिएक अरेस्ट बताई गई है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, गिलानी के परिवार के एक सदस्य ने बताया, " कार्डिएक अरेस्ट के चलते उनका गुरुवार शाम को इंतकाल हो गया."

साल 2016 में प्रोफ़ेसर गिलानी पर यह आरोप भी लगा था कि उन्होंने दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में संसद हमले के दोषी अफ़ज़ल गुरु की बरसी पर एक कार्यक्रम आयोजित किया था.

तब उन पर देशद्रोह का मामला भी दर्ज हुआ था.

गिलानी के सहयोगी रहे लेखक और प्रोफ़ेसर सुधीश पचौरी ने बीबीसी संवाददाता संदीप राय को बताया कि गिलानी एक ख़ामोश तबियत के व्यक्ति थे. संसद हमला मामले में नाम आने के बाद उन्हें कॉलेज ने निलंबित कर दिया था.

उन्होंने बताया, "कॉलेज में उनकी ज्यादा पहचान नहीं थी. वो आते थे और एक जगह बैठ जाते थे. हम लोग हैरान थे कि उनका नाम इस मामले (संसद हमला केस) में क्यों आया? "

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संसद हमला और फांसी की सज़ा

एसएआर गिलानी के करीबी सहयोगियों के मुताबिक वो मूल रूप से भारत प्रशासित कश्मीर के बारामूला ज़िले के रहने वाले थे.

भारतीय संसद पर 13 दिसंबर 2001 को हुए हमले में शामिल होने के संदेह में सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें गिरफ़्तार किया था.

पोटा क़ानून के तहत गिलानी के साथ अफ़ज़ल गुरु और शौकत हुसैन को भी गिरफ़्तार किया गया था. इस मामले में गिलानी को भी फांसी की सज़ा सुनाई गई थी.

इस सज़ा के ख़िलाफ़ गिलानी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे जहां से उन्हें बाद में बरी कर दिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट में गिलानी का केस जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता नंदिता हकसर ने लड़ा था.

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Image caption अफ़ज़ल गुरु को 09 फरवरी 2013 को फांसी दी गई थी

हमलावर ने मारी थीं पांच गोलियां

प्रोफ़ेसर गिलानी पर एक बार जानलेवा हमला भी हुआ था. साल 2004 में 8 फ़रवरी को जब वो अपनी वकील नंदिता हकसर के घर के पास थे तब एक अज्ञात हमलावर ने उन पर पांच गोलियां चलाई थीं.

इस हमले के लिए गिलानी ने दिल्ली पुलिस को ज़िम्मेदार ठहराया था.

संसद हमले से बरी होने के बाद गिलानी लगातार कश्मीर में मानवाधिकार के मुद्दे को उठाते रहते थे.

गिलानी के परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटियां हैं. प्रोफ़ेसर गिलानी के कई सहयोगियों ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है.

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