महाराष्ट्र में बीजेपी के सामने शिवसेना झुकेगी?

  • 29 अक्तूबर 2019
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भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि शिव सेना के साथ सत्ता में भागेदारी को लेकर चुनाव से पहले कोई भी 50:50 का फार्मूला तय ही नहीं हुआ था.

ये बात खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कुछ पत्रकारों के सामने साफ़ की. इन पत्रकारों को मुख्यमंत्री फडणवीस ने भोज पर बुलाया था. इन पत्रकारों में बीबीसी मराठी सेवा की प्राजक्ता भी थीं.

इससे पहले सोमवार को दोनों ही दलों यानी भाजपा और शिव सेना ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से अलग अलग मुलाक़ात की थी.

फडणवीस ने कहा कि बुधवार को भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल की बैठक होगी जिसमें विधायक दल का नेता चुना जाएगा.

पहले चर्चा थी कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह भी बैठक में शामिल होंगे. मगर फडणवीस ने कहा कि इस बैठक में शाह शामिल नहीं होंगे.

मगर शिवसेना आक्रामक है और लगातार भाजपा पर दबाव बनाए हुए है. इससे महाराष्ट्र में सरकार बनने को लेकर पेच फंसा हुआ ही है.

शिव सेना के प्रवक्ता और राज्यसभा के सांसद संजय राउत ने पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे का हवाला देते हुए कहा कि उनकी 'पार्टी के पास विकल्प हैं. मगर उन विकल्पों को अपनाने का पाप नहीं करेंगे'.

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शिव सेना का दावा

हालांकि राउत ने यह भी कहा, "शिवसेना सत्य और नीति की राजनीति हमेशा से करती आयी है. सत्ता के हम भूखे नहीं हैं. सत्ता के लिए कुछ भी करना लोकतंत्र की हत्या करने जैसा है. यहां कोई दुष्यंत नहीं हैं जिनके पिताजी जेल में थे. यहां हम हैं जो नीति और धर्म की राजनीति करते हैं. सत्य की राजनीति करते हैं. यहां शरद पवार जी हैं जिन्होंने भाजपा के ख़िलाफ़ माहौल खड़ा कर दिया और चुनाव लड़े. यहां कांग्रेस पार्टी है जिनके पास एक आंकड़ा है जो भाजपा के साथ कभी नहीं जायेगी."

इससे पहले बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा से बात करते हुए संजय राउत ने कहा था कि बीजेपी अगर ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री के फॉर्मूले पर तैयार होती है तो उनकी पार्टी बाद में अपना मुख्यमंत्री बनाने पर भी तैयार हो जाएगी.

राउत ने ये भी कहा था कि नतीजे आने के बाद से शिवसेना और बीजेपी के बीच सरकार के गठन और सत्ता के बंटवारे को लेकर बात नहीं हुई है. उन्होंने कहा था, "हम इंतज़ार कर रहे हैं कि बीजेपी इस विषय में हमसे बात करे."

बीजेपी के संपर्क में शिव सेना के विधायक?

वहीं भाजपा के राज्य सभा से सांसद संजय काकडे ने पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया है कि उनके संपर्क में शिवसेना के 40 से 45 विधायक हैं.

लेकिन फडणवीस ने इस बारे में कोई बात नहीं कही. अलबत्ता उन्होंने शिवसेना को इतनी सी नसीहत दी कि जब उनका मुखपत्र यानी सामना भारतीय जनता पार्टी के ख़िलाफ़ लिखता है और टिप्पणियां करता है तो उसे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के ख़िलाफ़ भी टिप्पणी करनी चाहिए.

वैसे फडणवीस ने शिवसेना को नसीहत दी कि जिस तरह 'सामना' में भाजपा के ख़िलाफ़ टिप्पणियां हो रहीं हैं, उन्हें तत्काल बंद होना चाहिए.

पूर्ण बहुमत के बावजूद महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना में सत्ता को लेकर संघर्ष जारी है और भाजपा ने संकेत दिए हैं कि अगले पांच सालों तक राज्य में उसी का मुख्यमंत्री होगा.

तो सवाल उठता है कि क्या फिर शिव सेना उप मुख्यमंत्री पद को लेकर संतुष्ट हो जायेगी या फिर, ये राजनीतिक खींचतानी फिर भी जारी रहेगी ?

ये खींचतानी इसलिए भी चल रही है क्योंकि महाराष्ट्र में सरकार गठन हो सकने के लिए अभी भी दस दिनों का समय है. जानकार कहते हैं कि इसलिए दोनों ही घटक दल एक दूसरे पर दबाव बनाने का काम कर रहे हैं. लेकिन दोनों दलों को एक सप्ताह के अंदर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना होगा और राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश करना होगा. अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर महाराष्ट्र के संवैधानिक संकट के आसार बढ़ जाएंगे.

भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना का गठजोड़ साल 1986 से ही है. सिर्फ़ साल 2014 के विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ी थीं.

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