अमरीकी कांग्रेस में कश्मीर के ज़िक्र से भारत नाराज़ः प्रेस रिव्यू

  • 25 अक्तूबर 2019
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Image caption विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार

अमरीकी कांग्रेस में विदेश विभाग की समिति में भारत प्रशासित कश्मीर और वहां भारत सरकार के फ़ैसलों पर की गई चर्चा पर भारत ने अपनी नाराज़गी जताई है.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित समाचार के अनुसार विदेश विभाग के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा है कि कश्मीर पर अमरीकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने खेदजनक टिप्पणियां की हैं. रवीश कुमार ने कहा कि इन टिप्पणियों से सदस्यों की सीमित समझ का पता चलता है.

अख़बार लिखता है कि रवीश कुमार ने कहा, ''समिति के लोगों को भारत के फ़ैसले की आलोचना करने की बजाय सीमार पार से कश्मीर में होने वाली प्रायोजित घुसपैठ की निंदा करनी चाहिए थी.''

उन्होंने कहा, ''यह दुखद है कि कुछ सदस्यों ने कश्मीर के लोगों की बेहतरी और कश्मीर में शांति बनाए रखने के मकसद से उठाए गए कदम पर सवाल खड़े किए हैं.''

दरअसल अमरीकी प्रशासन के अधिकारियों ने कहा था कि उनका एक पैनल 5 अगस्त के बाद कश्मीर जाना चाहता था लेकिन नई दिल्ली से इजाज़त नहीं मिली और कहा गया कि कश्मीर जाने का यह सही वक़्त नहीं है.

अयोध्या विवाद से जुड़े केस को भूल चुके हैंः चीफ़ जस्टिस

सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि वह अयोध्या विवाद से जुड़े केस को भूल चुके हैं.

दैनिक भास्कर में प्रकाशित समाचार के अनुसार मोल्डिंग ऑफ़ रिलीफ़ की दलीलों को लेकर पहुंचे पक्षकार भी उन्होंने इसे भूल जाने के लिए कहा, हालांकि बाद में कोर्ट ने पक्षकार का दो पन्नो का नोट रिकॉर्ड पपर ले लिया.

सुप्रीम कोर्ट ने एक हिंदू पक्षकार को 'मोल्डिंग ऑफ़ रिलीफ़' के तहत लिखित नोट दाखिल करने की इजाजत दे दी, उमेश चंद्र पांडेय की तरफ से दाखिल नोट में मांग की गई है कि अगर अयोध्या की विवादित भूमि हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को नहीं दी जाती है, तो 2.77 एकड़ जमीन को सरकारी घोषित किया जाए.

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एनआरसी और नागरिकता बिल पर कांग्रेस करेगी मंथन

सोनिया गांधी के कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद बनाए गए नीति समूह की पहली बैठक में पार्टी कई विवादित मुद्दों पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की कोशिश करेगी.

द हिंदू की ख़बर के मुताबिक, इनमें सबसे अहम मुद्दे नागरिकता संशोधन बिल और एनआरसी है. ये बैठक शुक्रवार को निर्धारित की गई है.

कहा गया है कि कांग्रेस शीतकालीन सत्र से पहले इन दोनों ही मुद्दों पर अपना रुख साफ करना चाहती है, क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि इस सत्र में बीजेपी इन दोनों पर बिल पास करवाने की कोशिश करेगी.

कांग्रेस के इस नीति समूह में मनमोहन सिंह, राहुल गांधी, अहमद पटेल, गुलाम नबी आज़ाद, एके एंटोनी, मल्लिकार्जुन खडगे, आनंद शर्मा, जयराम रमेश, अंबिका सोनी, कपिल सिब्बल, प्रियंका गांधी, अधिर रंजन चौधरी और के सी वेणुगोपाल शामिल हैं.

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इस बैठक की ज़रूरत इसलिए भी पड़ रही हैं क्योंकि हाल ही में कुछ राज्यों में कांग्रेस के नेताओं ने एनआरसी के मुद्दे का समर्थन किया था. इसमें मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिज़ोरम शामिल हैं.

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